सरकारी योजना का लाभ भी बना परेशानी, लातेहार के ग्रामीण 30 किमी सफर कर लेने को मजबूर राशन
Latehar: झारखंड के लातेहार जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले राशन के लिए ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई गांवों के लाभुकों को सरकारी राशन लेने के लिए करीब 30 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ रही है. इससे विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग लाभार्थियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि राशन दुकान उनके गांव से काफी दूर होने के कारण आने-जाने में पूरा दिन लग जाता है. परिवहन की सुविधा नहीं होने से कई लोगों को पैदल या निजी वाहन का सहारा लेना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ता है. कई लाभार्थियों ने मांग की है कि उनके गांव के नजदीक जन वितरण प्रणाली (PDS) की दुकान खोली जाए या फिर राशन वितरण व्यवस्था में बदलाव किया जाए ताकि सभी पात्र लोगों को आसानी से योजना का लाभ मिल सके. इस योजना का लाभ लातेहार जिले के मनिका प्रखंड अंतर्गत देवबार गांव के ग्रामीणों को भी मिला है. परंतु यहां के ग्रामीणों को जन वितरण दुकान से राशन लेने के लिए 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है.
दरअसल, लातेहार जिले के मनिका प्रखंड का देवबार गांव आज भी काफी पिछड़ा हुआ इलाका है. लगभग 1000 आबादी वाले इस गांव में आदिवासी तथा अनुसूचित जाति के लोग ही मुख्य रूप से निवास करते हैं. गांव में गरीबी चरम पर है, जिसके कारण यहां के ग्रामीणों के पास राशन कार्ड अवश्य बना हुआ है, लेकिन हर महीने राशन लेने के लिए उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
30 किलोमीटर का राउंड ट्रिप
ग्रामीणों को अपने गांव से 15 किलोमीटर दूर मनिका प्रखंड के केड़वाकरम गांव जाना पड़ता है. वहां से राशन लेकर वापस घर लौटना होता है. यानी यहां के कार्डधारियों को राशन लेने के लिए कुल 30 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है. कई बार ऐसा होता है कि जब लाभुक जन वितरण दुकान पर पहुंचते हैं तो लिंक सर्वर नहीं रहने के कारण उन्हें बिना राशन लिए ही लौटना पड़ जाता है.

पैदल या ऑटो, जंगलों से गुजरना पड़ता है
कुछ ग्रामीण भाड़े से तो कई ग्रामीण पैदल ही राशन लेने जाते हैं. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले तो गांव के सभी लोग पैदल ही राशन लेने जाते थे. अब कुछ ग्रामीण गांव के ही एक ऑटो पर सवार होकर राशन लेने जाते हैं. इसके लिए उन्हें ₹50 किराया देना पड़ता है. हालांकि अभी भी कई ऐसे ग्रामीण हैं जिनके पास पैसे का भारी अभाव होता है, वे पैदल ही राशन लेने जाते हैं. गांव से राशन वितरण दुकान तक जाने के लिए ग्रामीणों को घने जंगलों से भी गुजरना पड़ता है.
स्थानीय ग्रामीण महिला पूनम कुमारी और बसंती देवी बताती हैं कि राशन लेने के लिए उन्हें 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. कई बार तो दुकान पर दो-तीन बार जाने के बाद ही राशन मिल पाता है. उन्होंने कहा कि यदि गांव में ही राशन दुकान हो जाती तो उन्हें काफी सहूलियत होती.
वहीं, ग्रामीण रमेश भुइयां ने बताया कि गांव की सड़क भी काफी जर्जर है. राशन लाने के लिए 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ना उनके लिए मुसीबत का कारण बना हुआ है.
अधिकारी का आश्वासन
मामले में पूछे जाने पर लातेहार जिला आपूर्ति पदाधिकारी श्रवण राम ने कहा कि ग्रामीणों को सुविधाजनक स्थान से राशन मिले, इसके लिए विभाग पूरी तरह संकल्पित है. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच कर निश्चित रूप से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.







