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झारखंड की राजनीति में नया विवाद: सीएम हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पर खतियान को लेकर गंभीर सवाल, भाजपा नेता भानु प्रताप शाही का बड़ा हमला

Palamu: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर भाषा और स्थानीय पहचान को लेकर विवाद तेज हो गया है. भाजपा नेता भानु प्रताप शाही ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शाही का कहना है कि दोनों के पास पलामू से संबंधित कोई वैध खतियान नहीं है, फिर भी वे इस क्षेत्र की भाषा और पहचान पर राजनीति कर रहे हैं.
 
HEMANT SOREN AND KALAPANA SOREN

Palamu: झारखंड सरकार की कैबिनेट ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 की नियमावली को मंजूरी दे दी है. इस नियमावली में पलामू और गढ़वा जिलों के लिए स्थानीय भाषा के रूप में नागपुरी और कुडुख (उरांव) को शामिल किया गया है, जबकि भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को बाहर रखा गया है. इस फैसले को लेकर विपक्षी दल भाजपा ने नाराजगी जताई है.

BJP नेता भानु प्रताप शाही का सरकार पर हमला

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पूर्व मंत्री और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने शुक्रवार को पलामू में मीडिया से बात करते हुए झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि इस फैसले से पलामू-गढ़वा के लोगों का अपमान किया जा रहा है. भानु प्रताप शाही ने दावा किया कि स्थानीय लोगों की भाषा छीनी जा रही है, उनकी जमीन छिनने की साजिश है और उन्हें “बाहरी” करार देकर अपमानित किया जा रहा है.

उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन के पास खतियान (भूमि दस्तावेज) नहीं है, लेकिन पलामू-गढ़वा के लोगों के पास खतियान है. उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार इन लोगों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों कर रही है.

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भानु प्रताप शाही ने कैबिनेट बैठक के दौरान सत्ताधारी दल के कुछ मंत्रियों के “बीमार” पड़ने का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि फैसला हो रहा था और मंत्री अस्पताल पहुंच गए. यह बीमारी असली थी या सुविधाजनक, यह भी सवाल है. उन्होंने पलामू प्रमंडल के सत्ताधारी दल के विधायकों और मंत्रियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे क्यों चुप हैं? इन लोगों को इस्तीफा दे देना चाहिए.

भानु प्रताप शाही ने चुनौती दी कि पलामू-गढ़वा के लोग इस भाषा नीति को तभी मानेंगे जब सत्ताधारी दल के मंत्रियों और विधायकों के बेटे पहले नागपुरी और कुडुख में JTET की परीक्षा देकर दिखाएं. उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की भाषा को नजरअंदाज कर उन्हें बाहरी बताना अन्याय है.

भानु प्रताप शाही ने याद दिलाया कि भाजपा सरकार के समय 13-11 नीति लागू होने पर उन्होंने और गढ़वा के भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने विरोध किया था. उनके विरोध के कारण बाउरी कमेटी गठित हुई और विवादित फैसला वापस लेना पड़ा था.

आंदोलन की दी चेतावनी

भानु प्रताप शाही ने स्पष्ट चेतावनी दी कि भाजपा इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी. पार्टी चरणबद्ध आंदोलन करेगी. पहले सत्ताधारी दल के मंत्रियों-विधायकों के घरों को घेरा जाएगा, फिर आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि भाजपा कोयला ढुलाई भी रोक देगी. पलामू-गढ़वा के एक-एक वासी इस आंदोलन में शामिल होंगे और इसे मजबूत बनाएंगे.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी नेता ने हजारीबाग में पत्रकारों पर हमले का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कद्दावर मंत्री चंद्रशेखर दुबे (ददई दुबे) को बर्खास्त कर दिया था, तो इरफान अंसारी को क्यों नहीं बर्खास्त किया जा रहा? अगर उनकी जगह भानु प्रताप शाही या भानु तिवारी होते तो उन्हें तुरंत बर्खास्त कर दिया जाता. शाही ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछने का अधिकार है.