‘पानी लेने से रोका, जातिसूचक शब्द कहे’! महिला की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज की FIR
Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र में कुएं से पानी लेने को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। सेक्टर-2 पंप हाउस के पास रहने वाली मंजू चौधरी ने अपने पड़ोसियों पर कुएं से पानी लेने से रोकने, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित करने, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। महिला की शिकायत पर धुर्वा थाना पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।

कुएं से पानी लेने को लेकर शुरू हुआ विवाद
दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, मंजू चौधरी का अपने पड़ोसियों के साथ विवाद चल रहा था। महिला का आरोप है कि उन्हें कुएं से पानी लेने से रोका जाता था और इस दौरान गाली-गलौज के साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, जब उन्होंने इस व्यवहार का विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई। घर के बाहर कपड़े सुखाने जैसी बातों को लेकर भी विवाद होने का आरोप लगाया गया है। महिला ने शिकायत में कहा है कि छोटी-छोटी बातों पर उन्हें अपमानित किया जाता था और धमकियां दी जाती थीं।
जुलाई से अक्टूबर तक विवाद होने का आरोप
मंजू चौधरी की शिकायत के मुताबिक, 23 जुलाई 2026 को शाम करीब छह बजे विवाद हुआ था। इसके बाद 26 जुलाई को भी गाली-गलौज और मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।
महिला ने 10 अक्टूबर को दोपहर करीब तीन बजे दोबारा विवाद होने और मारपीट किए जाने की शिकायत की। आरोप है कि इस दौरान उन्हें जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई।
पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
प्राथमिकी में उपेंद्र यादव, अमरेंद्र कुमार, रेमा देवी, आदित्य और अमन उर्फ अंशु के नाम शामिल हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 351(2), 352 और 3(5) के अलावा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
मामले की जांच सब-इंस्पेक्टर अजीव कुमार रंजन को सौंपी गई है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और विवाद की पूरी पृष्ठभूमि की जांच कर रही है।
पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं है। पुलिस की जांच के बाद ही मामले से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।







