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तीन महीने से नहीं मिला वेतन, रिम्स कर्मियों का धरना, प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

Ranchi: धरने पर बैठे कर्मियों ने आरोप लगाया कि वे अस्पताल की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. कर्मचारियों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया, बैंक की किस्तें और दैनिक खर्च चलाना मुश्किल हो गया है.
 
JHARKHAND

Ranchi: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में कार्यरत कर्मियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है. पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिलने से नाराज कर्मचारियों ने संस्थान परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है. कर्मचारियों का कहना है कि लगातार आर्थिक संकट झेलने के बावजूद उनकी समस्याओं पर न तो संस्थान प्रशासन और न ही संबंधित विभाग गंभीरता दिखा रहा है.

रिम्स कर्मियों का फूटा गुस्सा, तीन महीने से वेतन नहीं मिलने पर धरना

धरने पर बैठे कर्मियों ने आरोप लगाया कि वे अस्पताल की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. कर्मचारियों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया, बैंक की किस्तें और दैनिक खर्च चलाना मुश्किल हो गया है.

"काम पूरा, लेकिन वेतन नहीं"

प्रदर्शनकारी कर्मियों ने कहा कि वे अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा. कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन देने और समस्या से अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला.

प्रदर्शन कर रहे कर्मियों कहा

प्रदर्शन कर रहे कर्मियों ने स्पष्ट किया कि वे कार्य बहिष्कार नहीं कर रहे हैं. मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वार्ड और अपने कार्यस्थलों पर जूनियर कर्मचारियों को तैनात कर प्रदर्शन में शामिल हुए हैं. 

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर

रिम्स झारखंड का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में कर्मचारियों का आंदोलन लंबा खिंचने पर अस्पताल की सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है. हालांकि प्रदर्शन कर रहे कर्मियों ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई वेतन भुगतान को लेकर है और वे मरीजों की परेशानी नहीं चाहते. इसके बावजूद यदि समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है.