स्वरोजगार से बदलेगी तस्वीर! झारखंड के सफल मॉडल को अपनाने की तैयारी में अरुणाचल प्रदेश, टीम कर रही मैदानी अध्ययन
Palamu: अरुणाचल प्रदेश स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की 18 सदस्यीय टीम झारखंड के पलामू और सिंहभूम जिलों का दौरा कर रही है. यह टीम झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के माध्यम से अल्ट्रा पुअर परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने की सफल योजनाओं का जायजा ले रही है. टीम दो भागों में बंटकर अलग-अलग इलाकों में काम कर रही है. पलामू के बिश्रामपुर और नौडीहा बाजार क्षेत्रों में उन्होंने रोजगार से जुड़ी योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया.
दौरे का उद्देश्य
टीम झारखंड में लागू उन योजनाओं और मॉडलों का अध्ययन कर रही है, जिनसे:
- स्वयं सहायता समूह (SHG) को मजबूत किया गया
- ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका मिली
- कौशल प्रशिक्षण के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा हुआ
किन बिंदुओं पर फोकस
- महिलाओं और युवाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण
- लघु उद्योग, कृषि-आधारित गतिविधियां और हस्तशिल्प
- बैंक लिंकेज, मार्केटिंग सपोर्ट और आर्थिक आत्मनिर्भरता
- पंचायत व ब्लॉक स्तर पर इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म
झारखंड की योजनाएं बन रही हैं देश के लिए उदाहरण
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) बेहद गरीब परिवारों के लिए बकरी पालन, मुर्गी पालन, दीदी बाड़ी (दिदी का बगीचा) और अन्य स्वरोजगार योजनाएं चला रही है. इन योजनाओं के तहत गरीब परिवारों को प्रशिक्षण, संसाधन और बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है. पलामू जिले में अकेले 2.63 लाख महिलाएं JSLPS से जुड़ी हुई हैं, जिनमें 100 से अधिक लखपति दीदी बन चुकी हैं. शुरुआती दौर में यहां करीब 400 अल्ट्रा पुअर परिवारों को इन योजनाओं से जोड़ा गया था. पिछले तीन वर्षों में पलामू और सिंहभूम में ये कार्यक्रम बेहद सफल रहे हैं.
"अरुणाचल प्रदेश के टीम इलाके का दौरा कर रही है. अल्ट्रा पुअर परिवारों के बीच पिछले तीन वर्ष से जो कार्य हुए है उनका जायजा ले रही है, टीम देख रही है कि अल्ट्रा पुअर परिवारों को लाइवलीहुड से जोड़ते हुए कैसे मुख्य धारा से जोड़ा गया है. झारखंड एवं पलामू की इलाके में बेहद ही सफलतापूर्वक लाइवलीहुड के कार्यक्रम हुए है. अरुणाचल प्रदेश में भी लाइवलीहुड को लेकर कार्यक्रम शुरू होना है, ग्रासरूट लेवल पर कैसे इसे इंप्लीमेंट किया जाना है इसे टीम देख रही है."- अनिता केरकेट्टा, डीपीएम, जेएसएलपीएस, पलामू
अरुणाचल प्रदेश में शुरू होने वाला है नया कार्यक्रम
अरुणाचल प्रदेश की टीम ग्रासरूट लेवल पर योजनाओं के क्रियान्वयन का अध्ययन कर रही है, ताकि अपने राज्य में भी इसी तरह का समावेशी लाइवलीहुड कार्यक्रम शुरू किया जा सके. टीम में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी शामिल हैं.
18 लोगों की टीम है इसमें स्टेट डिस्ट्रिक्ट और विभिन्न ब्लॉक के लोग शामिल हैं. झारखंड में क्या काम हो रहा है इसे वह देख रहे है. 2017 से झारखंड में लाइवली हुड को लेकर कई कार्यक्रम चलाए गए हैं. इस वर्ष से अरुणाचल प्रदेश में भी समावेशी योजना को लागू किया जाना है, अल्ट्रा पुअर परिवारों के बीच किस तरह काम करना है इसे समझने की कोशिश की जा रही है. - सोमी पैती, टीम लीडर, अरुणाचल प्रदेश
टीम ने उन सफल परिवारों से भी मुलाकात की जिन्होंने स्वरोजगार में अच्छा प्रदर्शन किया है. एक उदाहरण नौडीहा बाजार का है, जहां एक युवक ने खुद का म्यूजिक बैंड तैयार किया, जबकि उनकी मां बकरी पालन और दीदी बाड़ी योजना से जुड़कर स्वरोजगार शुरू कर चुकी हैं.
“झारखंड में पिछले तीन वर्षों में अल्ट्रापुअर परिवारों के बीच जो कार्य हुए वह उदाहरण बन गए हैं. अरुणाचल प्रदेश में इसी तरह लागू करने के लिए योजना तैयार की गई है. झारखंड में जिस तरह से योजनाओं को लागू किया गया है उस तकनीक और उसके बारे में जानकारी ली जा रही है. झारखंड में सत प्रतिशत जो लक्ष्य को हासिल किया गया है, उससे काफी मोटिवेशनल मिला है.” - करमा, टीम सदस्य, अरुणाचल प्रदेश
टीम दो दिनों तक पलामू में रुकेगी और स्वरोजगार योजनाओं को लागू करने की तकनीक, प्रशिक्षण प्रक्रिया तथा ग्राउंड लेवल इंप्लीमेंटेशन को समझेगी. झारखंड का यह लाइवलीहुड प्रोग्राम अब देश भर के लिए मॉडल बन गया है.
JSLPS के प्रयासों से लाखों ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका मिल रही है, जिससे गरीबी उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान हो रहा है. अरुणाचल प्रदेश की टीम इस सफल मॉडल को अपने राज्य में अपनाने की तैयारी कर रही है.







