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Ranchi Girl Trapped in Dubai: नौकरी का झांसा या ठगी? 12,600 दिरहम के Fake Loan का आरोप

Ranchi:  विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है. आरोप है कि रांची की एक युवती को नौकरी का भरोसा देकर दुबई भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद वह कथित तौर पर मुश्किल में फंस गई. एजेंसी पर 12,600 दिरहम के फर्जी लोन से जुड़े दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाया गया है. मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने मदद और कार्रवाई की गुहार लगाई है.
 
JHARKHAND

Ranchi:   विदेश में बेहतर नौकरी, भोजन और आवास का सपना लेकर दुबई गई रांची की एक युवती के कथित तौर पर फंसने का मामला सामने आया है। एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के छोटा घाघरा निवासी मोनिका कच्छप के परिवार ने आरोप लगाया है कि उसे विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर एजेंसी के माध्यम से दुबई भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसके साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी और प्रताड़ना की गई।

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पीड़ित परिवार ने इस मामले में एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। परिवार ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने और मोनिका को सकुशल भारत वापस लाने की गुहार लगाई है।

ऑनलाइन संपर्क के बाद 15 हजार रुपये ट्रांसफर

मोनिका की मां रतना कच्छप के अनुसार, उनकी बेटी का संपर्क ऑनलाइन माध्यम से यूएई के अजमान स्थित एएमडी ट्रेंड सॉल्यूशन एलएलसी की एजेंट प्रियंका से हुआ था।

परिवार का आरोप है कि प्रियंका ने मोनिका को विदेश में बेहतर नौकरी के साथ भोजन और रहने की सुविधा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। इसके बाद एजेंट के कहने पर अलग-अलग माध्यमों से कुल 15,000 रुपये ट्रांसफर किए गए।

परिवार के मुताबिक, नौकरी की उम्मीद में मोनिका 6 मई को शारजाह पहुंची थी।

शारजाह एयरपोर्ट पर पासपोर्ट लेने का आरोप

परिवार का आरोप है कि शारजाह एयरपोर्ट पहुंचते ही एजेंसी के ड्राइवर ने मोनिका का पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उसे अजमान स्थित कार्यालय ले जाया गया।

परिवार के अनुसार, वहां रितेश और मोहम्मद मेराज अंसारी नाम के व्यक्तियों ने कथित तौर पर मोनिका से अरबी भाषा में लिखे कुछ कागजात पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान करवाए।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मोबाइल छीनकर WhatsApp चैट डिलीट करने का दावा

परिवार ने आरोप लगाया है कि मोनिका का मोबाइल फोन भी ले लिया गया और उसकी WhatsApp चैट डिलीट कर दी गई। इसके बाद उस पर कथित तौर पर 12,600 दिरहम के लोन का बोझ होने की बात कही गई।

परिवार का दावा है कि मोनिका को इस कथित लोन के नाम पर डराया-धमकाया गया और भारत लौटने की इच्छा जताने पर उससे मोटी रकम की मांग की गई।

एक महीने तक घरों में काम कराने का आरोप

परिवार के मुताबिक, मोनिका को करीब एक महीने तक अलग-अलग घरों में काम करने के लिए मजबूर किया गया। आरोप है कि उससे झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ कराने जैसे घरेलू काम कराए गए।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि मोनिका को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और वह लगातार डरी हुई थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

भारत लौटने के लिए मांगी गई रकम

परिवार का कहना है कि जब मोनिका ने वापस भारत आने की इच्छा जताई, तो कथित तौर पर उससे बड़ी रकम की मांग की गई। इसके बाद उसने अपने परिवार को पूरी स्थिति की जानकारी दी।

मोनिका की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया और एयरपोर्ट थाना में शिकायत दर्ज कराई।

परिवार ने पुलिस से लगाई मदद की गुहार

मोनिका के परिवार ने प्राथमिकी में प्रियंका, रितेश, मोहम्मद मेराज अंसारी समेत संबंधित कंपनी के प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

परिवार की सबसे बड़ी चिंता फिलहाल मोनिका की सुरक्षा को लेकर है। परिजनों ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों से मोनिका को सुरक्षित भारत वापस लाने और मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।

मामला जांच के दायरे में

विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से ठगी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में नौकरी, वीजा, पासपोर्ट और विदेश भेजने से जुड़े दस्तावेजों की जांच अहम होती है। मोनिका के मामले में भी पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विदेश भेजने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे और कथित 12,600 दिरहम के लोन से जुड़े दस्तावेजों की वास्तविकता क्या है।

फिलहाल परिवार अपनी बेटी की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहा है।