मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के फर्जी चालान से झारखंड में पत्थर की तस्करी, स्थानीय स्तर पर हो रहा खेल, जांच के दौरान हुए कई खुलासे...
Palamu: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चालान का इस्तेमाल करके झारखंड में पत्थर की तस्करी की जा रही है. तस्कर सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चालान पलामू इलाके में ही फर्जी तरीके से तैयार किए जा रहे हैं. फिर इन फर्जी चालानों का इस्तेमाल करके पत्थर की ढुलाई की जाती है. पलामू पुलिस की कार्रवाई में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.
पिछले एक साल में, पलामू पुलिस ने अवैध खनन के सिलसिले में 97 हाइवा, 23 ट्रक, 4 ट्रेलर और 216 ट्रैक्टर जब्त किए हैं. इसी कार्रवाई के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पलामू से दूसरे इलाकों में पत्थर भेजने के लिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चाला. नवंबर में, पलामू के छतरपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान पांच हाइवा पकड़ा था. इस दौरान पता चला कि सभी हाइवा फर्जी चालानों का इस्तेमाल करके पत्थर की तस्करी कर रहे थे. इस कार्रवाई के दौरान प्रिंस कुमार नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया गया. जिसने पुलिस को पूरी जानकारी दी.
2025 के शुरुआती महीनों में, इसी तरह की एक कार्रवाई के दौरान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जुड़े नेटवर्क का भी खुलासा हुआ. छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के जिन इलाकों से जिन माइंस के नाम पर चालान काटे गए थे, वहां असल में कोई स्टोन माइंस नहीं थीं.
"जांच में कई बातों की जानकारी मिली है. पुलिस ने फर्जी चालानों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. मध्य प्रदेश के इलाके में ऑफलाइन चालान तैयार किए जाते हैं. कहीं-कहीं स्टोन माइंस और क्रशन वाले लोग जुड़े हुए हैं. मध्य प्रदेश के चालान का इस्तेमाल कर लोग बिहार और पश्चिम बंगाल जाते हैं. स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों की संलिप्तता सामने आई है, पूरे मामले में कार्रवाई की जा रही है. 10 से अधिक हाइवा को फर्जी चालान के माध्यम से पकड़ा गया है." - रीष्मा रमेशन, एसपी
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का चालान है सस्ता
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के स्टोन से जुड़े चालान झारखंड के चालानों से सस्ते हैं. झारखंड में ई-चालान का इस्तेमाल होता है, जबकि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में चालान एक फॉर्म भरकर जमा किए जाते हैं. झारखंड में चालान की कीमत लगभग 600 रुपये प्रति टन है, जबकि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में यह दर लगभग 350 रुपये है. तस्कर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चालानों का इस्तेमाल करते हैं. उदाहरण के लिए, तस्कर पलामू के चैनपुर इलाके से पत्थर उठाते हैं और फिर छत्तीसगढ़ से बिहार के लिए एक चालान तैयार करते हैं. फिर वे इस फर्जी चालान का इस्तेमाल करके पत्थर ट्रांसपोर्ट करने की कोशिश करते हैं.
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