रांची में दुर्गापूजा की तैयारी जोरों पर, मंदिर-महल से लेकर डिज्नीलैंड तक बन रहे पंडाल...देखिए इस बार की खास थीम
Ranchi: राजधानी रांची में इस बार दुर्गापूजा सिर्फ धार्मिक आस्था और पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहने वाली है। शहर के अलग-अलग इलाकों में तैयार हो रहे पूजा पंडाल कला, स्थापत्य, संस्कृति और आधुनिक कल्पना के अनूठे संगम के रूप में नजर आएंगे। कहीं तमिलनाडु के प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर की भव्यता देखने को मिलेगी, तो कहीं वाराणसी के स्वर्वेद महामंदिर की वास्तुकला श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी।

किसी पंडाल में इंडोनेशियन शैली के श्रीराम मंदिर की झलक मिलेगी, तो कहीं बच्चों के लिए डिज्नीलैंड की काल्पनिक दुनिया तैयार की जा रही है। वहीं हिनू में गोलगप्पे की टोकरी और चना-चूर कॉर्नर जैसी रोजमर्रा की चीजों को पंडाल की थीम बनाकर आयोजकों ने इस बार कुछ अलग प्रयोग किया है।
बकरी बाजार में दिखेगी बृहदेश्वर मंदिर की भव्यता
बकरी बाजार में भारतीय युवक संघ की ओर से इस बार तमिलनाडु के प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर की थीम पर भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक के बजट वाले इस पंडाल को राजधानी के बड़े और चर्चित पूजा पंडालों में शामिल किया जा रहा है।
पंडाल में मंदिर की ऐतिहासिक स्थापत्य शैली को उकेरने के लिए विशाल ढांचे के साथ बारीक सजावट और कारीगरी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जिला स्कूल में बनेगा स्वर्वेद महामंदिर का प्रारूप

जिला स्कूल मैदान में करीब 1.5 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के प्रसिद्ध स्वर्वेद महामंदिर की थीम पर पंडाल तैयार किया जा रहा है। बड़े आकार और भव्य वास्तुशिल्प के कारण यह पंडाल इस साल राजधानी के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो सकता है।
पंडाल के डिजाइन में स्वर्वेद महामंदिर की वास्तुकला से प्रेरित संरचनाओं को शामिल किया जा रहा है।
हरमू में 75 फीट ऊंचा काल्पनिक मंदिर
हरमू पंच मंदिर में करीब 75 फीट ऊंचा पंडाल तैयार किया जा रहा है। इसे पौराणिक राजस्थानी शैली के एक काल्पनिक मंदिर का रूप दिया जा रहा है।
शाही स्थापत्य, मंदिरनुमा संरचना और राजस्थानी कला की झलक इस पंडाल की खासियत होगी। इसकी विशाल ऊंचाई के कारण दूर से ही यह श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करेगा।

सिंहमोड़ में इंडोनेशियन शैली का श्रीराम मंदिर
हटिया के सिंहमोड़ में करीब 60 फीट ऊंचे पंडाल को इंडोनेशियन शैली में बने श्रीराम मंदिर के प्रारूप पर तैयार किया जा रहा है।
यहां धार्मिक विषय को एक अलग देश की स्थापत्य शैली के साथ जोड़ने का प्रयोग देखने को मिलेगा। पंडाल में श्रीराम मंदिर की थीम के साथ इंडोनेशियन वास्तुकला की झलक श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बन सकती है।
अरगोड़ा में बच्चों के लिए तैयार होगा डिज्नीलैंड
अरगोड़ा में इस बार पारंपरिक धार्मिक थीम से हटकर डिज्नीलैंड थीम पर पंडाल तैयार किया जा रहा है। करीब 30 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस पंडाल की ऊंचाई लगभग 50 फीट होगी।
आयोजकों की यह थीम खास तौर पर बच्चों और युवाओं को आकर्षित कर सकती है।
महावीर चौक में दिखेगी आदिवासी कला
महावीर चौक में करीब 51 फीट ऊंचा पंडाल ट्राइबल आर्ट थीम पर तैयार किया जा रहा है। पंडाल की सजावट और डिजाइन में झारखंड की आदिवासी कला एवं सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता देने की कोशिश की जा रही है।
इस थीम के जरिए पूजा पंडाल में स्थानीय संस्कृति और कला को प्रदर्शित किया जाएगा।
अल्बर्ट एक्का चौक पर बनेगी ‘द्वारका नगरी’
चंद्रशेखर आजाद पूजा समिति की ओर से अल्बर्ट एक्का चौक पर इस बार ‘द्वारका नगरी’ की थीम रखी गई है। पंडाल के जरिए धार्मिक और पौराणिक संदर्भों को स्थापत्य कला के साथ प्रस्तुत करने की तैयारी है।
हिनू में गोलगप्पे की टोकरी बनेगी आकर्षण
हिनू की शुक्ला कॉलोनी में सनातन संघ ने इस बार सबसे अलग प्रयोग किया है। यहां करीब 55 फीट ऊंचे पंडाल को गोलगप्पे की टोकरी और चना-चूर कॉर्नर की थीम पर तैयार किया जा रहा है।
पूजा पंडाल की थीम में रोजमर्रा की लोकप्रिय चीजों को शामिल करने का यह प्रयोग राजधानी की दुर्गापूजा में खास आकर्षण पैदा कर सकता है।
RR स्पोर्टिंग में ‘Temple of Together’
रातू रोड स्थित RR स्पोर्टिंग क्लब का पंडाल इस बार ‘Temple of Together’ थीम पर तैयार किया जा रहा है। पंडाल की सजावट में एकता और भाईचारे के संदेश को कलाकृतियों और विद्युत सज्जा के माध्यम से प्रस्तुत करने की तैयारी है।
रेलवे स्टेशन से कोकर तक अलग-अलग थीम
रांची रेलवे स्टेशन के पूजा पंडाल में इस बार भगवान विष्णु के वामन अवतार के प्रसंग को थीम बनाया गया है। यहां पौराणिक कथा से जुड़े दृश्यों को दृश्य रूप देने की तैयारी की जा रही है।
वहीं कोकर बाजार में कैलाश शिला अथवा राजस्थानी महल शैली से प्रेरित संरचना तैयार की जा रही है। इसमें नक्काशी और बारीक कारीगरी को प्रमुखता दी जा रही है।
बांधगाड़ी क्षेत्र में भी स्वर्वेद महामंदिर के प्रारूप पर पंडाल तैयार किया जा रहा है। यानी इस बार रांची के अलग-अलग इलाकों में श्रद्धालुओं को मंदिर, महल, पौराणिक प्रसंग, आदिवासी कला, काल्पनिक दुनिया और रोजमर्रा की चीजों से जुड़ी कई अनूठी थीम देखने को मिलेंगी।
2025 से कितनी बदली रांची की पूजा की थीम?
पिछले साल रांची के बड़े पूजा पंडालों में बकरी बाजार में अंकोरवाट मंदिर और हरमू में वृंदावन के प्रेम मंदिर जैसी ऐतिहासिक और धार्मिक स्थापत्य शैलियों का प्रभाव देखने को मिला था। इसके अलावा सामाजिक संदेश, लाइफ जर्नी और किताबों जैसी रचनात्मक थीम भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी थीं।
इस बार थीम का दायरा और व्यापक दिखाई दे रहा है। बृहदेश्वर मंदिर, स्वर्वेद महामंदिर और इंडोनेशियन शैली के श्रीराम मंदिर जैसी धार्मिक एवं स्थापत्य थीम के साथ डिज्नीलैंड, गोलगप्पे की टोकरी और ट्राइबल आर्ट जैसे अलग प्रयोग भी किए जा रहे हैं।
पंडालों में सिर्फ प्रतिमा और सजावट तक सीमित रहने के बजाय वामन अवतार जैसे पौराणिक प्रसंगों को भी दृश्य रूप देने की कोशिश की जा रही है।
सिर्फ भव्यता नहीं, संदेश और कल्पना भी
इस बार रांची की दुर्गापूजा में पंडाल सिर्फ भव्यता दिखाने का माध्यम नहीं होंगे। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक स्थापत्य, झारखंड की आदिवासी कला, पौराणिक कथाएं और आधुनिक कल्पना—इन सभी का मेल राजधानी की पूजा को एक अलग दृश्य पहचान देने की तैयारी में है।
यही वजह है कि इस बार रांची के पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ दर्शन का केंद्र नहीं, बल्कि कला और रचनात्मकता का अनुभव देने वाले आकर्षण भी बनने जा रहे हैं।







