देशभर में SIR को लेकर जारी विवाद...SIR के दौरान BLO की मौतों के पीछे की क्या है साजिश?
Jharkhand Desk: देशभर में SIR को लेकर विवाद जारी है. SIR प्रक्रिया के दौरान यूपी समेत कई राज्यों में लगातार बढ़ रही BLO की मौतों ने प्रशासनिक सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है. विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभ्यास के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की मौतों को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और भाजपा पर BLOs पर अत्यधिक कार्यभार डालने का आरोप लगाते हुए इसे 'वोट चोरी का घातक मोड़' करार दिया है.
वहीं भाजपा ने इन आरोपों को 'झूठा नैरेटिव' बताते हुए सीबीआई से जांच की मांग की है. पार्टी का कहना है कि क्या वाकई एक महीने में 1000-1500 घरों का सत्यापन मौत का कारण बन सकता है, या इसके पीछे कोई और साजिश है? भाजपा ने सवाल उठाया है कि विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे ये नैरेटिव विदेशी हैंडल्स और टूल किट्स से प्रचारित तो नहीं हो रहे, जिसकी भी गहन जांच जरूरी है.

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने यह बात उठाई. भाजपा प्रवक्ता ने बीएलओ की मौत को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवाल और एसआईआर पर विपक्ष और कुछ कथित विदेशी हैंडल से बनाई जा रही धारणा की गहन जांच की मांग उठाई है, यहां तक कि भाजपा ने इस पर सीबीआई जांच तक की भी मांग उठा दी.
आपको बता दें कि निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पारदर्शी बनाना है. इसी प्रक्रिया के तहत एक बीएलओ को लगभग 1000-1500 घरों में जाकर मतदाताओं का सत्यापन करने का काम दिया गया है, जो नियमित प्रक्रिया के अंतर्गत आता है.

भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि इस प्रक्रिया में BLOs को अपने बूथ क्षेत्र के हर घर का सत्यापन करना पड़ता है, जिसमें औसतन 1000 से 1500 घरों तक पहुंचना शामिल है. यह काम एक महीने में पूरा करने का टारगेट क्या BLOs पर इतना अधिक है कि पश्चिम बंगाल, झारखंड और अन्य राज्यों में कई BLOs की मौतें दर्ज की जा रही हैं. क्या एक दिन में लगभग 30 से 35 घरों में जाना मौत का कारण बन सकता है या विपक्ष द्वारा नेगेटिव नैरेटिव फैलाया जा रहा है. इस पर गहन जांच होनी चाहिए. उन्होंने सीधे-सीधे विपक्ष पर देश के खिलाफ विदेशी ताकतों के हाथ में बिकने आरोप लगाया है.
यदि आंकड़ों के अनुसार देखें तो, SIR के दूसरे चरण में ही 16 से अधिक BLOs की संदिग्ध मौतें हुई हैं, जिनमें से कई को आत्महत्या या हार्ट अटैक से जोड़ा जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में हाल ही में जालपाईगुड़ी की BLO शांति मुनी एक्का की कथित आत्महत्या ने विवाद को भड़का दिया. उनके परिवार ने दावा किया कि SIR के दबाव के कारण उन्होंने सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें कार्यभार का जिक्र था. इसी तरह, कोलकाता में BLOs ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने कार्य तनाव के खिलाफ आवाज उठाई.
उधर, विपक्षी नेता इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा पर 'वोट चोरी का घातक कदम' उठाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि SIR अभ्यास नोटबंदी और कोविड लॉकडाउन की तरह जल्दबाजी में लागू किया गया है, जिससे BLOs की मौतें हो रही हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया 'अराजक' है और BLOs पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है. ममता ने EC से SIR रोकने की मांग की और दावा किया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं पर ही दबाव डाला जा रहा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे 'सुधार नहीं, अत्याचार' करार देते हुए कहा कि SIR देश में अराजकता फैला रहा है.
विपक्ष का आरोप है कि भाजपा SIR के जरिये विपक्ष की मजबूत पकड़ वाले क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम काटने की साजिश रच रही है, जिससे BLOs पर दबाव बढ़ा है.
BLOs को परेशान कर रहे TMC के 'माफिया': BJP
भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'सस्ती राजनीति' बताया है. उन्होंने कहा कि पारदर्शी चुनाव के लिए SIR जरूरी है और विपक्ष इसे बाधित करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने पश्चिम बंगाल और झारखंड में BLOs पर TMC और अन्य विपक्षी दलों के 'धमकियों' का जिक्र किया. उन्होंने कहा, "विपक्ष SIR को बाधित करने के लिए अफवाहें फैला रहा है. बिहार में वही SIR प्रक्रिया चली, वहां कोई मौत नहीं हुई. बंगाल में क्यों? क्योंकि वहां TMC के 'माफिया' BLOs को परेशान कर रहा है."
भाजपा ने बीएलओ की मौतों की सीबीआई जांच की मांग की है. पार्टी का तर्क है कि क्या इतना कार्यभार (1000-1500 घरों का सत्यापन) वाकई मौत का कारण बन सकता है? या इसके पीछे टीएमसी जैसी पार्टियों का दबाव, व्यक्तिगत समस्याएं या कोई साजिश है?
इसके अलावा, भाजपा ने विपक्ष के नेगेटिव नैरेटिव पर सवाल उठाया कि ये विदेशी फंडेड हैंडल्स और टूल किट्स से प्रचारित तो नहीं हो रहे, जैसा कि पार्टी पहले चुनावी हस्तक्षेप के मामलों में आरोप लगा चुकी है. प्रेम शुक्ला ने लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों का जिक्र किया है. उन्होंने मृत BLOs के मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आए और SIR जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को बदनाम न किया जाए.







