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अस्पताल की लापरवाही..रांची में टूटे पैर का इलाज कराने पहुंचे मरीज की मौत, 22 लाख का बिल थमाया..सीएम हेमंत सोरेन ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

Ranchi: टूटे पैर के इलाज के लिए पहुंचे मरीज को इलाज के लिए आईसीयू में भर्ती किया गया. जहां उसकी मौत हो गई. मरीज की मौत के बाद अस्पताल द्वारा परिजनों से 22 लाख रुपये का बिल जमा करने को कहा गया. पूरे मामले पर सीएम हेमंत सोरेन ने संज्ञान लिया है और कार्रवाई का आदेश दिया है.
 
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Ranchi: राजधानी रांची में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें टूटे पैर का इलाज कराने आए एक मरीज की असामयिक मौत हो गई और इलाज के बाद अस्पताल ने 22 लाख रुपये का बिल थमा दिया. इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पतालों के बिलिंग सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

पैर के इलाज से शुरू हुआ मामला, 22 लाख के बिल और मौत तक पहुंचा विवाद, अब CM  हेमंत सोरेन ने दिए जांच के आदेश

परिजनों का आरोप है कि टूटे पैर के इलाज के लिए पहुंचे मरीज को इलाज के लिए आईसीयू में भर्ती किया गया. जहां उसकी मौत हो गई. मरीज की मौत के बाद अस्पताल द्वारा परिजनों से 22 लाख रुपये का बिल जमा करने को कहा गया. पूरे मामले पर सीएम हेमंत सोरेन ने संज्ञान लिया है और कार्रवाई का आदेश दिया है.

दरअसल, लातेहार का रहने वाले राजू सड़क हादसे में घायल हो गए थे. वह पैर के इलाज के लिए रांची के निजी अस्पताल में भर्ती हुए थे, जहां उनकी मौत हो गई. परिवारवालों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े एक पोस्ट का संज्ञान लेते हुए तुरंत कड़ा रुख अपनाया है. सीएम ने रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री को पूरे मामले की गहराई से जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है.

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद रांची प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया. डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची के सिविल सर्जन को तुरंत जांच और कार्रवाई का जिम्मा सौंपा है. इस पूरे मामले की निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक जिला स्तरीय विशेष जांच टीम का गठन भी कर दिया गया है. यह टीम अस्पताल के रिकॉर्ड और इलाज के तरीकों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.


स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी मामले में संज्ञान लिया है और कहा कि इलाज में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने मामले को अत्यंत गंभीर बताया. उन्होंने अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य अजय कुमार को उच्चस्तरीय जांच टीम गठित कर निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने का निर्देश दिया है.

उन्होंने कहा कि यदि जांच में हॉस्पिटल दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमों के अनुसार कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मरीजों की सुरक्षा, सम्मान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

क्या है पूरा मामला

लातेहार के रहने वाले 18 वर्षीय राजू कुमार रंजन को बीते 24 मई को सड़क हादसे में पैर टूटने के बाद राज अस्पताल में भर्ती कराया गया था. परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई, जिससे राजू के पैर में गंभीर इंफेक्शन फैल गया. आरोप लगाया गया कि 2-3 दिन तक ड्रेसिंग नहीं की गई, जिस चलते इंफेक्शन फैल गया. हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा, जहां राजू ने दम तोड़ दिया.

राजू की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने जब परिजनों को 22 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल थमाया, तो उनका गुस्सा उबाल पर आ गया. परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर बवाल किया. घरवालों का सीधा आरोप है कि डॉक्टरों और मैनेजमेंट की घोर लापरवाही के चलते उनके बच्चे की जान चली गई. उनका सवाल था कि चोट और जख्म पैर में था तो इंफेक्शन सिर तक कैसे पहुंच गया. परिजनों के दबाव के बाद राजू के शव का पोस्टमार्टम रिम्स में कराया गया.