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जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक बने झारखंड हाईकोर्ट के 18वें Chief Justice, CM हेमंत ने दी बधाई...

Ranchi: शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने नये मुख्य न्यायाधीश को पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई दी. झारखंड हाईकोर्ट के नये मुख्य न्यायाधीश महेश शरदचंद्र सोनक का कार्यकाल 28 नवंबर 2026 तक रहेगा...
 
CM HEMANT SOREN

Ranchi: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनाक को झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. राजभवन के बिरसा मंडप में शुक्रवार सुबह 9.30 बजे के करीब लोकभवन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस शपथग्रहण समारोह के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्य सरकार के मंत्री, झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं न्यायिक और प्रशासनिक सेवा से जुड़े कई बड़े अधिकारी मौजूद थे.

NEW CHIEF JUSTICE OF JHARKHAND

नए मुख्य न्यायाधीश को गुलदस्ता देते राज्यपाल

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने नये मुख्य न्यायाधीश को बधाई दी

शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने नये मुख्य न्यायाधीश को पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई दी. झारखंड हाईकोर्ट के नये मुख्य न्यायाधीश महेश शरदचंद्र सोनक का कार्यकाल 28 नवंबर 2026 तक रहेगा. गौरतलब है कि जस्टिस तरलोक सिंह चौहान का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कल 8 जनवरी को उनके सम्मान में फुल कोर्ट फेयरवेल रेफरेंस आयोजित कर विदाई दी गई.

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हस्ताक्षर करते झारखंड हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश 

जानिए कौन हैं न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक

न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक का जन्म 28 नवंबर 1964 को हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गोवा के पणजी स्थित डॉन बॉस्को हाई स्कूल से हुई. बचपन से ही कानूनी पढ़ाई के प्रति इच्छा रखने वाले जस्टिस सोनक ने अपने करियर में लक्ष्य के रूप में रखकर इसे साकार किया. धेपे कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस से बीएससी तथा एमएस कॉलेज ऑफ लॉ, पणजी से प्रथम श्रेणी में एलएलबी की उपाधि प्राप्त की. उन्होंने जेवियर सेंटर ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च से पुर्तगाली भाषा में डिप्लोमा भी हासिल किया. वे अक्तूबर 1988 में महाराष्ट्र एवं गोवा बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए.

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राज्यपालसे हाथ मिलाते मुख्यमंत्री

उन्होंने मुंबई उच्च न्यायालय की पणजी पीठ में सिविल व संवैधानिक कानून, श्रम एवं सेवा कानून, पर्यावरण कानून, वाणिज्यिक एवं कर कानून, कंपनी कानून तथा जनहित में याचिकाओं के क्षेत्र में प्रैक्टिस की. 21 जून 2013 को वे मुंबई उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और दो मार्च 2016 को स्थायी न्यायाधीश बने.