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रांची विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण, 2 छात्रों को मिलेगा राष्ट्रपति पुरस्कार

Jharkhand Desk: रांची विश्वविद्यालय ने अपना नाम एक बार फिर से उस लिस्ट में शामिल कर लिया है जहां पहुंचना आम बात नहीं है. जी हां, राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर रांची विश्वविद्यालय का नाम रोशन हुआ है. रांची विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई के दो जुझारू स्वयंसेवकों डोरंडा कॉलेज के दिवाकर आनंद और रांची वीमेंस कॉलेज की दीक्षा कुमारी का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ है.
 
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रांची विश्वविद्यालय ने अपना नाम एक बार फिर से उस लिस्ट में शामिल कर लिया है जहां पहुंचना आम बात नहीं है. जी हां, राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर रांची विश्वविद्यालय का नाम रोशन हुआ है. रांची विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई के दो जुझारू स्वयंसेवकों डोरंडा कॉलेज के दिवाकर आनंद और रांची वीमेंस कॉलेज की दीक्षा कुमारी का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ है.

Jharkhand Desk: रांची विश्वविद्यालय ने अपना नाम एक बार फिर से उस लिस्ट में शामिल कर लिया है जहां पहुंचना आम बात नहीं है. जी हां, राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर रांची विश्वविद्यालय का नाम रोशन हुआ है. रांची विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई के दो जुझारू स्वयंसेवकों डोरंडा कॉलेज के दिवाकर आनंद और रांची वीमेंस कॉलेज की दीक्षा कुमारी का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ है. यह सम्मान उन्हें समाजसेवा, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय स्तर पर योगदान के लिए दिया जाएगा. पहली बार रांची विश्वविद्यालय के दो स्वयंसेवकों को एक साथ यह गौरव प्राप्त हो रहा है.

Presidents Award

दिवाकर आनंद बताते हैं, बचपन से ही अपने माता-पिता को समाज का निस्वार्थ भाव से सेवा करते हुए देखा है और वहीं से मुझे हमेशा से प्रेरणा मिली की सेवा ही धर्म है, सेवा ही कर्तव्य है, सेवा ही सब कुछ है. भगवान ने तो हमें लकीरें दी है. लेकिन, रंग हम अपने सेवा भाव से ही भर सकते हैं. बचपन से मैंने जो अपने दादा, माता-पिता इन सबको देखा है कि खुद की रोटी को छोड़कर किसी भूखे को खिलाना यह सारी चीज मेरे मन में गहरी छाप छोड़ी है. 

यही कारण है कि मैं बचपन से यह चीज ऑब्जर्व करता था और पूछता भी था कि आप ऐसा क्यों करती है तब मां कहती थी सबसे बड़ा सुख तब मिलता है. जब आप अपने हिस्से का भी त्याग करके दूसरे को देते हैं. मुझे पहले समझ में नहीं आता था. लेकिन, जब मैंने करना शुरू किया तब एक अलग ही आत्म संतुष्टि मिली.

ऐसे में मैंने कॉलेज में आते ही NSS ज्वाइन कर लिया और इसके जरिए हम गांव गांव जाते थे, कॉलेज जाते थे और वहां पर व्यक्तिगत विकास, नॉलेज, क्विज कंपटीशन व ब्लड डोनेशन कैंप यह सारी चीज किया करते थे. मैंने खुद कई बार ब्लड डोनेट किया है. मैं कोई भी सेवा तब करता हूं. जब मैं उसमें निपुण हो जाता हूं अगर मैं किसी को ब्लड डोनेट के लिए कहता हूं तो उससे पहले मैं वह चीज किया रहता हूं. अगर मैं किसी को कंबल बांटने के लिए कहता हूं तो वह चीज में पहले कई बार कर चुका रहता हूं. मेरा मानना है आपको बोलने के पहले उस चीज को खुद पर लागू करना होगा.

Presidents Award

वहीं, दीक्षा कुमारी ने महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य अभियान में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छता और शिक्षा के महत्व पर जागरूक किया. एनएसएस के कई राष्ट्रीय शिविरों में उन्होंने नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया. बातचीत में उन्होंने कहा, "यह सम्मान मुझे और मेरे साथ काम करने वाले सभी स्वयंसेवकों को समर्पित है. समाज की बेहतरी के लिए हम युवाओं को हमेशा आगे रहना चाहिए."

वहीं, राष्ट्रपति द्वारा जो सम्मान मिल रहा है. यह हमारे लिए गर्व की बात है. सेवा में इतने समा गए कि किसी चीज की सुध नहीं रही. अचानक से पता चला की सम्मानित किया जाएगा. उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी. लेकिन, यह हमारे लिए गौरव का क्षण है और पूरा परिवार काफी खुश है. बता दे, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) भारत सरकार की एक केंद्रीय योजना है. जिसका उद्देश्य छात्रों में सामुदायिक सेवा और स्वयंसेवा के माध्यम से उनके व्यक्तित्व और चरित्र का विकास करना है. यह महात्मा गांधी के आदर्शों से प्रेरित है, जिसमें 'सेवा के माध्यम से शिक्षा' पर बल दिया जाता है.