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देश छोड़कर भागे अपराधियों की खंगाली जा रही पूरी कुंडली, इंटरपोल के सहयोग से तेज होगी प्रत्यर्पण प्रक्रिया

Ranchi: अपराधियों के प्रोफाइल के लिए बाकायदा एक फॉर्मेट बनाया गया है. फॉर्मेट में अपराधी का नाम, उसके पिता का नाम, पासपोर्ट संख्या, भगोड़े अपराधी की साफ-सुथरी रंगीन फोटो, झारखंड में भगोड़े अपराधियों पर कितने मामले दर्ज हैं.
 
JHARKHAND

Ranchi: विदेश भाग चुके वांछित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए केंद्रीय एजेंसियों ने उनकी विस्तृत प्रोफाइलिंग शुरू कर दी है. अधिकारियों के अनुसार, फरार अपराधियों की गतिविधियों, ठिकानों, वित्तीय लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को गति दी जा सके. मयंक सिंह को तो गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन अभी भी कई ऐसे अपराधी हैं, जो विदेश में बैठकर झारखंड में आपराधिक वारदातों को अंजाम दिलवा रहे हैं. अब ऐसे अपराधियों को विदेश से गिरफ्तार कर प्रत्यर्पण के लिए बड़ी कवायद शुरू कर दी गई है.

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सूत्रों के मुताबिक, इस अभियान में Interpol की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी. इंटरपोल के माध्यम से विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर रेड कॉर्नर नोटिस समेत अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लिया जाएगा.

अपराध अनुसंधान विभाग यानी सीआईडी के द्वारा झारखंड के सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को विदेश फरार हो चुके भगोड़े अपराधियों की पूर्ण विवरणी उपलब्ध करवाने के लिए पत्र लिखा है. पत्र में निदेश दिया गया है कि विदेश फरार हो चुके गैंगस्टर अपराधियों के प्रत्यार्पण के लिए उनकी प्रोफाइलिंग कर मुख्यालय भेजा जाए.

अपराधियों के प्रोफाइल के लिए बाकायदा एक फॉर्मेट बनाया गया है. फॉर्मेट में अपराधी का नाम, उसके पिता का नाम, पासपोर्ट संख्या, भगोड़े अपराधी की साफ-सुथरी रंगीन फोटो, झारखंड में भगोड़े अपराधियों पर कितने मामले दर्ज हैं. भगोड़े अपराधी का हाल का लोकेशन अगर पता हो तो उसे भी प्रोफाइल में डाला जाए, यानी फिलहाल फरार अपराधी विदेश में किस देश में छुपा हुआ है. साथ ही फॉर्मेट में अगर अपराधी का फिंगरप्रिंट उपलब्ध हो तो वह भी उपलब्ध करवाना है.

मिली जानकारी के अनुसार विदेश फरार हो चुके तमाम अपराधियों की लिस्ट तैयार कर और उनका प्रोफाइल बनाकर सीआईडी मुख्यालय को भेज भी दिया गया है. पत्र में यह भी कहा गया है कि अगर किसी जिले में कोई भगोड़ा अपराधी नहीं है तो उसकी जानकारी भी प्रोफाइल में उपलब्ध कराएं.

सीआईडी के पत्र में अपराधियों को वर्गीकृत श्रेणी के तहत प्रोफाइलिंग करने का निर्देश दिया गया. इसके लिए चार श्रेणी बनाए गए हैं. पहले नंबर पर काउंटर टेररिज्म है. अगर झारखंड से विदेश भागे अपराधी पर आतंक विरोधी मामले दर्ज हों तो उसकी जानकारी भी देनी है. प्रथम श्रेणी में ही संगठित अपराध को भी रखा गया है.

वहीं दूसरे श्रेणी में नारकोटिक्स को रखा गया है. इसके तहत विदेश भागे अपराधी पर अगर नशीले पदार्थ और ड्रग्स की तस्करी से संबंधित मामले दर्ज हैं तो उन्हें इस श्रेणी में शामिल किया जाएगा. तीसरी श्रेणी में आर्थिक अपराध को रखा गया है. इसमें वैसे अपराधियों को शामिल किया गया है जो वित्तीय धोखाधड़ी कर विदेश फरार हो चुके हैं. इसके अलावा चौथी श्रेणी में साइबर क्राइम, मानव तस्करी के साथ-साथ अन्य गंभीर मामलों को शामिल किया गया है.

विदेश से अपने गैंग का संचालन कर रहे बड़े अपराधियों में मयंक सिंह की गिरफ्तारी झारखंड पुलिस के सहयोग से अजरबैजान में हुई थी. जिसके बाद उसे भारत लाया गया. मयंक सिंह भले ही अब झारखंड के जेल में बंद है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कॉल्स का धंधा अभी भी बंद नहीं हुआ है. झारखंड का कुख्यात प्रिंस खान सहित आधा दर्जन से ज्यादा अपराधी विदेश में बैठकर इंटरनेशनल कॉल के जरिए झारखंड के कारोबारी को धमका रहे हैं. जिनकी गिरफ्तारी अभी भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है.

जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में झारखंड के आधा दर्जन गैंगस्टर या तो खुद विदेश में हैं या फिर उनके गुर्गे. विदेश भागे गैंगस्टर में पहला नाम कुख्यात प्रिंस खान का है, दूसरा महतवपूर्ण नाम राहुल सिंह का है. इसके अलावा कई बड़े गैंग्स के गुर्गे भी विदेश शिफ्ट हो गए हैं. वहीं कुख्यात प्रिंस खान के पाकिस्तान भाग जाने की सूचना है. हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है.

यह सभी को पता है कि झारखंड के आधा दर्जन से अधिक संगठित आपराधिक गिरोह की काली कमाई का प्रमुख जरिया एक्सटॉर्शन मनी है. बड़े-बड़े कारोबारियों को फोन कर धमकाना, उनके कारोबारी ठिकानों पर फायरिंग करवाना यह सभी एक्सटॉर्शन मनी कमाने के तरीके हैं. राज्य के अंदर रहकर जब कोई अपराधी किसी व्यापारी को धमकाने के लिए कॉल करता तो वह पुलिस के टेक्निकल सेल के निशाने पर आ जाता है. ऐसे में सबसे पहले कुख्यात अपराधी अमन साहू (अब मृत) ने एक ऐसे शख्स की तलाश शुरू की जो देश से बाहर जाकर एक्सटॉर्शन के लिए कॉल करने का काम कर सके.

वर्ष 2020 के करीब अमन साहू का संपर्क बिहार के कुछ बड़े अपराधियों के साथ हो ही चुका था. साथ ही वह इंटरनेशनल अपराधी लॉरेंस बिश्नोई के साथ भी जुड़ गया था. पुलिस रिकार्ड के अनुसार बिहार के कुछ बड़े अपराधियों के द्वारा ही मयंक को अमन साहू से मिलवाया गया. इसके बाद यह तय हुआ कि मयंक मलेशिया और दुबई जैसे जगह पर रहेगा और वहीं से अमन गैंग के लिए एक्सटॉर्शन कॉल करेगा. अमन साहू के संपर्क में आने के बाद और लॉरेंस से निर्देश मिलने के बाद मयंक सिंह मलेशिया शिफ्ट हो गया और वहीं से शुरू हुई झारखंड में इंटरनेशनल नंबरों से एक्सटॉर्शन कॉल की. इसी चलन को वर्तमान में झारखंड के कई अपराधी इस्तेमाल कर रहे हैं.