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रांची यूनिवर्सिटी का NSS विंग बना युवाओं की सामाजिक जागरूकता का मजबूत मंच, प्रतिष्ठा में हुआ इजाफा

Ranchi: इस सत्र में विश्वविद्यालय के एनएसएस विंग की रैंकिंग और प्रतिष्ठा में सुधार दर्ज किया गया है, जिसके पीछे स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी, समाजहित से जुड़े अभियानों में लगातार योगदान और विश्वविद्यालय की विभिन्न पहलें प्रमुख कारण मानी जा रही हैं. 10,200 से अधिक स्वयंसेवकों के साथ रांची विश्वविद्यालय का एनएसएस विंग झारखंड के सबसे सक्रिय छात्र संगठनों में शामिल है.
 
JHARKHAND

Ranchi: रांची विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) विंग ने हाल के वर्षों में अपनी गतिविधियों, सामाजिक योगदान और छात्र सहभागिता के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान बनाई है. विश्वविद्यालय के NSS स्वयंसेवकों द्वारा शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सेवा से जुड़े अभियानों में सक्रिय भागीदारी ने संगठन की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी है.

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, NSS इकाइयों ने विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है. इसके परिणामस्वरूप रांची विश्वविद्यालय की रैंकिंग, साख और पहचान में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिला है. 

इस सत्र में विश्वविद्यालय के एनएसएस विंग की रैंकिंग और प्रतिष्ठा में सुधार दर्ज किया गया है, जिसके पीछे स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी, समाजहित से जुड़े अभियानों में लगातार योगदान और विश्वविद्यालय की विभिन्न पहलें प्रमुख कारण मानी जा रही हैं. 10,200 से अधिक स्वयंसेवकों के साथ रांची विश्वविद्यालय का एनएसएस विंग झारखंड के सबसे सक्रिय छात्र संगठनों में शामिल है.

स्वयं से पहले आप

एनएसएस का मूल मंत्र 'नॉट मी बट यू' (स्वयं से पहले आप) है और इसी भावना के साथ विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं. विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न कॉलेजों के छात्र नियमित रूप से वृक्षारोपण, रक्तदान शिविर, सड़क सुरक्षा जागरूकता, स्वच्छता अभियान, डिजिटल साक्षरता, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, एड्स जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यक्रमों का संचालन करते रहे हैं.

राष्ट्रीय स्तर पर रांची विश्वविद्यालय के एनएसएस विंग की पहचान का सबसे बड़ा आधार उसके स्वयंसेवकों की उपलब्धियां हैं. हाल के सालों में विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों ने भारत सरकार के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एनएसएस पुरस्कार (राष्ट्रपति पुरस्कार) हासिल करके राज्य का गौरव बढ़ाया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा रांची विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों को सम्मानित किया जाना विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है. इसके अलावा विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों का चयन लगातार गणतंत्र दिवस परेड, राष्ट्रीय एकता शिविर, राष्ट्रीय युवा महोत्सव, राष्ट्रीय युवा संसद और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए होता रहा है.

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि एनएसएस गतिविधियों में विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी ने न केवल उनकी नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत किया है बल्कि विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है. ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम और सामुदायिक सेवा की गतिविधियों ने एनएसएस की पहुंच को व्यापक बनाया है.

एनएसएस पदाधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ाने, अधिक से अधिक छात्रों को राष्ट्रीय शिविरों में भेजने और समाज से जुड़े नवाचार आधारित कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की योजना है. साथ ही डिजिटल जागरूकता, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विशेष अभियान चलाए जाएंगे ताकि छात्रों की भागीदारी और प्रभाव दोनों बढ़ सकें.

भविष्य में नई ऊंचाइयों को छूने की क्षमता

रांची विश्वविद्यालय का एनएसएस विंग केवल सामाजिक सेवा तक सीमित नहीं है बल्कि यह विद्यार्थियों में नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम बन चुका है. राष्ट्रीय स्तर पर लगातार मिल रही उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि विश्वविद्यालय का एनएसएस विंग भविष्य में भी नई ऊंचाइयों को छूने की क्षमता रखता है.