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70 वर्षों से शिक्षा का केंद्र रहा स्कूल कोर्ट आदेश के बाद सील, 300 बच्चों की पढ़ाई पर ब्रेक

Deoghar:  70 साल पुराने स्कूल पर ताला लगने से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है. इस फैसले से स्कूल में पढ़ने वाले करीब 300 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई अचानक ठप हो गई है. स्कूल बंद होने के बाद अभिभावकों और छात्रों में गहरी चिंता देखी जा रही है.
 
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Deoghar: कोर्ट के आदेश के बाद क्षेत्र के 70 साल पुराने स्कूल पर ताला लगने से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है. इस फैसले से स्कूल में पढ़ने वाले करीब 300 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई अचानक ठप हो गई है. स्कूल बंद होने के बाद अभिभावकों और छात्रों में गहरी चिंता देखी जा रही है.

कोर्ट के आदेश के बाद 70 साल पुराने स्कूल पर लगा ताला, 300 बच्चों की पढ़ाई  पर संकट!

बताया जा रहा है कि यह स्कूल पिछले सात दशकों से इलाके में शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है. कई पीढ़ियों ने यहीं से शिक्षा हासिल की, लेकिन अब कानूनी विवाद और न्यायालय के आदेश के चलते स्कूल को बंद करना पड़ा. आदेश के बाद प्रशासन की ओर से स्कूल परिसर को सील कर दिया गया. इस घटना के बाद न सिर्फ विद्यालय का संचालन प्रभावित हुआ, बल्कि यहां अध्ययनरत करीब 300 विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी नियमित पढ़ाई को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेश कुमार ने बताया कि विद्यालय और ग्रामीणों के बीच इस भूमि को लेकर लगभग दो दशकों से न्यायालय में विवाद चल रहा था. लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने ग्रामीणों के पक्ष में फैसला सुनाया.

जिसके अनुपालन में रविवार को विद्यालय भवन में ताला लगा दिया गया. उन्होंने कहा कि विद्यालय बंद होने के बाद सबसे बड़ी चिंता यह है कि सोमवार से बच्चों की पढ़ाई किस प्रकार संचालित होगी. इस संबंध में उन्होंने तत्काल उच्च अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत करा दिया है.

वहीं, पूरे प्रकरण पर जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने स्वीकार किया कि पूर्व में विभागीय स्तर पर हुई लापरवाही के कारण शिक्षा विभाग को न्यायालय में हार का सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि यदि समय रहते विभाग ने आवश्यक तथ्यों और पक्षों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष रखा होता तो संभव है कि स्थिति अलग होती.

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग न्यायालय के आदेश का पूर्ण सम्मान करते हुए विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने में जुट गया है. जिला शिक्षा अधीक्षक ने बताया कि फिलहाल विद्यालय के समीप स्थित दूसरे स्कूल भवन में बच्चों की पढ़ाई की अस्थायी व्यवस्था कर दी गई है, ताकि शिक्षण कार्य प्रभावित न हो. साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

बता दें कि इस विद्यालय में कक्षा एक से आठवीं तक की पढ़ाई होती है और यहां लगभग 300 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. ऐसे में विद्यालय पर ताला लगने की घटना ने अभिभावकों, विद्यार्थियों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विद्यालय पिछले सात दशकों से गांव की शिक्षा का केंद्र रहा है. क्षेत्र के अनेक लोगों ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इसी विद्यालय से प्राप्त की है. ऐसे में विद्यालय पर ताला लगना केवल एक प्रशासनिक या कानूनी घटना नहीं, बल्कि गांव की भावनाओं और वर्षों पुरानी यादों से भी जुड़ा विषय बन गया है.