झारखंड कांग्रेस का चुनाव आयोग पर बड़ा दबाव: मतदाता सूची पुनरीक्षण की अवधि 1 महीना बढ़ाने की मांग, कम सुनवाई और लंबी कतारों पर जताई कड़ी आपत्ति
Jharkhand News: आगामी चुनावों को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य को लेकर सियासत गरमा गई है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को राज्य निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर मुख्य चुनाव अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने मांग की है कि प्रक्रिया में आ रही तकनीकी अड़चनों और कमियों को देखते हुए दावा-आपत्ति और सुनवाई की समयसीमा को कम से कम एक महीने के लिए बढ़ाया जाए।
मुलाकात में शामिल रहे ये दिग्गज नेता:
इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के कई वरिष्ठ चेहरे शामिल थे। इनमें प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, उपाध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता, सतीश पाल मुंजनी, महासचिव लालकिशोर नाथ शाहदेव, सूर्यकांत शुक्ला और संजय कुमार प्रमुख रूप से मौजूद रहे। नेताओं ने चुनाव आयोग के अधिकारियों के सामने धरातल पर आ रही व्यावहारिक समस्याओं को रखा।
धनबाद का दिया हवाला, सुस्त सुनवाई पर उठाए सवाल:
कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयोग को लिखे पत्र के माध्यम से बताया कि ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद जितने नोटिस जारी किए गए हैं, उनकी तुलना में सुनवाई की रफ्तार बेहद धीमी है। उदाहरण के तौर पर सिर्फ धनबाद जिले का जिक्र करते हुए बताया गया कि वहां 4.45 लाख से ज्यादा नोटिस जारी होने थे, लेकिन ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक अब तक महज 36 हजार मामलों की ही सुनवाई पूरी हो पाई है। स्थिति यह है कि मतदाता सुबह से कतार में खड़े रहते हैं और बिना सुनवाई के ही उन्हें अगले दिन आने को कहा जाता है, जिससे जनता परेशान है।
फॉर्म-6 और फॉर्म-7 को लेकर रखी ये प्रमुख मांगें:
- ग्राम सभाओं में फिर से हो ड्राफ्ट रीडिंग: कांग्रेस ने 15 अगस्त की तर्ज पर एक बार फिर ग्राम सभाओं में ड्राफ्ट रोल पढ़कर सुनाए जाने की मांग की है, ताकि एएसडीडीओ (ASDDO) सूची की त्रुटियों को सुधारा जा सके।
- युवाओं का कम नामांकन: पार्टी का तर्क है कि राज्य में 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले या आगामी 1 अक्टूबर 2026 तक पात्र होने वाले युवाओं की संख्या करीब 20 लाख होनी चाहिए, जबकि फॉर्म-6 के जरिए अब तक केवल 4.39 लाख आवेदन ही मिले हैं। इसलिए अंतिम तिथि बढ़ाई जानी चाहिए।
- फॉर्म-7 पर पारदर्शिता: आपत्तियों से जुड़े फॉर्म-7 को लेकर मांग की गई है कि किस राजनीतिक दल ने कितनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं, इसका सार्वजनिक ब्योरा दिया जाए। साथ ही, नाम हटाने के प्रस्ताव पर दोनों पक्षों का व्यक्तिगत पक्ष सुनना अनिवार्य किया जाए।







