धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर निशिकांत दुबे का बड़ा बयान, बोले- ‘दबाव में नहीं लिया फैसला, दुर्भाग्यपूर्ण घटना’
Jharkhand News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भारत के इतिहास की दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि प्रधान ने किसी दबाव में इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि अपने फैसले से यह कदम उठाया है।
झारखंड के देवघर में मीडिया से बातचीत के दौरान निशिकांत दुबे ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान छात्र राजनीति से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलावों पर काम किया, जिसमें नई शिक्षा नीति लागू करना, विश्वविद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया और परीक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे विषय शामिल हैं।
निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्हें लगता है कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने मन से इस्तीफा देने का फैसला लिया है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को आंदोलनों से दूर रखें और पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और आईपीएस तभी बन सकते हैं, जब वे पढ़ाई करेंगे।
अमित शाह बोले- पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश और युवा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए किसी पद से अधिक महत्वपूर्ण देश, युवा और विद्यार्थी हैं। उनके मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसी भावना को दर्शाता है।
वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस्तीफे को न्याय की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह उन युवाओं की जीत है, जो न्याय और संविधान के दायरे में रहकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
सोनम वांगचुक ने बताया लोकतंत्र की जीत
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि अब जवाबदेही तय होने के साथ शिक्षा और शासन व्यवस्था में सुधार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
इसी बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों के बीच जश्न का माहौल देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा लहराया, नारे लगाए और एक-दूसरे को बधाई दी। प्रदर्शन स्थल पर नाच-गाने के साथ देशभक्ति के गीत भी सुनाई दिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार की अगली रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।







