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लोकल से ग्लोबल तक का सफर, पूर्वी सिंहभूम के आम अब विदेशी बाजारों में बिखेरेंगे मिठास...

Jamshedpur: पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम, पटमदा, घाटशिला, मुसाबनी इलाकों में किसान बड़े पैमाने पर आम की खेती कर रहे हैं, जिसमें लंगड़ा, बैगनपिल्ली, देसी, आम्रपाली, हिमसागर, मलिक्का और बनाना आम का उत्पादन होता है. पूर्वी सिंहभूम उपायुक्त राजीव रंजन ने किसानों के उगाए आमों को पहचान दिलाने की बात कही.
 
JHARKHAND

Jamshedpur: पूर्वी सिंहभूम के किसानों के लिए अच्छी खबर है. जिले में उत्पादित आम अब विदेशों तक पहुंचेंगे. कृषि एवं उद्यान विभाग की पहल से आम के निर्यात (एक्सपोर्ट) की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है. अधिकारियों के अनुसार, पूर्वी सिंहभूम के आमों की गुणवत्ता और स्वाद को देखते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए किसानों को आधुनिक खेती, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और निर्यात संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.

Mangoes from East Singhbhum

बता दें कि पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम, पटमदा, घाटशिला, मुसाबनी इलाकों में किसान बड़े पैमाने पर आम की खेती कर रहे हैं, जिसमें लंगड़ा, बैगनपिल्ली, देसी, आम्रपाली, हिमसागर, मलिक्का और बनाना आम का उत्पादन होता है. पूर्वी सिंहभूम उपायुक्त राजीव रंजन ने किसानों के उगाए आमों को पहचान दिलाने की बात कही. उन्होंने बताया कि बनाना आम का नाम बदलकर उसे अब आदिवासी नाम दिया गया है, अब इसे कायरा आम के नाम से जाना जाएगा.

उन्होंने बताया कि किसान मल्लिका, आम्रपाली, लंगड़ा और कई दूसरी वैरायटी के आम उगा रहे हैं. आमों की क्वालिटी की वजह से विदेशी व्यापारी भी यहां आ रहे हैं. हमारा मकसद है कि आम महोत्सव के जरिए किसानों को बेहतर दाम मिलें और विदेशी व्यापारी भी आकर्षित हों, उन्हें एक प्लेटफॉर्म मिले. हमारी कोशिश है कि यहां उगाए गए आम यूरोपियन यूनियन और दूसरे देशों तक पहुंचें, लोग यहां उगाए गए आमों का स्वाद चख सकें और झारखंड को अच्छे आमों के उत्पादक के तौर पर पहचान मिले.

Mangoes from East Singhbhum

 किसान अपने आम लेकर आए हैं, वे भी खुश हैं कि उनके आमों को पहचान मिल रही है. कमला महतो बताती हैं कि उपायुक्त ने उनके बनाना आम का नाम रखा है, जो आदिवासी भाषा पर आधारित है और अब इसे कायरा आम के नाम से जाना जाएगा. हमें आम की पैदावार के लिए पूरा सपोर्ट मिल रहा है, जिससे हमारी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

Mangoes from East Singhbhum

किसानों को बेहतर आम उगाने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है, जिसमें उन्हें रखवाली करना और सुरक्षित रखने की ट्रेनिंग दी जा रही है. किसानों को आम बेचने में मदद करने वाले मो. हामिद बताते हैं कि जिले के आम अब विदेश में एक्सपोर्ट करने के लिए तैयार किए जा रहे हैं, और लोग यहां पैदा होने वाले आमों का बेसब्री से इंतज़ार करेंगे.