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'माँ' को विदा करना जैसे उस भक्ति और समर्पण के अंत का अनुभव करना, महादशमी पर माँ दुर्गा को दी भावभीनी विदाई...

जमशेदपुर में शारदीय नवरात्रि की महादशमी पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला. नौ दिनों तक मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद दशमी तिथि पर महिलाओं ने परंपरागत सिंदूर खेला कर देवी को भावभीनी विदाई दी. किसी भी भक्त के लिए ये समय जितना उत्साह भरा होता है उतना ही माँ को विदा करने का दुःख भी होता है.
 
MAA DURGA
Jharkhand Desk: जमशेदपुर में शारदीय नवरात्रि की महादशमी पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला. नौ दिनों तक मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद दशमी तिथि पर महिलाओं ने परंपरागत सिंदूर खेला कर देवी को भावभीनी विदाई दी. किसी भी भक्त के लिए ये समय जितना उत्साह भरा होता है उतना ही माँ को विदा करने का दुःख भी होता है.

Jharkhand Desk: जमशेदपुर में शारदीय नवरात्रि की महादशमी पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला. नौ दिनों तक मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद दशमी तिथि पर महिलाओं ने परंपरागत सिंदूर खेला कर देवी को भावभीनी विदाई दी. किसी भी भक्त के लिए ये समय जितना उत्साह भरा होता है उतना ही माँ को विदा करने का दुःख भी होता है. हम नौ दिनों तक माँ के शरण में रहते है उनकी भक्ति उनकी पूजा उनका विश्वास सब कुछ होता है पर ये समय भक्तों के लिए बहुत भारी समय होता है. ऐसा लगता है माँ को विदा करना जैसे उस भक्ति और समर्पण के अंत का अनुभव करना.

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परंपरा के अनुसार, जिस प्रकार बेटी को विदा करने से पहले उसका श्रृंगार किया जाता है, उसी तरह मां दुर्गा की प्रतिमा पर सिंदूर अर्पित कर भक्त अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं. सुहागिन महिलाओं ने मां को सिंदूर चढ़ाकर अखंड सौभाग्य, परिवार की समृद्धि और जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना की.

जमशेदपुर में महादशमी पर सिंदूर खेला, भक्तों ने मां दुर्गा को दी भावभीनी  विदाई... | Johar LIVE

शहर के विभिन्न पंडालों और मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए. महिलाओं ने प्रतिमा पर सिंदूर चढ़ाने के बाद एक-दूसरे को भी सिंदूर लगाकर उत्सव का आनंद लिया. इस दौरान वातावरण पूरी तरह आस्था, उल्लास और भक्ति से सराबोर रहा.

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महादशमी का यह उत्सव केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. यह महिलाओं के बीच आपसी स्नेह, सौहार्द और एकता को मजबूत करता है. सिंदूर खेला में शामिल होकर महिलाएं न केवल अपने सौभाग्य और पति के दीर्घायु की कामना करती हैं, बल्कि समाज की खुशहाली और कल्याण की भी प्रार्थना करती हैं.

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पूजा और सिंदूर खेला के उपरांत भक्तों ने भावुक होकर मां को विदा किया और अगले वर्ष फिर उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ देवी के आगमन की प्रतीक्षा करने का संकल्प लिया. इस प्रकार महादशमी का यह पर्व आस्था, परंपरा और आनंद का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है.