नियुक्ति से पहले रिटायरमेंट! सरकारी सिस्टम की चौंकाने वाली कहानी
Ranchi: एक अनोखे प्रशासनिक मामले में एक कर्मचारी को सेवानिवृत्ति से महज एक दिन पहले नियुक्ति पत्र मिला, जबकि दूसरे कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद जॉइनिंग लेटर जारी कर दिया गया. इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली और नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जानकारी के मुताबिक, पहले कर्मचारी को 29 जून को नियुक्ति पत्र सौंपा गया और 30 जून को वह सेवानिवृत्त हो गए. वहीं दूसरे कर्मचारी के मामले में नियुक्ति पत्र उनके रिटायरमेंट के बाद जारी हुआ, जिससे मामला चर्चा का विषय बन गया. अब तक करीब 12 हजार 500 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे जा चुके हैं, जबकि कुल 26 हजार पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के बीच कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिन्होंने नियुक्ति की खुशी के साथ व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. कई अभ्यर्थियों को वर्षों के इंतजार के बाद नियुक्ति पत्र तो मिला, लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति की उम्र भी पूरी हो चुकी थी या अगले ही दिन पूरी हो गई.

जानकारी के अनुसार, सहायक आचार्य नियुक्ति में पारा शिक्षकों के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित हैं. उनके लिए अधिकतम आयु सीमा 58 वर्ष निर्धारित की गई थी. वर्ष 2023 में जब नियुक्ति के लिए आवेदन लिए गए, तब कई पारा शिक्षकों की उम्र 57 से 58 वर्ष के बीच थी. लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने में करीब तीन साल लग गए. इस दौरान कई अभ्यर्थी 60 वर्ष की आयु तक पहुंच गए, जो सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति की निर्धारित उम्र है.
29 को नियुक्ति 30 को सेवानिवृत्त
ऐसा ही एक मामला जामताड़ा जिले के नंदलाल रवानी का है. उन्हें 29 जून को नियुक्ति पत्र मिला, जबकि 30 जून को उनकी उम्र 60 वर्ष पूरी हो गई. यानी नियुक्ति मिलने के अगले ही दिन वे सेवानिवृत्त हो गए. नंदलाल रवानी वर्ष 2006 से पारा शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने वर्ष 2016 में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) उत्तीर्ण की थी. इसके बाद वर्ष 2023 में सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन नियुक्ति पत्र मिलने तक उनकी सेवानिवृत्ति की उम्र आ गई.
नंदलाल रवानी ने कहा, मैं वर्ष 2006 से पारा शिक्षक के रूप में काम कर रहा हूं. 2016 में शिक्षक पात्रता परीक्षा पास की थी. वर्षों से नियमित नियुक्ति का इंतजार था. मुझे सोमवार को नियुक्ति पत्र मिला है, लेकिन आज मैं सेवानिवृत्त भी हो जाऊंगा.

इसी तरह पलामू निवासी नियुम अंसारी का मामला भी चर्चा में है. वे 31 मई को ही 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके थे. नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब नियुम अंसारी को नियुक्ति पत्र लेने के लिए बुलाया गया, तब वे पहले ही सेवानिवृत्ति की आयु पार कर चुके थे. नियुम अंसारी ने कहा, नियुक्ति पत्र मिलने की खुशी जरूर है, लेकिन सेवा करने का अवसर नहीं मिल सका. इस नियुक्ति पत्र को मैं अपने जीवन की यादगार उपलब्धि के रूप में अपने पास संभालकर रखूंगा.
दरअसल, नियुक्ति प्रक्रिया में हुई देरी का असर ऐसे कई अभ्यर्थियों पर पड़ा है. वर्षों तक नियमित नियुक्ति की प्रतीक्षा करने वाले पारा शिक्षक आखिरकार चयनित तो हुए, लेकिन सरकारी सेवा का लाभ लेने से पहले ही सेवानिवृत्ति की आयु पूरी हो गई. इससे कई शिक्षकों के बीच निराशा भी है. झारखंड में सहायक आचार्य नियुक्ति को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थी इंतजार कर रहे थे.

नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों को राहत मिली है, लेकिन कुछ मामलों में समय पर नियुक्ति नहीं मिलने के कारण स्थिति ऐसी बन गई कि नियुक्ति और सेवानिवृत्ति लगभग एक साथ हो गई. यह स्थिति नियुक्ति प्रक्रिया में देरी के मानवीय पहलू को भी सामने लाती है, जहां वर्षों की मेहनत और इंतजार के बाद सरकारी नियुक्ति का सपना पूरा तो हुआ, लेकिन उसका लाभ उठाने का अवसर नहीं मिल पाया.







