पलामू में क्राइम कंट्रोल के लिए स्पेशल टीम सक्रिय, 2,000 अपराधियों की हर गतिविधि पर रहेगी नजर
Palamu: झारखंड के पलामू जिले में अपराध पर लगाम कसने के लिए पुलिस ने बड़ा अभियान शुरू किया है. जिले में क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले करीब 2,000 लोगों को पुलिस सर्विलांस पर रखेगी. इसके लिए जिला पुलिस ने एक स्पेशल सर्विलांस टीम का गठन किया है, जो इन सभी लोगों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगी.
पुलिस के अनुसार, निगरानी सूची में शामिल लोगों में पुराने अपराधी, जमानत पर बाहर आए आरोपी, संगठित अपराध से जुड़े संदिग्ध और बार-बार आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे लोग शामिल हैं. इनकी गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और संदिग्ध गतिविधि मिलने पर तत्काल कार्रवाई होगी.
नारकोटिक्स, आर्म्स एक्ट और प्रॉपर्टी ऑफेंस से जुड़े अपराधियों के खिलाफ मुकदमों के लिए पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया है. तीनों टीम का नेतृत्व सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी कर रहे हैं. पलामू पुलिस पूरे जिले को सेनीटाइज करने और आपराधिक गतिविधि को खत्म करने के लिए इस कदम को उठाया है. पलामू एसपी कपिल चौधरी के निर्देश पर सर्विलांस शुरू किया गया है और अपराधियों की सूची तैयार की गई है.
2000 क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले लोगों पर निगरानी शुरू की गई है. उनके गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. पुलिस अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कई बिंदुओं पर कार्य कर रही है. क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले लोगों के गतिविधियों के आधार पर उनके खिलाफ CCA, जिलाबदर, थाना हाजरी समेत कई कार्रवाई की जानी है. जिसके लिए नार्कोटिक्स, आर्म्स एक्ट का प्रॉपर्टी ऑफेंस के अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है. पुलिस जिले में शांति व्यवस्था बहाल रखने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है:- कपिल चौधरी, पलामू एसपी
मेदिनीनगर, चैनपुर और लेस्लीगंज के रडार पर है सबसे अधिक लोग
पलामू पुलिस की सूची में आपराधिक बैकग्राउंड वाले सबसे अधिक मेदिनीनगर, चैनपुर और लेस्लीगंज के इलाके के लोग हैं. चैनपुर में 330 लोगों पर सर्विलांस शुरू किया गया है, जबकि 100 लोग ऐसे हैं जो बाहर के रहने वाले हैं और चैनपुर में मुकदमा दर्ज है. लेस्लीगंज के इलाके में 100 लोगों पर सर्विलांस शुरू किया गया है. जबकि मेदिनीनगर के इलाके में 350 से अधिक लोगों पर निगरानी शुरू की गई है.
इस सूची में कई ऐसे बड़े नाम हैं, जो संगठित अपराध से जुड़े हुए हैं. सूची में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं या उनके गतिविधि आपराधिक संगठनों से जुड़ी हुई है. पुलिस ने वैसे लोगों को चिन्हित किया है, जिनके खिलाफ पिछले एक दशक में गंभीर अपराध के मामले दर्ज हुए हैं या पिछले एक दशक में वह आपराधिक गतिविधि में शामिल रहा है.







