JSSC CGL पर फिर उठे सवाल, पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने CBI जांच की मांग का किया समर्थन
Jharkhand News: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी की जांच सीबीआई से कराने की छात्रों की मांग को झारखंड के पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि मामले की केस डायरी में जांच से जुड़े कई गंभीर तथ्य दर्ज होने के बावजूद सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाना उचित नहीं है।
अजीत कुमार ने कहा कि परीक्षा में पेपर लीक से जुड़े आरोप सामने आने के बाद मामले की जांच हुई और कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न्यायालय के आदेश का हवाला देकर परीक्षा रद्द करने से बच रही है।
छह महीने में जांच पूरी करने का था निर्देश
पूर्व महाधिवक्ता के मुताबिक, झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की जांच छह महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया था। उनका दावा है कि इस जांच की निर्धारित अवधि जून में ही समाप्त हो चुकी है, लेकिन अवधि बढ़ाने के लिए अब तक न्यायालय के समक्ष कोई शपथपत्र दाखिल नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि छात्र इस मामले में अवमानना की कार्रवाई के लिए तैयार हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें ऐसा करने से रोका गया है।
135 में से 120 सवालों के जवाब मिलने का दावा
अजीत कुमार ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा से पहले नेपाल में छात्रों को कथित तौर पर प्रश्नों के उत्तर याद कराने का मामला सामने आया था। बाद में बंगाल के नयामतपुर में भी इसी तरह छात्रों को उत्तर याद कराने के आरोप लगे।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान एक छात्र ने कथित तौर पर बताया कि उसे 120 उत्तर याद कराए गए थे, और परीक्षा में 135 में से 120 प्रश्नों के उत्तर कथित तौर पर मैच कर गए। उनके अनुसार, इस संबंध में छात्रों ने CID को कई साक्ष्य भी उपलब्ध कराए थे।
केस डायरी का हवाला देकर सरकार पर सवाल
पूर्व महाधिवक्ता ने दावा किया कि JSSC CGL मामले की केस डायरी में जांच अधिकारी की ओर से कई महत्वपूर्ण बातें दर्ज की गई हैं। उनके मुताबिक, एक व्यक्ति द्वारा 28 अभ्यर्थियों को पटना के रास्ते नेपाल ले जाने और इसके एवज में करीब 8 लाख रुपये के लेन-देन का भी उल्लेख केस डायरी में है। उन्होंने यह भी दावा किया कि औरंगाबाद के एक बैंक खाते में राशि भेजे जाने की बात जांच में सामने आई।
अजीत कुमार ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद अदालत में सरकार और CID की ओर से बरामद दस्तावेजों को कथित तौर पर ‘गेस पेपर’ बताया गया और पेपर लीक बड़े पैमाने पर नहीं होने की दलील दी गई। इसी आधार पर रिजल्ट पर लगी रोक हटाए जाने की बात भी उन्होंने कही।
‘पेपर लीक साबित हुआ तो परीक्षा रद्द हो सकती है’
अजीत कुमार के मुताबिक, हाईकोर्ट के निर्देश में यह स्पष्ट था कि जांच पूरी होने के बाद यदि पेपर लीक या गंभीर अनियमितता के तथ्य सामने आते हैं तो परीक्षा रद्द करने पर विचार किया जा सकता है। उनका आरोप है कि जांच पूरी होने के बावजूद सरकार इस दिशा में निर्णय लेने से बच रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच में गंभीर अनियमितताओं के तथ्य मौजूद हैं तो JSSC CGL परीक्षा के भविष्य पर सरकार स्पष्ट फैसला क्यों नहीं ले रही है।
JSSC-JPSC की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
पूर्व महाधिवक्ता ने JSSC और JPSC की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने सहायक आचार्य परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में B.Ed की अवधि को लेकर ऐसी शर्तें रखी गईं, जिस पर न्यायालय में मामला चल रहा है।
उन्होंने कहा कि देश में B.Ed की दो वर्षीय डिग्री को लेकर व्यवस्था लागू है, लेकिन झारखंड में शिक्षक नियुक्ति के विज्ञापन में कथित तौर पर एक वर्षीय B.Ed को ही मान्य किए जाने की बात सामने आई। उनके मुताबिक, ऐसी विसंगतियों से नियुक्ति प्रक्रिया अनावश्यक रूप से विवादों में फंसती है और अभ्यर्थियों को परेशानी होती है।
पूर्व महाधिवक्ता ने कहा कि JSSC CGL मामले में छात्रों की मांग और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है, ताकि परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के बीच बने असमंजस को दूर किया जा सके।







