री-एडमिशन फीस और महंगी किताबें: गढ़वा प्रशासन ने निजी स्कूलों को दी चेतावनी...
Garhwa: गढ़वा में निजी स्कूलों द्वारा री-एडमिशन फीस, नई किताबें और अन्य शुल्कों के नाम पर की जा रही मनमानी वसूली को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. लगातार मिल रही अभिभावकों की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं और नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
क्या है पूरा मामला
अभिभावकों का आरोप है कि कई निजी स्कूल हर सत्र की शुरुआत में बच्चों से अनिवार्य री-एडमिशन फीस ली जा रही है. इसके अलावा पुराने पाठ्यक्रम के बावजूद नई किताबें और कॉपी-किट खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे मध्यम और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
प्रशासन की सख्ती
मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि
- किसी भी स्कूल को मनमाने ढंग से री-एडमिशन फीस लेने की अनुमति नहीं है
- अभिभावकों को विशेष दुकान से किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता
- नियमों के उल्लंघन पर स्कूलों की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है
प्रशासन ने सभी निजी स्कूलों से फीस संरचना और किताबों की सूची की जानकारी मांगी है.
प्रशासन का बयान
एक अधिकारी ने कहा,
“निजी स्कूल यदि तय नियमों का उल्लंघन करेंगे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों से किसी भी तरह की अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
अभिभावकों की प्रतिक्रिया
कार्रवाई की खबर के बाद अभिभावकों में राहत की भावना है.
एक अभिभावक ने बताया,
“हर साल नई किताबों और री-एडमिशन के नाम पर हजारों रुपये लिए जाते हैं। प्रशासन की सख्ती से उम्मीद है कि अब मनमानी बंद होगी।”
स्कूल प्रबंधन पर नजर
प्रशासन ने साफ किया है कि आने वाले दिनों में स्कूलों की जांच अभियान चलाया जाएगा और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी. साथ ही अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अवैध वसूली की सूचना सीधे प्रशासन को दें.
संक्षेप में
- गढ़वा में निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन सख्त
- री-एडमिशन और नई किताबों के नाम पर वसूली का आरोप
- नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की चेतावनी
- अभिभावकों को मिली राहत







