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पोटका में मलेरिया ने ली भयावह शक्ल: 72 घंटे में चार बच्चों की जान गई, गांवों में दहशत

East Singhbhum: ब्रेन मलेरिया के कारण जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्रा लखी सरदार, आठ वर्षीय राहुल सरदार, आठ वर्षीय सुबोला सरदार और सुबोली सरदार की छोटी बहन 1 साल की खुशबू सरदार शामिल हैं. इन बच्चों की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक और भय का माहौल है.
 
JHARKHAND

East Singhbhum: पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया ने भयावह रूप ले लिया है. बीते 72 घंटों के भीतर चार मासूम बच्चों की मौत से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. सबसे हृदयविदारक मामला तब सामने आया जब एक ही परिवार की दो नन्ही बेटियों की ब्रेन मलेरिया से मौत हो गई.

जमशेदपुर के पोटका में ब्रेन मलेरिया का कहर: दो दिनों में 3 बच्चों की मौत,  कस्तूरबा स्कूल की छात्राओं समेत 9 नए मरीज मिले - brain malaria outbreak in  potka 3 ...

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सभी बच्चों में तेज बुखार, झटके और बेहोशी जैसे लक्षण सामने आए थे. परिजनों द्वारा अस्पताल ले जाने से पहले ही कुछ बच्चों की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी. इलाज के दौरान चारों बच्चों ने दम तोड़ दिया. बीते 72 घंटों के भीतर चार बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं. इनमें कई बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है. स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन जिस तेजी से मरीज सामने आ रहे हैं, उसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है.

पोटका में ब्रेन मलेरिया का बढ़ता कहर: 9 महीने की बच्ची समेत 9 नए मरीज मिले,  KGBV की 3 छात्राएं संक्रमित - potka brain malaria outbreak 9 new cases and  3 kgbv students infected

72 घंटे में चार बच्चों की मौत से दहशत

ब्रेन मलेरिया के कारण जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्रा लखी सरदार, आठ वर्षीय राहुल सरदार, आठ वर्षीय सुबोला सरदार और सुबोली सरदार की छोटी बहन 1 साल की खुशबू सरदार शामिल हैं. इन बच्चों की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक और भय का माहौल है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में लगातार बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं. कई लोग समय पर इलाज नहीं मिलने और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की शिकायत भी कर रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई जांच में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की तीन छात्राओं समेत नौ नए मरीजों की पहचान की गई है. विद्यालय में एक साथ कई छात्राओं के बीमार होने से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है. प्रशासन ने विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू कर दिया है. साथ ही छात्राओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है.

सेरेब्रल मलेरिया क्या है?

ब्रेन मलेरिया से संक्रमित कई बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया है. इनमें एक साल की मासूम बच्ची भी शामिल थी, जिसकी बाद में मौत हो गई.

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कई मरीजों को तेज बुखार, उल्टी, बेहोशी और दौरे पड़ने जैसी गंभीर समस्याओं के साथ भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों के इलाज में जुटी हुई है.

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में विशेष अभियान शुरू किया है. स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं तथा संभावित मरीजों की पहचान की जा रही है. अब तक 600 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है. टीम ग्रामीणों को मलेरिया से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक भी कर रही है.

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स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि संक्रमित मरीजों की पहचान कर उनका तत्काल इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.

प्रशासन ने कस्तूरबा विद्यालय की एक छात्रा के इलाज में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में एक निजी क्लिनिक को सील कर दिया है. जिला प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

रविवार को जमशेदपुर के जिला उपायुक्त ने डिमना स्थित एमजीएम अस्पताल का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने अस्पताल की तीसरी से लेकर छठी मंजिल तक विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया. उपायुक्त ने ब्रेन मलेरिया और अन्य मलेरिया मरीजों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली. साथ ही मरीजों के परिजनों से भी बातचीत कर अस्पताल में मिल रही सुविधाओं और उपचार व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की. निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार और अस्पताल अधीक्षक डॉ. बलराम झा भी मौजूद रहे.

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निरीक्षण के बाद उपायुक्त ने बताया कि अस्पताल में भर्ती दो बच्चों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य मरीजों की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को सभी मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और इलाज में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहने देने का निर्देश दिया.

अस्पताल निरीक्षण के दौरान दवाओं की उपलब्धता तथा पेयजल व्यवस्था की भी समीक्षा की गई. अस्पताल प्रशासन ने जानकारी दी कि दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की परेशानी नहीं है. साथ ही अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल परिसर में 15 जुलाई तक नियमित जलापूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह बहाल कर दिया जाएगा.

हरिणा पंचायत के कंदर गांव से सामने आई घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले महावीर सरदार की दो मासूम बेटियों की मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है. एक वर्षीय खुशबू सरदार ने चार दिनों तक एमजीएम अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद सोमवार सुबह दम तोड़ दिया. इससे पहले उसकी बड़ी बहन आठ वर्षीय सुबोला सरदार की भी ब्रेन मलेरिया से मौत हो चुकी थी. सिर्फ चार दिनों के भीतर दो बेटियों को खोने के बाद पिता महावीर सरदार पूरी तरह टूट चुके हैं. परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि अब उनकी तीसरी बेटी भी तेज बुखार से पीड़ित बताई जा रही है.

क्या है ब्रेन मलेरिया?

ब्रेन मलेरिया मलेरिया का सबसे गंभीर रूप माना जाता है. यह मुख्य रूप से संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है. समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है.

इसके प्रमुख लक्षण हैं—

  • तेज बुखार
  • ठंड लगना
  • लगातार उल्टी होना
  • सिर दर्द
  • बेहोशी
  • शरीर में ऐंठन या दौरा पड़ना
  • अत्यधिक कमजोरी

बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेन मलेरिया से बचाव के लिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है.

  • सोते समय कीटनाशकयुक्त मच्छरदानी का उपयोग करें.
  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें.
  • पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें.
  • बुखार होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र जाएं.
  • स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें.

पोटका में फैले ब्रेन मलेरिया के इस प्रकोप ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और जागरूकता की आवश्यकता को उजागर कर दिया है. फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नियंत्रण पाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन लोगों की सतर्कता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार साबित हो सकती है.