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बड़गड़ बैंक में पेंशन भुगतान को लेकर गंभीर सवाल, बुजुर्ग की मौत के बाद SDM ने दी सख्त चेतावनी

Jharkhand: शुक्रवार को जिला प्रशासन की जांच टीम बड़गड़ स्थित संबंधित बैंक शाखा पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की. इस दौरान बैंक कर्मियों पर रिश्वतखोरी और लापरवाही के नए आरोप भी सामने आए हैं.
 
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Jharkhand: पेंशन नहीं मिलने से परेशान एक बुजुर्ग की मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. इस गंभीर प्रकरण में प्रशासन हरकत में आ गया है. शुक्रवार को जिला प्रशासन की जांच टीम बड़गड़ स्थित संबंधित बैंक शाखा पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की. इस दौरान बैंक कर्मियों पर रिश्वतखोरी और लापरवाही के नए आरोप भी सामने आए हैं.

पेंशन भुगतान में देरी बना विवाद की जड़

मृतक बुजुर्ग पिछले कई महीनों से अपनी पेंशन के लिए बैंक के चक्कर लगा रहा था. परिजनों का आरोप है कि बैंक कर्मियों द्वारा बार-बार टालमटोल किया गया और कथित रूप से रिश्वत की मांग भी की गई. पेंशन नहीं मिलने से आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव झेल रहे बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ी और बाद में उनकी मौत हो गई.

घटना के बाद मंगलवार को जिला प्रशासन की जांच टीम बड़गड़ स्थित झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक की शाखा पहुंची और पूरे मामले की विस्तृत जांच की. जांच के दौरान बैंक के एक मैसेंजर पर रिश्वत लेने का गंभीर आरोप भी सामने आया, जिस पर एसडीएम ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए.

गढ़वा के उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा के निर्देश पर रंका के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) मोहम्मद परवेज और लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) सत्यदेव कुमार ने बैंक पहुंचकर मामले की जांच शुरू की. अधिकारियों ने मृतक के परिजनों, ग्रामीणों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बैंक कर्मियों से अलग-अलग पूछताछ कर घटनाक्रम की जानकारी जुटाई.

बीमारी के कारण दूसरी मंजिल पर बैंक नहीं जा सके थे रतन 

जांच के दौरान एसडीएम ने मृतक की पत्नी रेपा लकड़ा, पुत्र अनिल लकड़ा और पुत्रवधू फुलमनी लकड़ा का बयान दर्ज किया. परिजनों ने बताया कि रतन लकड़ा लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार थे और वृद्धावस्था पेंशन ही उनके इलाज का मुख्य सहारा थी. उनका आरोप है कि कई बार बैंक जाने के बावजूद केवाईसी अपडेट नहीं होने का हवाला देकर पेंशन रोक दी गई. बीमारी के कारण रतन लकड़ा बैंक की दूसरी मंजिल तक नहीं जा सके. परिजनों ने कई बार बैंक कर्मियों से नीचे आकर बायोमेट्रिक सत्यापन करने का अनुरोध किया, लेकिन किसी ने मदद नहीं की.

'इसे बाहर निकाल दो' कहकर बहू को लौटा दिया था

पुत्रवधू फुलमनी लकड़ा ने जांच टीम को बताया कि जब उन्होंने शाखा प्रबंधक कृष्ण कुमार से अपने ससुर की गंभीर स्थिति बताते हुए मानवीय आधार पर मदद की अपील की, तब कथित तौर पर शाखा प्रबंधक ने बैंक के मैसेंजर नंदलाल राम उर्फ हेमंत कुमार से कहा, 'इसे बाहर निकाल दो.' इस व्यवहार से आहत होकर वह रोते हुए बैंक से लौट गईं.

बाद में जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद बैंक कर्मी घर पहुंचे और बिस्तर पर ही बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी की, लेकिन इसके बावजूद खाते से पेंशन की राशि नहीं निकल सकी. परिजनों का कहना है कि समय पर पेंशन मिल जाती तो रतन लकड़ा का बेहतर इलाज हो सकता था.

जांच के दौरान रिश्वत लेने का आरोप भी आया सामने

जांच के बीच कालाखजुरी गांव की रंजु देवी भी बैंक पहुंचीं और अधिकारियों के सामने बैंक मैसेंजर नंदलाल राम उर्फ हेमंत कुमार पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया. महिला ने बताया कि पति की मौत के बाद खाते से करीब 55 हजार रुपये निकालने के लिए मैसेंजर ने पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी. विरोध के बावजूद खाते से पांच हजार रुपये निकाले गए, जिनमें से तीन हजार रुपये उसने अपने पास रख लिए.

शिकायत सुनने के बाद एसडीएम मोहम्मद परवेज ने संबंधित कर्मी को कड़ी फटकार लगाई और बुधवार तक पूरी राशि महिला को लौटाने का निर्देश दिया. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि तय समय तक पैसे वापस नहीं किए गए तो संबंधित कर्मी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

जांच के समय शाखा प्रबंधक कृष्ण कुमार अवकाश पर थे. उनकी अनुपस्थिति में कैशियर विकास कुमार दुबे ने मृतक के खाते से जुड़े सभी दस्तावेज जांच टीम को उपलब्ध कराए. इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण बैंक परिसर में मौजूद रहे और वृद्ध एवं असहाय खाताधारकों के साथ संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने तथा दोषी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की.

उल्लेखनीय है कि सोमवार को ग्रामीणों ने रतन लकड़ा का शव बैंक गेट पर रखकर करीब दो घंटे तक प्रदर्शन किया था. फिर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लिया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए.