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झारखंड सरकार बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटा बंद करें...बेवजह जनता का पैसा बर्बाद ना करें, झारखण्ड सरकार पर highcourt ने लगाया हर्जाना

Jharkhand Desk: इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की. एकलपीठ ने उनके पक्ष में फैसला दिया. इसके खिलाफ सरकार ने खंडपीठ में अपील दाखिल की. खंडपीठ ने अपील खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपने ही कर्मचारियों को न्याय से वंचित रखने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटा रही है.
 
JHARKHAND HIGHCOURT

Jharkhand Desk: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की बेवजह और बार बार की जाने वाली मुकदमेबाज़ी पर कड़ी नाराजगी जताई है. बुधवार को चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार अपने ही कर्मचारियों को न्याय से वंचित रखने के लिए बार बार अदालतों का दरवाजा खटखटा रही है, जिससे ना केवल न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि जनता का पैसा भी बर्बाद हो रहा है. 

अदालत ने जुर्माने की राशि प्रतिवादी को देने और छह माह के अंदर दोषी अधिकारी से राशि की वसूली करने का निर्देश दिया है. एकलपीठ के आदेश के खिलाफ सरकार ने खंडपीठ में अपील दाखिल की थी एकलपीठ में अखिलेश प्रसाद ने याचिका दाखिल की थी. इसमें कहा गया था कि बिहार विभाजन के बाद वह झारखंड में प्रशासनिक सेवा में आए थे. उनका पदस्थापन वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में नहीं किया गया.

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इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की. एकलपीठ ने उनके पक्ष में फैसला दिया. इसके खिलाफ सरकार ने खंडपीठ में अपील दाखिल की. खंडपीठ ने अपील खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपने ही कर्मचारियों को न्याय से वंचित रखने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटा रही है. अधिकारी निर्णय लेने से बचते हैं और हर विवाद अदालत पर छोड़ देते हैं, जिससे जनता का धन बर्बाद होता है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार पहले अखिलेश प्रसाद को 50 हजार रुपये दे और छह महीने में संबंधित अधिकारी से वसूली करे.