टेंडर कमीशन घोटाले में गिरफ्तार आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट ने दी बेल
Jharkhand: झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन्हें जमानत दे दी. उनके साथ उनके निजी सचिव संजीव लाल को भी बेल मिली है.

ईडी ने आलमगीर आलम को मई 2024 में गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी का आरोप था कि ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर आवंटन के बदले कमीशन लिया जाता था. इस मामले में छापेमारी के दौरान 32 करोड़ रुपये से अधिक नकद बरामद हुए थे.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि आलमगीर आलम के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है और उनके घर से कोई नकदी बरामद नहीं हुई थी. वहीं ईडी ने अदालत में दावा किया कि बरामद डायरी और दस्तावेजों से मंत्री तक कमीशन पहुंचने के संकेत मिले हैं.
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. करीब दो साल जेल में रहने के बाद अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है.
झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन्हें जमानत दे दी. उनके साथ उनके निजी सचिव संजीव लाल को भी बेल मिली है.
ईडी ने आलमगीर आलम को मई 2024 में गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी का आरोप था कि ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर आवंटन के बदले कमीशन लिया जाता था. इस मामले में छापेमारी के दौरान 32 करोड़ रुपये से अधिक नकद बरामद हुए थे.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि आलमगीर आलम के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है और उनके घर से कोई नकदी बरामद नहीं हुई थी. वहीं ईडी ने अदालत में दावा किया कि बरामद डायरी और दस्तावेजों से मंत्री तक कमीशन पहुंचने के संकेत मिले हैं. इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. करीब दो साल जेल में रहने के बाद अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है.
2024 में हुई थी गिरफ्तारी
आलमगीर आलम को 15 मई 2024 को Enforcement Directorate (ED) ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले उनसे दो दिनों तक करीब 14 घंटे पूछताछ की गई थी. ईडी ने आरोप लगाया था कि झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर आवंटन के बदले कमीशन लेने का संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसमें अधिकारी, इंजीनियर और राजनीतिक पदाधिकारी शामिल थे. जांच एजेंसी ने अदालत में दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए दावा किया था कि जनवरी 2024 में जारी 92 करोड़ रुपये के 25 टेंडरों में कथित तौर पर कमीशन लिया गया. ईडी के अनुसार इन टेंडरों से संबंधित लगभग 1.23 करोड़ रुपये का कथित कमीशन आलमगीर आलम तक पहुंचा







