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रांची यूनिवर्सिटी में करमा की धूम! 9 भाषाओं में करम गीत, मांदर की थाप पर झूमे छात्र

Ranchi: रांची यूनिवर्सिटी में करमा पर्व के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. परिसर में नौ अलग-अलग भाषाओं में करम गीत गूंजे और मांदर की थाप पर छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया. कार्यक्रम में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्कीभी शामिल हुईं.
 
JHARKHAND

Ranchi: झारखंड में करमा पर्व की धूम है। गांवों से लेकर शहरों तक अखड़ों में करम गीतों की गूंज और मांदर की थाप सुनाई दे रही है। इसी क्रम में रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के प्रसिद्ध अखड़े में करम पूजा महोत्सव-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय संस्कृति की विविधता देखने को मिली।

Karam Puja festival

महोत्सव में नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में करम गीत, पारंपरिक लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी शामिल हुईं और कलाकारों के साथ मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य किया।

पारंपरिक विधि-विधान से हुई करम पूजा

करम पूजा महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ हुई। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने करम डाली की पूजा-अर्चना की। पारंपरिक तरीके से करम डाली की स्थापना कर पूजा संपन्न कराई गई। इसके बाद जावा को सजाया गया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया।

Karam Puja festival

पूजा के बाद उपस्थित लोगों के कानों में जावा फूल लगाने की पारंपरिक रस्म भी निभाई गई। इस दौरान पूरा अखड़ा उत्सव के रंग में नजर आया।

करमा पर्व प्रकृति और भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक: शिल्पी नेहा तिर्की

पूजा के बाद कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने लोगों को करमा पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि करमा आदिवासी समाज के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह पर्व प्रकृति संरक्षण, भाई-बहन के प्रेम और सामुदायिक एकजुटता से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि करमा पर्व के जरिए प्रकृति के प्रति सम्मान और पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश मिलता है।

नौ भाषाओं में करम गीत और लोकनृत्य ने बांधा समां

महोत्सव का प्रमुख आकर्षण जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से जुड़ी नौ जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं में करम गीतों और लोकनृत्य की प्रस्तुतियां रहीं।

अलग-अलग भाषाओं में करम गीतों की प्रस्तुति के दौरान कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। गीतों के साथ मांदर की थाप ने पूरे अखड़े के माहौल को उत्सव में बदल दिया। दर्शक भी कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ झूमते और तालियां बजाते नजर आए।

इन प्रस्तुतियों में प्रकृति, कृषि, भाई-बहन के रिश्ते और सामुदायिक जीवन से जुड़े भावों को लोकगीतों और नृत्य के माध्यम से सामने रखा गया।

कलाकारों के साथ मांदर की थाप पर थिरकीं मंत्री

कार्यक्रम के दौरान जब कलाकारों ने मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य शुरू किया तो कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी उनके बीच पहुंचीं। उन्होंने कलाकारों के साथ कदम मिलाया और पारंपरिक नृत्य में हिस्सा लिया।

मंत्री के नृत्य में शामिल होने के बाद कार्यक्रम का उत्साह और बढ़ गया। अखड़े में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ कलाकारों और अतिथियों का उत्साह बढ़ाया।

कई शिक्षाविद और विश्वविद्यालय के अधिकारी हुए शामिल

करम पूजा महोत्सव में रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा, झारखंड ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति समेत कई शिक्षाविद, विश्वविद्यालय के अधिकारी और जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से जुड़े लोग शामिल हुए।

अतिथियों ने करमा पर्व की सांस्कृतिक परंपरा और इसके महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम के जरिए नई पीढ़ी को झारखंड की भाषाओं, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ने का संदेश भी दिया गया।

भाषाई विविधता और लोक विरासत का मंच बना आयोजन

रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि झारखंड की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने का मंच भी बना।

नौ अलग-अलग भाषाओं में गीत-संगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों ने राज्य की समृद्ध भाषाई विविधता की झलक दिखाई। करम डाली की पूजा, जावा सजाने और जावा फूल लगाने की परंपरा से लेकर लोकगीत और पारंपरिक नृत्य तक, पूरे आयोजन में झारखंडी संस्कृति की छाप दिखाई दी।

मांदर की थाप और करम गीतों के बीच रांची विश्वविद्यालय का अखड़ा देर तक उत्सवमय रहा। आयोजन ने करमा पर्व से जुड़े प्रकृति प्रेम, भाई-बहन के स्नेह, कृषि परंपरा और सामुदायिक एकजुटता के संदेश को भी सामने रखा।