एडमिशन में देरी से परेशान छात्र, रांची विश्वविद्यालय की 45 हजार सीटों पर लाखों छात्रों की नजर, अटका दाखिला
Ranchi: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा मैट्रिक और इंटरमीडिएट एवं ICSE और CBSE बोर्ड के रिजल्ट आने के बाद अब लाखों विद्यार्थियों की नजर उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन प्रक्रिया पर टिकी है. रांची विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र के लिए नामांकन प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं होने से लाखों छात्र असमंजस की स्थिति में हैं. विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेजों में लगभग 45 हजार सीटों पर दाखिले होने हैं, लेकिन प्रक्रिया में हो रही देरी से छात्रों और अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
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इंटरमीडिएट और अन्य बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम आने के बाद छात्र लंबे समय से एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन अब तक विश्वविद्यालय की ओर से स्पष्ट शेड्यूल जारी नहीं होने से स्थिति अधर में बनी हुई है.
छात्रों की बढ़ी परेशानी
दाखिले में देरी का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों से आने वाले छात्रों पर पड़ रहा है. कई छात्र समय पर नामांकन नहीं होने के कारण दूसरे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के विकल्प तलाशने लगे हैं. छात्रों का कहना है कि अगर जल्द प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो उनका पूरा शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित हो सकता है. वहीं अभिभावकों को भी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है.
अब नामांकन की तैयारी में हैं विद्यार्थी
रांची विश्वविद्यालय राज्य का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय माना जाता है, जहां संबद्ध कॉलेजों को मिलाकर स्नातक स्तर पर लगभग 45 हजार सीटें उपलब्ध हैं. हर वर्ष झारखंड के विभिन्न जिलों से हजारों विद्यार्थी यहां दाखिला लेते हैं. इस बार स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि JAC के आंकड़ों के अनुसार मैट्रिक परीक्षा में 4,02,178 विद्यार्थी सफल घोषित किए गए हैं, जबकि इंटरमीडिएट के Arts, Science और Commerce तीनों संकायों को मिलाकर कुल 2,97,414 परीक्षार्थी सफल हुए हैं. ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अब इंटर और ग्रेजुएशन में नामांकन की तैयारी में हैं.
नामांकन की तारीख को लेकर अभी तक घोषणा नहीं
हालांकि विश्वविद्यालय स्तर पर अब तक नामांकन की तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नई शिक्षा नीति और क्लस्टर सिस्टम को लेकर राज्य सरकार एवं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से अंतिम दिशा-निर्देश का इंतजार किया जा रहा है. यही वजह है कि चांसलर पोर्टल को अभी तक एक्टिव नहीं किया जा सका है.
क्लस्टर सिस्टम और नई शिक्षा नीति को लेकर फंसा है पेंच
दरअसल, नई शिक्षा नीति बहुविषयक शिक्षा और लचीले पाठ्यक्रम व्यवस्था को बढ़ावा देती है, जबकि क्लस्टर सिस्टम के तहत कॉलेजों को एकल या सीमित विषय आधारित ढांचे में व्यवस्थित करने की तैयारी चल रही है. इन दोनों व्यवस्थाओं के बीच तालमेल बैठाना विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
नामांकन में देरी से विद्यार्थी परेशान
इधर, परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद विद्यार्थी लगातार विश्वविद्यालय और कॉलेजों का चक्कर लगा रहे हैं. कई छात्रों का कहना है कि नामांकन में देरी से आगे की पढ़ाई की योजना प्रभावित हो रही है. खासकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को आवास, दस्तावेज सत्यापन और कोर्स चयन को लेकर परेशानी हो रही है. छात्रों और अभिभावकों के बीच यह आशंका भी बढ़ रही है कि यदि एडमिशन प्रक्रिया में और देरी हुई तो शैक्षणिक सत्र और पीछे खिसक सकता है.
पहले से ही सेशन चल रहा है लेट
शिक्षाविदों का मानना है कि पहले से ही विश्वविद्यालय का सत्र नियमित नहीं चल रहा है. ऐसे में नामांकन प्रक्रिया में देरी छात्रों के करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भी असर डाल सकती है. उनका कहना है कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को जल्द स्पष्ट नीति घोषित करनी चाहिए ताकि विद्यार्थियों में भ्रम की स्थिति खत्म हो सके.
विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा. संभावना है कि इस वर्ष भी चांसलर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे. लेकिन इसके लिए राज्य सरकार और लोकभवन से औपचारिक मंजूरी मिलना जरूरी है.
फिलहाल लाखों विद्यार्थियों की निगाहें विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा विभाग के अगले फैसले पर टिकी हैं. अब देखना होगा कि रांची विश्वविद्यालय नामांकन प्रक्रिया कब शुरू करता है और सेशन लेट की समस्या से छात्रों को कितनी राहत मिल पाती है.







