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झारखंड बजट सत्र के तीसरे दिन, विधायक रामेश्वर उरांव ने हाथी-मानव संघर्ष पर जताई चिंता और रखी कई मांगें..पढ़िए...

Ranchi: सदन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी हाथियों को लेकर सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि हाथी-मानव संघर्ष के पीछे कई कारण हैं, जिनमें पर्यावरणीय बदलाव भी शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि हाथियों के अलावा अन्य हिंसक वन्य प्राणियों और सांपों के मामलों के लिए भी SOP तैयार की जा रही है, ताकि किसी घटना के तुरंत बाद अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंच सकें...
 
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Ranchi: प्रदेश में जंगली हाथियों के बढ़ते हमले और उससे हो रही मौतों को लेकर झारखंड विधानसभा में गंभीर बहस देखने को मिली. कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सरकार से हाथी-मानव संघर्ष पर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की. उन्होंने कहा कि पिछले दो हफ्तों में जंगली हाथियों के हमले से 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जो बेहद चिंताजनक है.

विधायक रामेश्वर उरांव ने सवाल उठाया कि झारखंड में हाथी से मौत पर जहां 4 लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है, वहीं पड़ोसी राज्यों में यह राशि अधिक है. उन्होंने मुआवजा बढ़ाने, एलीफेंट रेस्क्यू सेंटर की स्थापना, घायल हाथियों के इलाज और “मोबाइल वेटरनरी यूनिट” के गठन पर सरकार की मंशा स्पष्ट करने की मांग की.

इस पर वन एवं पर्यावरण मंत्री सुदिव्य कुमार ने सदन को बताया कि ओडिशा में जंगली हाथी से मौत पर 6 लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एलीफेंट रेस्क्यू सेंटर के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ चुकी है. फिलहाल राज्य के पास प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम नहीं है, लेकिन जल्द ही क्विक रिस्पांस टीम का गठन किया जाएगा. मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि दो मोबाइल वेटरनरी यूनिट पर विचार किया जा रहा है और एलिफेंट कॉरिडोर में हाथियों के लिए भोजन की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी, ताकि भोजन की कमी के कारण संघर्ष न बढ़े. उन्होंने कहा कि हाथियों के ट्रेंकुलाइज करने में मददगार छह कुनकी हाथियों को तमिलनाडु से मंगवाजा जा रहा है. मुआवजा की राशि बढ़ाने को लेकर भी सरकार गंभीर है.

सदन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी हाथियों को लेकर सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि हाथी-मानव संघर्ष के पीछे कई कारण हैं, जिनमें पर्यावरणीय बदलाव भी शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि हाथियों के अलावा अन्य हिंसक वन्य प्राणियों और सांपों के मामलों के लिए भी SOP तैयार की जा रही है, ताकि किसी घटना के तुरंत बाद अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंच सकें.

मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले पांच वर्षों में हाथियों के रूट पर अवैध माइनिंग की गतिविधियां सामने आई हैं. अलग-अलग राज्यों में मुआवजे की राशि अलग होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड में भी मुआवजा बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. सरकार ने स्पष्ट किया कि हाथियों और ग्रामीणों के बीच टकराव कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे और वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को इस संबंध में कड़े निर्देश दिए गए हैं.