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विधानसभा में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय 2026 बिल पारित, विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति में बदलाव की तैयारी...

Ranchi: बीजेपी विधायक नीरा यादव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 135 पन्नों के इस विधेयक पर दो घंटे भी चर्चा सदन में नहीं हुआ और इसे पारित किया जाना आप समझ सकते हैं कि बहुमत के घमंड में कितने ये चूर हैं. जेएलकेएम विधायक जयराम महतो कहते हैं कि सदन में ज्यादा से ज्यादा चर्चा होनी चाहिए क्योंकि यह विधेयक छात्र नौजवान से जुड़ा हुआ है और सरकार क्या बदलाव करना चाहती है इसपर चर्चा होनी चाहिए थी मगर ऐसा नहीं हुआ.
 
JHARKHAND

Ranchi: झारखंड में अब विश्वविद्यालय के कुलपतियों का चयन खोज समिति करेगी. राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में लाए गए झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 के अनुसार कुलपतियों के चयन से पहले एक शिक्षाविद की अध्यक्षता में खोज समिति गठित होगी.

इसमें सदस्य होंगे कुलाधिपति द्वारा नामित प्रतिष्ठित शिक्षाविद्- अध्यक्ष, राज्य सरकार द्वारा नामित, संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित उच्च राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त संस्था या विश्वविद्यालय का निदेशक या प्रमुख- सदस्य, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का प्रतिनिधि सदस्य और अपर मुख्य सचिव या प्रधान सचिव या सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार- सदस्य शामिल होंगे.

इसके अलावा संबंधित विश्वविद्यालय का कुलसचिव खोज समिति का सचिव होंगे लेकिन उसे मतदान का अधिकार नहीं होगा. समिति में नामित किए गए सदस्य वैसे व्यक्ति होंगे जो कभी भी संबंधित विश्वविद्यालय अथवा उस विश्वविद्यालय के किसी महाविद्यालय अथवा किसी मान्यता प्राप्त संस्था से संबंधित नहीं होंगे. मताधिकार प्राप्त न्यूनतम तीन सदस्यों की उपस्थिति के बिना समिति की बैठक आयोजित नहीं हो सकेगी. समिति, कुलपति के रूप में चयन हेतु विचार के लिए तीन से पाँच सर्वाधिक योग्य व्यक्तियों के नाम के पैनल की अनुशंसा बंद लिफाफे में प्रस्तुत करेगी.

अनुशंसित व्यक्तियों के नाम वर्णमाला क्रम से होंगे तथा उनमें किसी प्रकार की वरीयता नहीं दर्शायी जाएगी. इस पैनल में अनुशंसित प्रत्येक व्यक्ति की उपयुक्तता पर एक विस्तृत विवरण भी संलग्न किया जाएगा. इस पद के लिए उपयुक्त नामों का पैनल तैयार करते समय यदि समिति के सदस्यों के बीच मतों की समानता होती है तो समिति के अध्यक्ष को निर्णायक मत का अधिकार होगा. विधेयक के अनुसार कुलपति के रूप में नियुक्ति के लिए पात्रता की शर्तों और नामों की अनुशंसा प्रक्रिया को व्यापक प्रचार प्रसार किया जाएगा, ताकि योग्यतम उम्मीदवार की अनुशंसा सुनिश्चित की जा सके.

झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 के प्रावधानों पर प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने सदन में एतराज जताते हुए इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग करते रहे. सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष विपक्ष आमने सामने होता दिखा. विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार ने इस विधेयक के खिलाफ लाए गए संशोधन पर बारी बारी से जवाब देकर खारिज करते दिखे तत्पश्चात इसे विधानसभा से पारित कर दी गई.

बीजेपी विधायक नीरा यादव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 135 पन्नों के इस विधेयक पर दो घंटे भी चर्चा सदन में नहीं हुआ और इसे पारित किया जाना आप समझ सकते हैं कि बहुमत के घमंड में कितने ये चूर हैं. जेएलकेएम विधायक जयराम महतो कहते हैं कि सदन में ज्यादा से ज्यादा चर्चा होनी चाहिए क्योंकि यह विधेयक छात्र नौजवान से जुड़ा हुआ है और सरकार क्या बदलाव करना चाहती है इसपर चर्चा होनी चाहिए थी मगर ऐसा नहीं हुआ.

झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 विधानसभा से पारित होने के बाद राज्यपाल की सहमति के लिए अब लोकभवन भेजा जाएगा. कुलाधिपति एवं मुख्यमंत्री, संयुक्त रुप से खोज समिति द्वारा पैनल में अनुशंसित व्यक्तियों में से किसी एक को कुलपति के रूप में चयनित कर सकेंगे, तत्पश्चात कुलाधिपति द्वारा कुलपति की नियुक्ति की जाएगी. यदि वह अनुशंसित व्यक्तियों में से किसी को भी चयनित नहीं करेंगे, तो वह या तो उसी समिति से अथवा इस उद्देश्य से गठित नई समिति से एक नया पैनल मांग सकते हैं.

कुलपति की चयन प्रक्रिया निश्चित रूप से कुलपति पद की रिक्ति से न्यूनतम छह माह पूर्व आरम्भ होगी तथा कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया कुलपति पद की रिक्ति से न्यूनतम एक माह पूर्व निश्चित रूप से पूर्ण हो जाएगी. समिति के सदस्य सचिव के तौर पर यह कुलसचिव का उत्तरदायित्व होगा.कुलपति पद के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति की आयु आवेदन की अंतिम तिथि को वर्ष से 65 अधिक नहीं होनी चाहिए. बता दें कि वर्तमान समय में कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल के अधीन है यदि इस विधेयक की मंजूरी लोकभवन से मिल जाती है तो स्वभाविक रुप से चयन प्रक्रिया में बदलाव हो जाएगा.