टाइफाइड पर लगाम लगाने के लिए झारखंड सरकार का बड़ा कदम, जल्द शुरू होगी सेंटिनल सर्विलांस प्रणाली
Ranchi: झारखंड में टाइफाइड जैसी संक्रामक बीमारी पर नियंत्रण और उसकी निगरानी को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग जल्द ही टाइफाइड सेंटिनल सर्विलांस शुरू करने जा रहा है. इस नई व्यवस्था के जरिए राज्य में टाइफाइड के मामलों की पहचान, निगरानी और समय पर उपचार में मदद मिलेगी.
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार सेंटिनल सर्विलांस प्रणाली के तहत चयनित अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में टाइफाइड के मरीजों के आंकड़े एकत्र किए जाएंगे. इसके माध्यम से बीमारी के फैलाव, प्रभावित क्षेत्रों और संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी.
इस वर्कशॉप का उद्देश्य टाइफाइड बुखार की साक्ष्य-आधारित निगरानी को मजबूत करना है. इसके अलावा भविष्य में यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के अंतर्गत टाइफाइड कंजुगेट वैक्सीन (TCV) की शुरुआत हेतु आवश्यक आधार तैयार करना था.

वर्कशॉप में भारत में टाइफाइड की बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती, रोग के वास्तविक बोझ के आकलन, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की निगरानी, प्रकोप की पहचान तथा टीकाकरण रणनीति को मजबूत करने के लिए प्रभावी सर्विलांस की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई.
राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के मार्गदर्शन तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तकनीकी सहयोग से चयनित शहरों में संचालित किया गया. मुख्य अतिथि के तौर पर वर्कशॉप में शामिल हुए NHM झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने राज्य में रोग निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल में सभी संस्थानों के सहयोग की सराहना करते हुए समयबद्ध रिपोर्टिंग एवं समन्वित जनस्वास्थ्य कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया.
कार्यशाला में राज्य के स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉ. अरुण कुमार, डॉ. अमरेंद्र कुमार, राज्य टीकाकरण पदाधिकारी डॉ. विजय किशोर तथा राज्य सर्विलांस पदाधिकारी (SSO) डॉ. प्रदीप ने उपस्थित प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया. उन्होंने टाइफाइड सर्विलांस के उद्देश्यों, प्रयोगशाला आधारित निदान की आवश्यकता तथा सेंटिनल साइट्स की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला.
वहीं, रांची रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार ने ब्लड सैंपल कलेक्शन, प्रयोगशाला जांच की प्रक्रिया तथा सैंपल की गुणवत्ता बनाए रखने के मानकों पर तकनीकी प्रस्तुति दी. इस कार्यशाला में राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), पीडियाट्रिक विभाग, प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (PSM) विभाग, रानी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल, अंजुमन इस्लामिया अस्पताल तथा सदर अस्पताल, रांची के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया.
प्रतिभागियों के साथ केस परिभाषा, सैंपल संग्रहण, प्रयोगशाला जांच, डेटा रिपोर्टिंग तथा विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई. कार्यक्रम का समापन सभी सहभागी संस्थानों द्वारा रांची में टाइफाइड सेंटिनल सर्विलांस को सफलतापूर्वक लागू करने तथा झारखंड में जनस्वास्थ्य व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ.







