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मनरेगा योजना में केंद्र सरकार के बदलाव के खिलाफ 5 जनवरी को कांग्रेस का आंदोलन...

Ranchi: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी का राष्ट्रपिता महात्मा गांधी विरोधी चरित्र उजागर हो गया है. 5 जनवरी को लोकभवन के सामने होने वाले प्रदर्शन में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू, दोनों सह प्रभारी, सभी मंत्री, विधायक, कांग्रेस नेता और मनरेगा कर्मी बापू वाटिका से लोकभवन तक मार्च करेंगे. प्रणव झा भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे...
 
RAHUL GANDHI

Ranchi: केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह जी राम जी के नाम पर नई स्कीम लाने के कदम के खिलाफ कांग्रेस ने आर-पार की लड़ाई की घोषणा की है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कांग्रेस के मनरेगा बचाओ संग्राम के शेड्यूल का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि 5 जनवरी को मोरहाबादी मैदान में बापू वाटिका में मनरेगा मजदूरों के साथ संकल्प लेने के बाद लोकभवन के सामने एक विशाल प्रदर्शन से इस संग्राम की शुरुआत होगी.

MNREGA Bachao Sangram

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी का राष्ट्रपिता महात्मा गांधी विरोधी चरित्र उजागर हो गया है. 5 जनवरी को लोकभवन के सामने होने वाले प्रदर्शन में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू, दोनों सह प्रभारी, सभी मंत्री, विधायक, कांग्रेस नेता और मनरेगा कर्मी बापू वाटिका से लोकभवन तक मार्च करेंगे. प्रणव झा भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे.

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केशव महतो कमलेश ने कहा कि केंद्र सरकार ने न सिर्फ रोजगार की गारंटी देने वाली इस स्कीम का नाम बदला है, बल्कि ग्रामीण भारत के विकास और अधिकारों पर भी हमला किया है. पहले, योजना ग्राम पंचायत बनाती थी, लेकिन अब वे केंद्र के बजट के हिसाब से बनेंगी. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने 2015 में भी मनरेगा की आलोचना की थी, और इसे मिटाने की उनकी योजना पहले से ही थी. कोरोना महामारी के दौरान, इसी मनरेगा ने मजदूरों के पलायन को रोका था. पहले, मनरेगा मजदूरों को सामान्य तरीके से उनकी मजदूरी मिलती थी, लेकिन अब फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक्स के जरिए भुगतान होगा, जिससे मुश्किलें और बढ़ जाएंगी.

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वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि जब यह कानून महात्मा गांधी के नाम पर बना था, तो इसे बदलकर "जी राम जी" करना साफ दिखाता है कि बीजेपी की विचारधारा गांधीजी के विचारधारा के उलट है. नरेंद्र मोदी पहले से ही गांधीजी और उनकी विचारधारा को नहीं मानते थे, और अब भी नहीं मानते. उन्होंने कहा कि मनरेगा की जगह "जी राम जी" नाम रखकर बीजेपी यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह हिंदुत्व की सबसे बड़ी झंडेदार पार्टी है. लेकिन, वह भूल गई कि देश के राज्यों में कितनी विषमताएं हैं. कुछ राज्यों को छोड़ दें, तो बाकी राज्यों पर इस योजना के लिए अतिरिक्त आर्थित बोझ डाला गया है.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हमें हमारे हक का पैसा दे, हम राज्य में रोजगार गारंटी योजना चला लेंगे. उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी की भी यही विचारधारा थी, वहीं गांधी जी की भी विचारधारा थी. हम कोई राजनीति नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि नाम मत बदलो, त्रुटियां बदलो. कांग्रेस ने अपने 11 साल के शासनकाल में जितनी बड़ी लकीर खींची है, उससे बड़ी लाइन आप नहीं खींच पाए हैं. 60:40 होने पर उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री होने के नाते हम कमिटेड हैं. याचना नहीं करेंगे. हमारा हक दे दें.

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पूर्व वित्त मंत्री और लोहरदगा से कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव ने कहा कि जब मनरेगा बिल संसद से पास हुआ था, तब वे हाउस में थे. उस समय सभी ने इसकी तारीफ की थी, क्योंकि यह संविधान के मौलिक अधिकार में रोजगार का अधिकार शामिल नहीं होने की कमियों को दूर करने वाला था. अगर इसे संविधान में शामिल किया गया होता तो बेहतर होता, लेकिन चूंकि ऐसा नहीं हुआ, इसलिए मनरेगा ने उस कमी को पूरा किया. रामेश्वर उरांव ने कहा कि वे छात्र जीवन के दिनों से ही मनरेगा जैसी योजना के हिमायती रहे हैं.

उन्होंने "जी राम जी" स्कीम की कमियों को बताते हुए कहा कि बारिश के मौसम में काम नहीं मिलेगा. यह एक सच्चाई है कि झारखंड सरकार ने बारिश के मौसम में भी मनरेगा के तहत कई काम किए, जिससे ग्रामीण आबादी को काम मिला. जब बारिश के मौसम में मजदूरों को कोई काम नहीं मिलता, तो मनरेगा से उन्हें रोजगार मिलता था. कुछ राज्यों को छोड़कर, सभी राज्य गरीब हैं, इसलिए 60:40 का रेश्यो लागू करने में व्यवहारिक कठिनाइयां हैं. खूंटी में जिस करप्शन मामले की बात बीजेपी नेता कर रहे हैं, वह उन्हीं के शासनकाल में हुआ. कानून में संशोधन किए जा सकते थे, लेकिन यहां मनरेगा को ही खत्म कर दिया गया. महात्मा गांधी से इतनी चिढ़ क्यों?

मनरेगा बचाओ संग्राम का शेड्यूल

  • 07 या 08 जनवरी 2026 को तैयारी समिति की राष्ट्रव्यापी बैठक
  • 10 जनवरी को सभी जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में जिला स्तरीय प्रेस वार्ता
  • 11 जनवरी को सभी जिलों के मुख्यालय में बापू या अंबेडकर की प्रतिमावर्क समक्ष मनरेगा मजदूरों के साथ उपवास
  • 12 जनवरी से 30 जनवरी तक पंचायत लेवल पर चौपाल का आयोजन, प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष का पत्र, पर्चों का वितरण होगा.
  • 30 जनवरी को वार्ड लेवल पर धरना
  • 31 से 06 फरवरी पर जिला लेवल पर डीएम या डीसी कार्यालय के समक्ष मनरेगा बचाओ धरना.
  • 07 से 15 फरवरी तक विधानसभा का राज्यस्तरीय घेराव.
  • 16 से 25 फरवरी तक देश को चार जोन में बांटकर आंदोलन होगा.