AAP की सक्रियता को झारखंड की प्रमुख पार्टियां ले रही हल्के में, कहीं शहरी निकाय चुनाव में बाजी ना मार ले AAP पार्टी?
Ranchi: AAP ने झारखंड में संगठन विस्तार पर जोर दिया है. पार्टी का कहना है कि दिल्ली और पंजाब में जिस मॉडल से सफलता मिली मुफ्त बिजली, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार मुक्त शासन. वही मुद्दे यहां भी जनता को प्रभावित कर सकते हैं...
Jan 20, 2026, 16:45 IST
Ranchi: आम आदमी पार्टी (AAP) झारखंड में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है. भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उपजी यह पार्टी, जो दिल्ली और पंजाब में सत्ता हासिल कर चुकी है, अब झारखंड की स्थानीय समस्याओं को लेकर सक्रिय हो गई है.
हाल ही में पार्टी ने राज्य में 49 सदस्यीय झारखंड राज्य समन्वय समिति का गठन किया है और निकाय चुनाव के लिए अलग से प्रभारी भी नियुक्त किया है. प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारी के दौरे बढ़ गए हैं.
ऐसे में सवाल यह है कि दिल्ली में सत्ता गंवाने के बाद AAP झारखंड में किस संभावना को तलाश रही है? क्या भ्रष्टाचार, जनसमस्याएं और शहरी मुद्दे यहां पार्टी के लिए मुफीद साबित हो सकते हैं?
AAP ने झारखंड में संगठन विस्तार पर जोर दिया है. पार्टी का कहना है कि दिल्ली और पंजाब में जिस मॉडल से सफलता मिली मुफ्त बिजली, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार मुक्त शासन.
वही मुद्दे यहां भी जनता को प्रभावित कर सकते हैं. झारखंड के शहरी इलाकों में सड़कें, महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, कानून-व्यवस्था जैसी समस्याएं आम हैं. पार्टी इन मुद्दों को उठाकर जनता तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
झारखंड प्रदेश AAP के मीडिया प्रभारी प्रभात शर्मा ने कहा, "झारखंड में हमें एक सशक्त और आम जनता के प्रति समर्पित संगठन तैयार करना है. जिन समस्याओं को उठाकर हमने दिल्ली और पंजाब में सत्ता पाई, उसी तरह की समस्याओं से यहां की जनता जूझ रही है. हर क्षेत्र में सड़क, सुरक्षा, महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा, विधि-व्यवस्था के मामले हैं. हर दिन अखबारों में अराजकता की खबरें छपती हैं हत्या, चोरी आदि. ऐसे में AAP चुप कैसे रह सकती है?"
उन्होंने निकाय चुनाव पर जोर देते हुए कहा, "पार्टी इसे पूरी गंभीरता से ले रही है. इसी वजह से प्रदेश स्तर पर निकाय चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है. इसका संदेश साफ है कि हम शहरी इलाकों के हर गली, वार्ड और घर तक पहुंचेंगे और अपनी विचारधारा जन-जन तक ले जाएंगे."
प्रभात शर्मा ने अन्य दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ताधारी झामुमो-कांग्रेस गठबंधन और मुख्य विपक्षी भाजपा जनता के मुद्दों को नहीं उठा रहे. "जनता की आवाज उठाने के लिए हमें झारखंड में मजबूती से आना होगा. हम किसी को नुकसान या फायदा पहुंचाने नहीं आए हैं, बल्कि जनसमस्याओं को मुखरता से उठाने आए हैं."
निकाय चुनाव में AAP की प्रमुख रणनीति
झारखंड में नगर निकाय चुनाव 2026 में ही होने वाले हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं. अधिसूचना जनवरी अंत तक जारी होने की संभावना है, मतदान फरवरी अंत में और मतगणना फरवरी अंत या मार्च प्रारंभ में हो सकती है. चुनाव एक चरण में होंगे और बैलेट पेपर से वोटिंग होगी. AAP ने इन्हें मजबूती से लड़ने का ऐलान किया है. शहरी निकायों में पार्टी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जहां भ्रष्टाचार, टैक्स, बुनियादी सुविधाएं जैसे मुद्दे प्रमुख हैं.
झारखंड की प्रमुख पार्टियां AAP की सक्रियता को हल्के में ले रही हैं
झामुमो (सत्तारूढ़ दल) के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा, "हर पार्टी को झारखंड में राजनीति करने और संगठन विस्तार का अधिकार है. हमारे वरिष्ठ नेताओं से AAP नेताओं का अच्छा संबंध व्यक्तिगत मामला है. वे हमारी सरकार की आलोचना भी कर सकते हैं. लेकिन झारखंड की राजनीति पर AAP की सक्रियता का कोई असर नहीं पड़ेगा.
यहां AAP नर्सरी के विद्यार्थी जैसी है अभी असर नहीं पड़ेगा. यहां राजनीति के पीएचडी और पीजी वाले लोग हैं. निकाय चुनाव में भी AAP का कोई असर नहीं होगा. यहां ब्रांड हेमंत सोरेन का जोर रहेगा."
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा, "हर पार्टी चुनाव लड़ना चाहती है. AAP भी लड़ेगी, इसमें क्या है? लेकिन उसे यहां अपनी स्थिति का आकलन करना चाहिए.
कांग्रेस निकाय चुनाव की पूरी तैयारी में है. हम मजबूती से लड़ेंगे. जहां हम मजबूत थे, वहां AAP ने हमें डैमेज किया यह आधी सच्चाई है. सच यह है कि हमने दिल्ली में AAP का अहंकार तोड़ा. दिल्ली में क्या स्थिति हुई? बहुत अहंकार था कि बिना कांग्रेस के चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे वहां क्या हुआ?"
वहीं, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने AAP को खारिज करते हुए कहा, "AAP की सक्रियता का झारखंड की राजनीति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
भाजपा का उससे कोई लेना-देना नहीं. कांग्रेस 60 साल सत्ता में रही, आज कहां है? AAP कुकुरमुत्ता जैसी पार्टी है. जिस विचार-सिद्धांत से सत्ता मिली, उसे ताक पर रख दिया. इनकी कोई नीति-सिद्धांत नहीं है, इसलिए यहां कुछ खास नहीं कर पाएंगे."
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड की राजनीति क्षेत्रीय दलों (झामुमो), आदिवासी मुद्दों और राष्ट्रीय दलों (भाजपा, कांग्रेस) के इर्द-गिर्द घूमती है. AAP को यहां नई पार्टी के रूप में स्थापित होने में समय लगेगा.
दिल्ली में हालिया हार (2025 विधानसभा चुनाव में सीटें घटीं) के बाद पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर चुनौतियां हैं, लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव छोटे स्तर पर प्रयोग का मौका दे सकते हैं. अगर AAP शहरी मुद्दों पर फोकस कर जनता से जुड़ पाई, तो भविष्य में विधानसभा चुनाव में भी असर दिखा सकती है.
फिलहाल, अन्य दल इसे गंभीर खतरा नहीं मान रहे. कुल मिलाकर, AAP झारखंड में 'आम आदमी' की आवाज बनकर उभरने की कोशिश कर रही है, लेकिन स्थानीय राजनीतिक समीकरण इसे आसान नहीं बनाएंगे. निकाय चुनाव इसका पहला बड़ा टेस्ट होगा.







