RIMS-2 को लेकर झारखंड में सियासी संग्राम, ST आयोग के आदेश की अनदेखी के आरोप; सरकार और विपक्ष में जुबानी जंग तेज
Ranchi: झारखंड में RIMS-2 के निर्माण को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। अनुसूचित जनजाति (ST) आयोग द्वारा निर्माण कार्य पर रोक लगाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद काम जारी रहने के आरोपों ने सियासी माहौल गरमा दिया है. इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने-सामने आ गई हैं.

विपक्ष का आरोप है कि ST आयोग के निर्देशों की अनदेखी कर निर्माण कार्य जारी रखा जा रहा है, जो आयोग की गरिमा और संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि यदि आयोग ने निर्माण रोकने का आदेश दिया है, तो उसका पालन क्यों नहीं किया गया.
6 जुलाई को आयोग ने साफ निर्देश दिया था कि जब तक इस मामले की सुनवाई आयोग के समक्ष पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा. हालांकि जब नगड़ी स्थित ईटीवी भारत की टीम निर्माण स्थल पर पहुंची, तो वहां सामान्य दिनों की तरह निर्माण कार्य चलता मिला. इसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है.
झामुमो का हमला
झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहनी चाहिए लेकिन कुछ लोग 'हेमंत फोबिया' से ग्रसित होकर सरकार के विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं. उन्होंने सिरमटोली फ्लाईओवर का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां भी इसी तरह का आदेश दिया गया था लेकिन आखिरकार फ्लाईओवर बनकर तैयार हुआ और आज सभी उसका उपयोग कर रहे हैं. उनका कहना था कि रांची को RIMS-2 की जरूरत है और जानबूझकर परियोजना में अड़चन पैदा की जा रही है.
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर से 222 एकड़ कृषि योग्य भूमि और आदिवासी रैयतों के हितों का मुद्दा उठाए जाने पर मनोज पांडेय ने कहा कि यह आरोप तथ्यहीन है. उनके मुताबिक, बाबूलाल मरांडी और रघुवर दास के कार्यकाल में इसी जमीन पर रिंग रोड और लॉ कॉलेज बना. इसी जमीन पर बिरसा कृषि विश्वविद्यालय जैसी परियोजनाएं विकसित हुई. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी आदिवासियों के नाम पर राजनीति कर रही है. उन्होंने कोयलकारो जल विद्युत परियोजना और पत्थलगड़ी आंदोलन के दौरान आदिवासियों पर हुई कार्रवाई का भी जिक्र करते हुए बीजेपी पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाया.

JMM के बयान पर भाजपा का पलटवार
प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता संदीप वर्मा ने कहा कि यदि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने निर्माण कार्य रोकने का निर्देश दिया है तो उसका पालन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय आने तक निर्माण कार्य बंद रहना चाहिए. भाजपा का कहना है कि आयोग भी RIMS-2 के निर्माण के पक्ष में है लेकिन उपजाऊ कृषि भूमि पर अस्पताल बनाने के बजाय किसी दूसरी जगह का चयन किया जाना चाहिए. संदीप वर्मा ने सुझाव दिया कि रांची में पहले से RIMS मौजूद है, इसलिए उसकी व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए और RIMS-2 को आसपास के किसी जिले में स्थापित करने पर विचार किया जाए.
क्या था एसटी आयोग का निर्देश?
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने हाल ही में रांची दौरे के दौरान कहा था कि RIMS-2 के लिए प्रस्तावित 222 एकड़ भूमि को लेकर आयोग को शिकायत मिली है. इसके बाद आयोग ने रांची जिला प्रशासन और राजस्व अधिकारियों से भूमि अधिग्रहण की पूरी रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने यह भी जानकारी तलब की है कि कितने रैयतों को मुआवजा मिला है, कितनी जमीन का अधिग्रहण हुआ है और मुआवजे की राशि कितनी थी?
डॉ. आशा लकड़ा ने साफ कहा था कि जब तक आयोग के समक्ष RIMS-2 से जुड़ी सुनवाई जारी है, तब तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि आयोग RIMS-2 के निर्माण के खिलाफ नहीं है लेकिन किसानों और जनजातीय समुदाय की उपजाऊ जमीन पर अस्पताल बनाने के बजाय किसी वैकल्पिक स्थान का चयन किया जाना चाहिए था, उनका कहना था कि गुमला, चैनपुर, डुमरी जैसे दूरस्थ इलाकों में आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, डॉक्टरों और एंबुलेंस की कमी है, इसलिए ऐसे क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार ज्यादा जरूरी है.







