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रातभर जागकर गैस का इंतजार, मच्छरदानी में सोए लोग..खूंटी में सिलेंडर संकट ने बढ़ाई आम जनता की परेशानी...

Ranchi: खूंटी जिले से एलपीजी संकट की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां अनिगड़ा स्थित बिरसा गैस एजेंसी के गोदाम के बाहर उपभोक्ता सिलेंडर की कतार लगाकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे. हालात इतने खराब हो गए कि कुछ लोगों को मच्छरदानी लगाकर सड़क किनारे ही रात बितानी पड़ी. इसके बावजूद कई लोगों को सिलेंडर नहीं मिल सका.
 
JHARKHAND

Ranchi: खूंटी जिले में एलपीजी गैस संकट ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. हालात ऐसे हो गए कि गैस सिलेंडर पाने के लिए उपभोक्ताओं को पूरी रात एजेंसी के बाहर लाइन में बितानी पड़ रही है. कई लोगों ने मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी लगाकर सड़क किनारे ही रात गुजारी, लेकिन सुबह होते-होते गैस स्टॉक खत्म हो गया और दर्जनों लोग बिना सिलेंडर के लौटने को मजबूर हो गए.

रातभर कतार, सुबह निराशा

स्थानीय लोगों के अनुसार गैस वितरण की सूचना मिलते ही शाम से ही एजेंसी के बाहर भीड़ जुटने लगी. रात बढ़ने के साथ लाइन लंबी होती चली गई. महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सब सिलेंडर की आस में बैठे रहे. कई परिवारों ने चटाई, कंबल और मच्छरदानी के सहारे वहीं सोकर रात काटी. सुबह जब वितरण शुरू हुआ तो सीमित स्टॉक के कारण कुछ ही लोगों को सिलेंडर मिल पाया, जबकि बड़ी संख्या में उपभोक्ता खाली हाथ रह गए.

घरेलू रसोई ठप, सबसे ज्यादा असर गरीब परिवारों पर

गैस नहीं मिलने से घरों की रसोई ठप पड़ गई है. खासकर दिहाड़ी मजदूर, छोटे दुकानदार और निम्न आय वर्ग के परिवारों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है. मजबूरी में लोग फिर से लकड़ी या चूल्हे पर खाना बनाने को विवश हैं, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर असर पड़ रहा है.

उपभोक्ताओं का आरोप: अव्यवस्था और सूचना का अभाव

उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि

  • गैस की उपलब्धता को लेकर स्पष्ट सूचना नहीं दी जाती
  • वितरण व्यवस्था पारदर्शी नहीं है
  • ग्रामीण इलाकों में समय पर सप्लाई नहीं पहुंच रही

कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ उपभोक्ताओं को पहले सिलेंडर दे दिया जाता है, जबकि लाइन में लगे लोग इंतजार करते रह जाते हैं.

प्रशासन और एजेंसी पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. लोगों का कहना है कि अगर समय पर सप्लाई और सही शेड्यूल जारी किया जाए तो रातभर लाइन लगाने की नौबत नहीं आए. स्थानीय स्तर पर निगरानी और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग तेज हो गई है.

क्या कहते हैं लोग

एक उपभोक्ता ने कहा, “रातभर मच्छरों के बीच बैठे रहे, बच्चों को घर पर छोड़कर आए थे, लेकिन सुबह कहा गया कि गैस खत्म हो गई।”
एक महिला उपभोक्ता बोलीं, “सरकार उज्ज्वला की बात करती है, लेकिन यहां गैस ही नहीं मिल रही।”

समाधान की मांग

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि

  • गैस की सप्लाई बढ़ाई जाए
  • वितरण के लिए टोकन सिस्टम लागू हो
  • ग्रामीण क्षेत्रों में अलग से कैंप लगाकर गैस उपलब्ध कराई जाए

जब तक व्यवस्था नहीं सुधरती, तब तक खूंटी में गैस संकट से लोगों को राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है.