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लापता बच्चें का पता अब तक नहीं लग पाया, कोई सुराग नहीं, कोई लीड नहीं, इतने दिन बीत जानें पर भी पुलिस के हाथ खाली..मां हो रही बेसुध...

Ranchi: बच्चों की मां एक कमरे में बेसुध पड़ी हुई थी. परिजनों ने बताया कि मां ने खाना त्याग दिया है. अपने दोनों बच्चों की याद में वह बार-बार होश खो बैठ रही है. बच्चों की रिश्तेदार रीना देवी ने बताया कि किसी तरह से बच्चे वापस आ जाएं, बच्चों की मां की हालत बेहद खराब होती जा रही है...
 
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Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची के मौसीबाड़ी स्थित खटाल इलाके से दो मासूम बच्चों के रहस्यमयी तरीके से लापता होने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है.  2 जनवरी से अब तक सुनील कुमार के 5 वर्षीय बेटे अंश और 4 साल की बेटी अंशिका का कोई सुराग नहीं मिल पाया है. दोनों बच्चे घर से बिस्किट लेने के लिए निकले थे, लेकिन इसके बाद वे वापस नहीं लौटे. परिवार की चिंता हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती जा रही है. पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चों का पता नहीं चल सका है. मामला अब पूरे इलाके में चिंता और भय का कारण बन गया है. 

राजधानी रांची के धुर्वा के रहने वाले दो मासूम बच्चे अंश और अंशिका के रहस्मय तरीके से गायब होने के कुल 8 दिन बीत चुके हैं. दोनों बच्चों को खोज निकालने के लिए रांची पुलिस अपनी पूरी ताकत लगा चुकी है, लेकिन बच्चों का सुराग तक पुलिस हासिल नहीं कर पाई है. बच्चों के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हुई, यह सोच सोच कर पूरा परिवार परेशान है.

आठ दिन से गायब हैं दोनों बच्चे, मां बार-बार हो रही बेहोश

रांची के धुर्वा से 2 जनवरी से गायब दो मासूम बच्चों की तलाश को लेकर रांची पुलिस ने एक जंबो टीम बनाई, लेकिन 8 दिन बीत जाने के बाद भी दोनों मासूम बच्चों का पता पुलिस हासिल नहीं कर पाई है. जैसे-जैसे समय बीत रहा है, दोनों मासूमों के परिजन हताश हो रहे हैं. बच्चों की मां अब बेसुध हो चुकी है, बार-बार बेहोश हो रही है. खाना-पीना तक छोड़ दिया है.

बच्चों की मां एक कमरे में बेसुध पड़ी हुई थी. परिजनों ने बताया कि मां ने खाना त्याग दिया है. अपने दोनों बच्चों की याद में वह बार-बार होश खो बैठ रही है. बच्चों की रिश्तेदार रीना देवी ने बताया कि किसी तरह से बच्चे वापस आ जाएं, बच्चों की मां की हालत बेहद खराब होती जा रही है.

पुलिस पर सवाल

आठ दिन बीत जाने के बाद भी बच्चों का कोई सुराग नहीं मिलने की वजह से परिवार और बस्ती में पुलिस के प्रति जबरदस्त आक्रोश है. बस्ती के लोगों का कहना है कि अगर पुलिस ने सही समय पर बच्चों की तलाश शुरू की होती तो ऐसी स्थिति नहीं बनती. बस्ती और परिवार वालों का धुर्वा थाना प्रभारी के प्रति खासकर बेहद आक्रोश है. बस्ती के ही रहने वाले विजय कुमार ने बताया कि दो जनवरी को बच्चे ढाई बजे के करीब घर से निकले थे. दो से तीन घंटे तक परिजनों ने उन्हें खोजा और फिर शाम छह बजे वे धुर्वा थाना पहुंच गए. लेकिन पुलिस ने बच्चों को खोजने के बजाय उन्हीं से दस तरह के सवाल पूछने शुरू कर दिया. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने चार जनवरी से जो तेजी दिखाई अगर वही तेजी दो जनवरी से दिखाई होती तो आज बच्चे घर पर होते.

पिता बोले - केवल आश्वासन मिल रहा

बच्चों के पिता सुनील कुमार ने बताया कि उनके बच्चों का अब तक कोई पता नहीं चला है, जिससे पूरा परिवार बेहद परेशान है. उन्होंने कहा कि परिवार की किसी से कोई दुश्मनी या विवाद नहीं है. डेढ़ साल पहले वे खुद रांची आए थे और दूध का कारोबार शुरू किया. जबकि बच्चे छह महीने पहले रांची आए. रांची लाने के बाद उनका स्कूल में एडमिशन कराया. बच्चे अकेले ही स्कूल आना जाना करते थे. दुकान भी अक्सर जाते थे. दो जनवरी को भी दुकान ही गए थे और तब से ही वे गायब हैं. पुलिस केवल आश्वासन दे रही है.

Dhurwa Children missing

रांची के धुर्वा इलाके से 2 जनवरी से गायब दो मासूम बच्चों को खोजने के लिए रांची पुलिस अपनी पूरी ताकत लगा चुकी है. जब पुलिस को लगा कि बच्चों की तलाश में आम लोगो की भी मदद चाहिए, तब पुलिस की तरफ से 51 हजार पुरस्कार राशि की घोषणा की गई. इनाम जारी करने के बाद दोनों बच्चों को खोज निकालने के लिए रांची पुलिस ने हाउस सर्च अभियान भी चलाया. लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. बुधवार को तो रांची पुलिस ने अपने पूरे स्वान दस्ता को ही धुर्वा में उतार दिया. खोजी कुत्ते लगातार बच्चों की तलाश करते रहें लेकिन उन्हें भी कोई सफलता नहीं मिली.

बच्चों के पुराने कपड़े डॉग स्क्वायड की टीम को उपलब्ध कराए गए ताकि अगर इलाके में बच्चों को कहीं छुपाया गया हो या फिर किसी जगह बच्चे फंस गए हो तो उन्हें खोजा जा सके लेकिन मेहनत के बावजूद पुलिस को कोई सफलता हाथ नहीं लगी.

Dhurwa Children missing

बस स्टैंड से लेकर रेलवे स्टेशन तक की जांच

रांची पुलिस के द्वारा रांची के सभी रेलवे स्टेशन, सभी बस स्टैंड के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए. पुलिस की कई टीमें रांची, हटिया, टाटीसिलवे और नामकुम रेलवे स्टेशन भी पहुंची और वहां लोगों से पूछताछ की. बच्चों की तस्वीर दिखाई लेकिन कोई जानकारी उन्हें बच्चों को लेकर नहीं मिल पाई. बस स्टैंड में भी पुलिस ने एक-एक बस में यात्रियों से लेकर बस के ड्राइवर और खलासी तक से बच्चों की तस्वीर दिखाकर उनके बारे में जानकारी हासिल की, लेकिन कोई कुछ भी बता नहीं पाया. अब तक पुलिस इस मामले में 1000 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज चेक कर चुकी है.

एफएसएल जांच का भी नहीं मिला फायदा

बच्चों को कदमों के जरिये उनका सुराग हासिल करने के लिए पुलिस ने बच्चों के घर से लेकर दुकान तक का एफएसएल जांच भी किया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. रांची पुलिस ने दो जनवरी के कॉल डंप भी निकाले लेकिन उसमें भी कोई संदिग्ध नंबर नहीं मिला.

Dhurwa Children missing

आपको बता दें कि इस मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जिसमें ग्रामीण एसपी और सीटी एसपी के नेतृत्व में डीएसपी, इंस्पेक्टर और तकनीकी सेल की टीम को भी शामिल किया गया है ताकि हर संभावित पहलू की जांच की जा सके. हटिया डीएसपी प्रमोद मिश्रा घर त्याग कर बच्चो की खोज में लगे हुए हैं. लेकिन उनका प्रयास भी अब तक विफल रहा है. हटिया डीएसपी प्रमोद मिश्रा ने बताया कि वे लोग पूरा प्रयास कर रहे हैं कि बच्चे सकुशल बरामद हो जाए, इसके लिए हर तरह का प्रयास किया जा रहा है. हर तरह की जांच की जा रही है.

दो मासूम भाई बहनों के रहस्यमय तरीके से गायब हो जाने के बाद बस्ती में दहशत है. बस्ती की महिलाओं ने बताया कि वह वर्षों से बिहार से आकर यहां रह रहे हैं. आज तक बच्चों के गायब होने की कोई घटना बस्ती में नहीं हुई है. यह पहली बार है जब दो मासूम बच्चे रहस्यमय तरीके से गायब हो गए. बच्चों के गायब होने की वजह से अब हर कोई अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देने लगा है. यहां तक कि उन्हें अब स्कूल और दुकान तक अकेले नहीं भेजा जा रहा है.

दुकानदार से हो चुकी है पूछताछ

बस्ती के लोगों ने बताया कि जिस दुकान पर जाने के बाद दोनों बच्चे गायब हुए पुलिस ने उन्हें तीन दिनों से हिरासत में रखा है. उनसे पूछताछ में क्या कुछ मिला, इसकी जानकारी नहीं है. मोहल्ले वालों ने यह भी बताया कि स्वान दस्ता बार-बार दुकान तक ही जा रहा था. ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि बच्चे अक्सर दुकान जाया करते थे.

ह्यूमन इंटेलिजेंस एक्टिव

रांची पुलिस के द्वारा बच्चों को खोज निकालने के लिए ह्यूमन इंटेलिजेंस को भी एक्टिव किया गया है. मुखबिरों के द्वारा मानव तस्करों सहित दूसरे प्रकार के गैंग के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. राज्य के बाहर भी कुछ टीमों को लगाया गया है. हर तरफ बच्चों के पोस्टर लगाए गए हैं. पोस्टर को रांची पुलिस के एक्स से लेकर फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया पर भी डाला गया है. चूंकि मामले को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान भी ले लिया है ऐसे में पुलिस के ऊपर भारी दबाव है. झारखंड के डीजीपी तदाशा मिश्र लगातार इस संबंध में रांची पुलिस के अधिकारियों से जानकारी ले रही हैं.