कोडरमा के प्रतिक पूरे देश के नौजवान छात्रों के लिए बने प्रेरणा...गरीबी और टपकते घर में रहकर की सेल्फ स्टडी,आज बने रेलवे में बना इंजीनियर
Jharkhand Desk: शिक्षा लोगों को न केवल दुनिया के बारे में, बल्कि खुद के बारे में भी ज़्यादा जागरूक बनाती है और जब आप अपनी खूबियों को पहचान लेते हैं, तो आप आसानी से एक सफल करियर की ओर सही रास्ता बना लेते हैं. एक पुरानी कहावत है, "अगर आप किसी को एक मछली देते हैं, तो आप उसे एक दिन के लिए खाना खिलाते हैं; अगर आप किसी को मछली पकड़ना सिखाते हैं, तो आप उसे ज़िंदगी भर के लिए खाना खिलाते हैं. अपने पैशन को अपना जुनून बनाईये, बेशक एक दिन आपको सफलता जरूर मिलेगी.

झारखण्ड की राजधानी राॅची से 165 किलोमीटर की दूरी पर कोडरमा जिला अवस्थित है उस जिले के सतगावां प्रखंड के कटैया पंचायत के पोखरडीहा गांव के लड़के ने अपने पैशन को गरीबी का मोहताज नहीं बनने दिया. जी हाँ हम बात कर रहे है प्रदीप कुमार की. प्रदीप कुमार ने रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है. उनका चयन सिविल विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर हुआ है. यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व की बात है.
मिट्टी के घर से टपकता है पानी, स्थिति सुधारने के लिए शुरू की थी तैयारी
प्रदीप बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे. उन्होंने 2016 में गांव के ही उत्क्रमित उच्च विद्यालय, पोखरडीहा से मैट्रिक की परीक्षा 75 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण किया. इसके बाद 2017-20 तक उन्होंने सिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में पॉलिटेक्निक डिप्लोमा पूरा किया. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने यह ठान लिया था कि अपनी मेहनत और लगन से परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारना है. उनके पिता नरेश प्रसाद यादव किसान हैं पूरा परिवार आज भी मिट्टी के कच्चे मकान में रहता है. बरसात के दिनों में मकान से पानी टपकना उनकी सबसे बड़ी परेशानी रही है. लेकिन इन कठिनाइयों ने प्रदीप के हौसले को और मजबूत किया.
गरीबी और सीमित संसाधन में कभी नहीं मानी हार
पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रदीप ने नौकरी की तैयारी सेल्फ स्टडी के दम पर शुरू की. सीमित संसाधनों और गरीबी के बीच लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने कभी हार नहीं मानी. आखिरकार 2025 में उनका चयन सिविल इंजीनियर के पद पर हुआ. इस सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है. मां, दादी, चाची और दीदी ने मिठाई खिलाकर प्रदीप का मुंह मीठा कराया. छोटे चाचा पप्पू यादव ने बताया कि प्रदीप की मेहनत और लगन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है.
क्षेत्र के युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत
गांव के लोग प्रदीप की सफलता को अपनी प्रेरणा मान रहे हैं. उनका कहना है कि प्रदीप ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियाँ भी इंसान को आगे बढ़ने से रोक नहीं सकतीं, यदि मन में दृढ़ संकल्प और मेहनत का जज्बा हो. प्रदीप के मिलनसार स्वभाव और सरल व्यवहार ने उन्हें ग्रामीणों के बीच और भी प्रिय बना दिया है. आज वे पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं. जिन्होंने संघर्ष के बल पर सफलता का मुकाम हासिल किया है.







