महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल है लातेहार के मुक्का गांव की शीला देवी, मजदूर से मालकिन तक का सफर, जरूर पढ़िए ऐसी सच्ची प्रेरणादायक कहानी...
Latehaar: कहावत है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो और कठिन परिश्रम के साथ काम किया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है. लातेहार सदर प्रखंड की मुक्का गांव की रहने वाली शीला देवी ने इस बात को पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाई है.

शीला देवी का परिवार 10 वर्ष पहले तक मजदूरी पर निर्भर था. परंतु आज उनके पास ट्रैक्टर थ्रेसर मशीन समेत रोजगार के कई बेहतर साधन उपलब्ध हो गए हैं. इनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपए से अधिक हो गई है.
दरअसल, शीला देवी की कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. अनुसूचित जनजाति परिवार की शीला देवी ने अपने मेहनत के बल पर अपने परिवार की किस्मत बदल दी.
साल 2014 से पहले शीला देवी और उनके पति मजदूरी किया करते थे. मजदूरी के कारण उनके घर की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी. घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चल पाता था. अपने घर की इस स्थिति को देखकर शीला देवी हमेशा चिंतित रहती थी.
शीला देवी बताती है कि घर की खराब आर्थिक स्थिति के कारण पूरा परिवार परेशान था. इसी बीच वर्ष 2014 में शीला देवी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी. यहीं से उनके जीवन ने नया मोड़ लिया. समूह से जुड़कर उन्होंने समूह से ही ऋण लेकर सबसे पहले बकरी पालन आरंभ किया.
बकरी पालन में जब उन्हें कुछ आमदनी हुई तो उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी. जिससे नया रोजगार शुरू किया. धीरे-धीरे उनका यह रोजगार चलने लगा. इसके बाद पूरा परिवार उनके साथ मेहनत करने लगा. उन लोगों की मेहनत भी सफल होने लगी. फिर ऋण लेकर शीला देवी ने ट्रैक्टर और थ्रेसर मशीन खरीदा.
स्थिति जब बेहतर होने लगी तो उन्होंने अपने रोजगार को और आगे बढ़ाया. उन्होंने घर में ही सिलाई सेंटर भी खोल ली. यहां कपड़ा सिलने के साथ-साथ वह लोगों को सिलाई की ट्रेनिंग भी देती हैं. अपने बच्चों तथा परिवार के अन्य सदस्यों को भी उन्होंने सिलाई सिखाया.
इस साल उन्होंने टेंट हाउस और साउंड सिस्टम का भी शुभारंभ कर अपने रोजगार को और आगे बढ़ा दिया. वर्तमान समय में शीला देवी अपने गांव में ही नहीं बल्कि आसपास के इलाके में भी प्रचलित हो गई हैं और लोग इनकी मेहनत और लग्न की तारीफ करते हैं.
शीला देवी का छोटा बेटा आदित्य उरांव बताता है कि उनके घर की स्थिति काफी दयनीय थी. परंतु उनकी मां ने अपनी मेहनत के दम पर आज पूरे परिवार को रोजगार से जोड़ दिया है.
आज उनके घर में रोजगार के कई अलग-अलग साधन उपलब्ध हैं, जिससे घर में वार्षिक आमदनी लाखों रुपए हो गई है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष टेंट हाउस की भी स्थापना उन्होंने की है, जिससे आमदनी और अधिक बढ़ेगी. पूरा परिवार अब रोजगार से जुड़ गया है जिससे सभी लोग अब खुशहाल हैं.
वहीं इस संबंध में झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के जिला कार्यक्रम प्रबंधक संतोष कुमार ने कहा कि शीला देवी समाज के लिए प्रेरणा हैं. उन्होंने समूह से जुड़कर जिस प्रकार खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया, यह वाकई काबिले तारीफ है.
उन्होंने कहा कि अन्य महिलाओं को भी उनसे सीख लेकर इसी तरह आगे बढ़ना चाहिए, विभाग महिलाओं को हर संभव सहयोग देने को तैयार है.







