कुपोषण से लड़ाई को मिलेगी रफ्तार, झारखंड सरकार अगले माह से महिलाओं और बच्चों को देगी टेक-होम राशन
Jharkhand: झारखंड में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों के लिए बड़ी राहत की तैयारी की जा रही है. राज्य सरकार अगले माह से आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से टेक-होम राशन (THR) का वितरण शुरू करने की योजना पर काम कर रही है. इसके तहत पात्र लाभार्थियों को घर ले जाने योग्य पोषक आहार उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि मातृ एवं शिशु कुपोषण को कम करने में मदद मिल सके. यह व्यवस्था समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) के तहत संचालित की जाएगी, जिसमें 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों के साथ-साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण सामग्री दी जाती है.

विभाग ने अब पोषाहार वितरण दोबारा शुरू करने के लिए वित्त विभाग से आवश्यक वित्तीय स्वीकृति प्राप्त कर ली है. टेक होम राशन के तहत लाभुकों को घर ले जाने के लिए पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध करायी जाती है, जिससे गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के साथ-साथ छोटे बच्चों को आवश्यक पोषण मिल सके.
वित्त विभाग ने टेक इन होम राशन की आपूर्ति करने वाली एजेंसी को सशर्त अवधि विस्तार दिया है. वित्त विभाग ने महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को छह माह के अंदर नये सिरे से एजेंसी चयन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है. इसके लिए विभाग द्वारा टेंडर जारी किया जायेगा.
पोषाहार में क्या मिलता है ?
लाभुकों को पोषण संबंधी मानकों के अनुरूप सूखा राशन या रेडी-टू-कुक मिश्रण दिया जाता है. लाभुकों को दाल, सोयाबीन, मुंगफली से तैयार सूखा खाद्य सामग्री का पैकेट दिया जाता है
क्या है टेक होम राशन?
- आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से घर ले जाने के लिए दिया जाने वाला पोषाहार.
- गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को मिलता है पोषाहार.
- इसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु कुपोषण को कम करना और पोषण स्तर में सुधार लाना है.
- पोषाहार का वितरण समेकित बाल विकास सेवा के तहत किया जाता है.
इन्हें मिला अवधि विस्तार
राशन आपूर्ति के लिए तीन एजेंसी को जिम्मेदारी दी गयी है. तीनों को आठ-आठ जिलों में आपूर्ति का जिम्मा मिला है.
- आदित्य फ्लोर लिमिटेड
- कोटा दाल मील
- इंटर लिक्स फूड्स प्राइवेट लिमिटेड
क्यों बंद था वितरण?
पोषाहर वितरण के लिए चयनित एजेंसी के 31 मार्च तक ही इसकी जिम्मेदारी मिली थी. नयी एजेंसी के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई न ही पहले से कार्य कर रही एजेंसी को अवधि विस्तार दिया गया.







