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1 सितंबर से बंद है पशु अस्पताल, इलाज के लिए दर-दर भटक रहे पशुपालक

Palamu: पलामू के पाटन में फर्स्ट क्लास वेटनरी हॉस्पिटल 1 सितंबर से बंद बताया जा रहा है. अस्पताल बंद रहने से क्षेत्र के पशुपालकों को अपने बीमार पशुओं के इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें इलाज के लिए दूसरे स्थानों का रुख करना पड़ रहा है.
 
PALAMU NEWS

Palamu: झारखंड के पलामू जिले के पाटन प्रखंड के किशुनपुर स्थित प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय में 1 सितंबर से ताला लटका हुआ है। सरकारी पशु अस्पताल के बंद रहने से क्षेत्र के पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई है। मवेशियों के इलाज और दवा के लिए अस्पताल पहुंच रहे पशुपालकों को मुख्य द्वार पर ताला लगा मिलने के बाद निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

बरसात के मौसम में बढ़ी पशुओं की बीमारी

पशुपालकों के अनुसार, बरसात के मौसम में मवेशियों में कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में सरकारी पशु चिकित्सालय बंद रहने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं को समय पर उपचार नहीं मिलने पर उन्हें निजी स्तर पर पशु चिकित्सकों की तलाश करनी पड़ रही है। कई पशुपालकों को इलाज के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में भी जाना पड़ रहा है।

पशुपालकों ने विभागीय अधिकारियों से क्षेत्र में पशुओं के इलाज और दवा की व्यवस्था जल्द बहाल करने की मांग की है।

कथित झोलाछाप पशु चिकित्सकों पर निर्भरता का आरोप

अस्पताल बंद रहने के कारण क्षेत्र के कई पशुपालक कथित झोलाछाप पशु चिकित्सकों पर निर्भर होने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग पर्याप्त पशु चिकित्सा प्रशिक्षण या डिग्री के बिना ही मवेशियों का इलाज कर रहे हैं।

पशुपालकों का यह भी आरोप है कि इलाज के नाम पर उनसे अधिक पैसे वसूले जाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, गलत इलाज के कारण कुछ मामलों में मवेशियों की हालत बिगड़ने और मौत होने की स्थिति भी सामने आई है। इसे लेकर पशुपालकों और कथित झोलाछाप चिकित्सकों के बीच विवाद की स्थिति बनने की बात भी कही गई है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सरकारी अस्पताल बंद होने से बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी पशु चिकित्सालय उनके लिए मवेशियों के इलाज का प्रमुख सहारा था। अस्पताल बंद रहने के कारण पशुपालकों को मजबूरी में निजी या अनधिकृत स्तर पर इलाज कराना पड़ रहा है।

पशुपालकों ने मांग की है कि क्षेत्र में सरकारी पशु चिकित्सा सेवा जल्द बहाल की जाए, ताकि बीमार मवेशियों को समय पर इलाज और जरूरी दवाएं मिल सकें।

विभागीय स्तर पर बंद करने का लिया गया निर्णय

पाटन के पशु चिकित्सक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि किशुनपुर स्थित प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय को सरकार के स्तर से ही बंद किया गया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में कार्यरत कर्मी को जिला मुख्यालय बुलाया गया है।

पशु चिकित्सक के अनुसार, चिकित्सालय को बंद करने का निर्णय विभागीय स्तर पर लिया गया है। ऐसे में अब पशुपालकों की नजर विभाग की ओर से पशु चिकित्सा सेवाओं को लेकर होने वाली अगली व्यवस्था पर है।

पशुपालकों ने जल्द व्यवस्था बहाल करने की मांग की

पशुपालकों का कहना है कि मवेशियों के बीमार होने की स्थिति में तत्काल उपचार जरूरी होता है। ऐसे में सरकारी पशु अस्पताल लंबे समय तक बंद रहने से ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों के सामने गंभीर परेशानी खड़ी हो सकती है।

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि पाटन के किशुनपुर क्षेत्र में पशु चिकित्सा, दवा और चिकित्सकीय सुविधा की नियमित व्यवस्था जल्द सुनिश्चित की जाए।