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बंगाल में अब सफाई का ‘फाइन’! थूका तो ₹100, कचरा फेंका तो ₹200

Kolkata: पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर ₹100 और कचरा फैलाने पर ₹200 जुर्माना लगेगा. सिंगल यूज प्लास्टिक बैग, खुले में शौच और पेशाब पर भी फाइन का प्रावधान है.
 
West Bengal

Kolkata: पश्चिम बंगाल में शहरों को साफ-सुथरा रखने और लोगों की आदतों में बदलाव लाने के लिए सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाने की व्यवस्था शुरू की है। अब सड़क या सार्वजनिक स्थान पर थूकने पर 100 रुपये और कचरा फेंकने या गंदगी फैलाने पर 200 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

शहरी विकास एवं नगर निकाय मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जुर्माने के जरिए राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि लोगों की आदतों में बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि शहरों को साफ रखने के लिए सरकार के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।

थूकने पर ₹100, कचरा फैलाने पर ₹200 फाइन

नई व्यवस्था के तहत सार्वजनिक स्थान पर थूकते हुए पकड़े जाने पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, सार्वजनिक स्थान पर कचरा फेंकने या गंदगी फैलाने पर 200 रुपये की पेनल्टी देनी होगी।

इसके अलावा खुले में शौच करने या सार्वजनिक स्थान पर पेशाब करने पर भी 200 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, 125 माइक्रोन से कम मोटाई वाले सिंगल यूज प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल करने पर भी 200 रुपये का फाइन देना होगा।

पहले से कानून, लेकिन प्रभावी तरीके से लागू करने में चुनौती

सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाने और थूकने के खिलाफ पहले से ही कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। हालांकि, अधिकारियों और नगर निकायों को इन नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने में कई बार मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।

मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि जुर्माने की राशि जानबूझकर कम रखी गई है। सरकार का मुख्य लक्ष्य कोलकाता समेत राज्य के शहरों को साफ और सुंदर बनाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल जुर्माना लगाने से शहर पूरी तरह साफ नहीं हो सकते। इसके लिए लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव जरूरी है।

“सरकार अकेले किसी शहर को साफ नहीं रख सकती। जब तक यह भावना लोगों के मन से नहीं आएगी, तब तक सख्ती या जुर्माने से यह हासिल नहीं किया जा सकता।”
— अग्निमित्रा पॉल, नगर विकास मंत्री, पश्चिम बंगाल

एक साल में बदलाव की उम्मीद

अग्निमित्रा पॉल ने लोगों से अपने आसपास की जगहों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों को यह महसूस करना होगा कि शहर और राज्य केवल सरकार के नहीं, बल्कि उनके भी हैं।

मंत्री ने कहा कि लोगों में यह भावना विकसित होनी चाहिए कि ‘यह मेरा शहर है, मेरा राज्य है और मैं इसे गंदा नहीं करूंगा।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने के प्रयासों का असर अगले एक साल में दिखाई देने लगेगा।

वाहन से कचरा फेंकने और बस से थूकने पर भी नजर

मंत्री ने लोगों से अपील की कि वाहन चलाते समय या यात्रा के दौरान सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करें। उन्होंने कहा कि कार की खिड़की खोलकर पैकेट या कचरा सड़क पर फेंकने से पहले और बस से थूकने से पहले लोगों को एक बार जरूर सोचना चाहिए।

उन्होंने माना कि कड़े नियमों को लागू करने के लिए नगर निकायों की मौजूदा व्यवस्था अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। इसे मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

बाजार और रेलवे स्टेशन के आसपास लगेंगे कूड़ेदान

सरकार की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर सफाई व्यवस्था बेहतर करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। बाजारों और रेलवे स्टेशनों के आसपास कई जगहों पर कूड़ेदान लगाए जा रहे हैं

इसके साथ ही सार्वजनिक शौचालयों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि खुले में शौच और पेशाब जैसी समस्या को कम किया जा सके।

प्लास्टिक बैग के विकल्प के लिए लगेंगी मशीनें

सरकार प्रतिबंधित प्लास्टिक बैग के विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रही है। अग्निमित्रा पॉल के अनुसार, प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाले निर्माताओं को प्रतिबंधित प्लास्टिक की जगह दूसरे विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

बाजारों में वैकल्पिक थैले उपलब्ध कराने के लिए मशीनें लगाने की योजना है। इसके तहत दो तरह की मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। एक मशीन से एक रुपये में मक्के से बने थैले उपलब्ध कराने की योजना है, जबकि दूसरी मशीन से 5 से 10 रुपये में कपड़े के थैले मिल सकेंगे।

रिहायशी इलाकों में नहीं रखे जाएंगे कूड़ेदान

मंत्री ने बताया कि रिहायशी इलाकों के अंदर जगह-जगह कूड़ेदान रखने के बजाय घरों से ही कचरा अलग-अलग करके लेने की व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा।

लोगों को घरों से निकलने वाले कचरे को दो अलग-अलग थैलों में अलग करके सफाई कर्मचारियों को देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे गीले और सूखे कचरे को अलग करने की व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

2019 में भी थे जुर्माने के प्रावधान

पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने और थूकने को लेकर पहले भी जुर्माने के प्रावधान किए जा चुके हैं।

  • 2019 में संशोधित नगर निकाय कानून के तहत सार्वजनिक स्थान पर थूकने पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता था।
  • कोलकाता में अवैध तरीके से कचरा फेंकने पर 50 रुपये से 5,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था।

अब सरकार का जोर इन नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के साथ-साथ लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने पर है। सरकार का मानना है कि जुर्माना केवल एक उपाय है, जबकि स्थायी स्वच्छता के लिए लोगों की भागीदारी सबसे जरूरी है।