Newshaat_Logo

न सड़क, न रास्ता! खेतों की मेड़ और नदी पार कर स्कूल जाते हैं डुमरी के बच्चे

Koderma: जयनगर प्रखंड का डुमरी गांव आज भी सड़क और सुरक्षित आवागमन की सुविधा से वंचित है. ग्रामीणों के मुताबिक, रेलवे की चारदीवारी के बाद गांव का पुराना रास्ता बंद हो गया, जिसके बाद कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं बनाया गया. करीब 900 की आबादी वाले गांव के बच्चे अब खेतों की मेड़ और पगडंडियों से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं.
 
JHARKHAND

Koderma:  विकास की योजनाओं के बीच कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड का डुमरी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रखंड मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में आवागमन के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही कोई सुगम एवं सुरक्षित रास्ता। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क के अभाव में गांव की स्थिति ऐसी हो गई है कि बरसात के दिनों में यहां पहुंचना और बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है।

जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे

रेलवे की चारदीवारी के बाद बंद हुआ पुराना रास्ता

ग्रामीणों के मुताबिक, पहले डुमरी गांव तक पहुंचने के लिए एक कच्ची सड़क थी। लेकिन पिछले वर्ष रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए रेलवे की ओर से चारदीवारी किए जाने के बाद यह रास्ता भी बंद हो गया।

ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद गांव के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं कराया गया। अब लोगों को पगडंडियों और खेतों की मेड़ों के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है।

स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव में जिन लोगों के पास चारपहिया वाहन हैं, उन्हें भी अपने वाहन दूसरे गांव में रिश्तेदारों के यहां खड़े करने पड़ते हैं।

करीब 900 की आबादी, बच्चों की परेशानी सबसे ज्यादा

डुमरी गांव की आबादी करीब 900 बताई जा रही है। गांव में पहले नवसृजित प्राथमिक विद्यालय संचालित था। ग्रामीणों के अनुसार, रेलवे की चारदीवारी के बाद इस विद्यालय को उत्क्रमित मध्य विद्यालय ककरचोली में मर्ज कर दिया गया।

विद्यालय दूर होने के कारण छोटे बच्चों को अब खेतों की मेड़ और पगडंडियों से होकर स्कूल जाना पड़ता है। बारिश के दौरान रास्ता फिसलन भरा और जोखिमपूर्ण हो जाता है, जिससे अभिभावकों की चिंता भी बढ़ जाती है।

नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे

उच्च शिक्षा के लिए बच्चों की परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों को करीब 5 से 6 किलोमीटर दूर उत्क्रमित मध्य विद्यालय सांथ या परियोजना बालिका उच्च विद्यालय, जयनगर जाना पड़ता है।

बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बच्चों के लिए यह रास्ता और खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे पत्थरों पर पैर रखते हुए नदी पार करते हैं और फिर पुल के रास्ते स्कूल तक पहुंचते हैं।

ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताती रहती है। ग्रामीणों की मांग है कि कम से कम स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था तत्काल की जाए।

चुनावी आश्वासनों से ग्रामीणों का भरोसा टूटा

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई बार सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक जमीनी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।

ग्रामीणों के अनुसार, चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों की ओर से सड़क निर्माण समेत कई सुविधाओं का भरोसा दिया जाता है, लेकिन चुनाव के बाद समस्या जस की तस रह जाती है। इसी वजह से अब ग्रामीणों का भरोसा जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों से उठता जा रहा है।

प्रशासन से वैकल्पिक रास्ते की मांग

ग्रामीण बाबूलाल यादव, सूर्यनारायण यादव, मुकेश यादव, राजेश रविदास, मुख्तार अंसारी और अनवर अंसारी समेत अन्य लोगों ने जिला प्रशासन से डुमरी गांव के लिए तत्काल वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी सड़क बनने में समय लग सकता है, लेकिन बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए फिलहाल सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था जरूरी है। खासकर बारिश के मौसम में नदी और पगडंडी के रास्ते बच्चों के स्कूल जाने से किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।