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New GST Rate: सस्ता सस्ता या महंगा महंगा ? क्या है GST की नयी नीति झारखंड वासियों के लिए...

 
GST Meeting

Jharkhand Desk: जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक बुधवार को नई दिल्ली में शुरू हुई. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई प्रस्तावों पर मुहर लगी है. वित्त मंत्री ने साफ किया कि अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब होंगे, जो 5% और 18% होंगे. मतलब आप ये भी समझ सकते हैं कि अब 12 और 28 फीसदी के जीएसटी स्लैब को खत्म कर दिया गया है और इनमें शामिल ज्यादातर चीजें सिर्फ मंजूर किए गए दो टैक्स स्लैब के अंदर आ जाएंगी. इसके चलते कई सामान सस्ते हो जाएंंगे. हालांकि, विलासिता (गैर-ज़रूरी उत्पाद या सेवाएँ हैं जो लोगों को आय बढ़ने पर अधिक खरीदनी पसंद हैं, और ये अक्सर प्रतिष्ठा, सामाजिक मूल्य या भावनात्मक संतुष्टि से जुड़ी होती हैं, उदाहरण डिज़ाइनर कपड़े, महंगी कारें, आभूषण, लक्जरी घड़ियाँ) और हानिकारिक वस्तुओं (तंबाकू और पान मसाला) के लिए एक अलग स्लैब को मंजूरी मिली है, जो 40% का है. ये बदलाव 22 सितंबर से लागू होंगे.


वहीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने झारखंड का पक्ष रखा. इस दौरान राज्य सरकार ने नयी नीति का विरोध तो नहीं किया है, लेकिन यह जरूर बताया है कि इससे राज्य के राजस्व को भारी नुकसान होगा. साथ ही वित्त मंत्री ने की राज्य को हर साल 2000 करोड़ मुआवजा देने की मांग. 

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि झारखंड एक उत्पादक (मैन्युफैक्चरिंग) स्टेट है. जीएसटी प्रणाली से राज्य के आतंरिक राजस्व संग्रहण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. उन्होंने इसके पक्ष में दलील देते हुए कहा कि झारखंड की प्रति व्यक्ति आय प्रति वर्ष 1 लाख 5 हजार रुपये है. लोगों की क्रय शक्ति कमजोर होने से झारखंड उपभोक्ता राज्य की श्रेणी में नहीं आता है. इस कारण हमें जीएसटी में नुकसान होता है.

राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि झारखंड के कोयला और स्टील उत्पादन के लगभग 75 से 80 प्रतिशत की खपत राज्य के बाहर होती है. इस कारण जीएसटी का लाभ उपभोक्ता वाले राज्यों को हो रहा है. वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से 2022 तक पांच वर्षों के लिए राज्य को जीएसटी में मुआवजा मिला. लेकिन पांच वर्ष बाद मुआवजा बंद हो गया. केंद्र सरकार झारखंड जैसे गरीब प्रदेश का मुआवजा बंद नहीं करे. हम आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो पायें, इसके लिए मुआवजा जरूरी है. हर वर्ष 2000 करोड़ मुआवजा देने की गारंटी हो, तभी झारखंड मजबूत हो पायेगा.

Jharkhand Finance Minister Radhakrishna Kishore

राधाकृष्ण किशोर ने यह भी कहा कि झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था काफी कमजोर है. कृषि योग्य भूमि के मात्र 22 प्रतिशत खेतों में ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है. पर्यटन क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाओं के बावजूद आर्थिक कमी के कारण झारखंड लक्ष्य तक नहीं पहुंच पा रहा है. मानव संसाधन का अभाव बना हुआ है. झारखंड उग्रवाद से प्रभावित राज्य रहा है. स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य को अभी बहुत काम करना है. 

साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि दरों को युक्तिसंगत बनाने के लिए एक मजबूत राजस्व संरक्षण का ढांचा और लग्जरी वस्तुओं पर एक पूरक शुल्क लागू होना चाहिए. ऐसा संतुलित दृष्टिकोण ही राज्यों की राजकोषीय स्वायत्तता की रक्षा करेगा.