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संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था पर मच सकता है घमासान...

Jharkhand Desk: इस दौरान सरकार 8 दिसंबर को अनुपूरक बजट लाएगी. साथ कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की भी संभावना है. वहीं, विपक्ष सरकार को घेरने के लिए बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर हमलावर रुख अपनाने की योजना बना रहा है...
 
JHARKHAND DESK

Jharkhand Desk: झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही सदन में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में जुट गए हैं. 05 से 11 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है. इसलिए दोनों खेमे रणनीति को धार देने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. राज्यपाल की मंजूरी के बाद झारखंड विधानसभा का चतुर्थ (शीतकालीन) सत्र 5 से 11 दिसंबर तक बुलाया गया है. इस दौरान सरकार 8 दिसंबर को अनुपूरक बजट लाएगी. साथ कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की भी संभावना है. वहीं, विपक्ष सरकार को घेरने के लिए बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर हमलावर रुख अपनाने की योजना बना रहा है.

शीतकालीन सत्र: भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था पर खींचतान तय, धारदार रणनीति  बनाने में जुटा सत्ता पक्ष और विपक्ष

स्पीकर की सर्वदलीय बैठक

विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो ने 4 दिसंबर को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक में सत्र के सुचारू संचालन, अधिक से अधिक समय सदन चलाने और जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस सुनिश्चित करने पर सभी दलों से सहयोग मांगा जाएगा. इससे पहले 3 दिसंबर को अधिकारियों के साथ स्पीकर उच्च स्तरीय बैठक करेंगे. इसमें प्रशासनिक तैयारी को अंतिम रूप दिया जाएगा.

सत्ता पक्ष ने भी 4 दिसंबर की शाम को एटीआई सभागार में अहम बैठक बुलाई है, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे. इस बैठक में सहयोगी दलों के नेता और विधायक शामिल होकर सदन में समन्वित व आक्रामक रणनीति पर मंथन करेंगे, ताकि विपक्ष के हर सवाल का जोरदार जवाब दिया जा सके और सरकार की उपलब्धियों को प्रभावी तरीके से पेश किया जा सके. इससे पहले कांग्रेस दफ्तर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक होगी.

विपक्ष की तैयारी

उधर, भाजपा और उसके सहयोगी दल अलग-अलग बैठकों के जरिए सरकार को घेरने की योजना पर काम कर रहे हैं. विपक्ष की कोशिश रहेगी कि प्रश्नकाल से लेकर शून्य काल तक हर अवसर पर सरकार से जवाबदेही तय कराई जाए और कानून-व्यवस्था, खनन, नियुक्ति घोटालों तथा किसानों की समस्याओं जैसे मुद्दों को पूरे दमखम के साथ उठाया जाए.

इस सत्र में मंईयां सम्मान योजना का भी मसाला उठने की पूरी संभावना है. सवाल उठाने की तैयारी है कि आखिर नई लाभुकों को योजना से क्यों नहीं जोड़ा जा रहा है. वैसे मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने सरकार के 1 साल पूरा होने पर आरोप पत्र जारी कर बता दिया है कि सद न के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की उसकी तैयारी कैसी रहेगी. भाजपा ने 7 अक्टूबर को प्रदेश कार्यालय में बैठक बुलाई है.

सत्र के दौरान जहां सरकार अपने जनकल्याणकारी कदमों का बखान करने की तैयारी में है. वहीं, विपक्ष इसे जनता के सरोकारों की आवाज बताकर सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने की रणनीति पर अडिग है. अब नजरें 5 दिसंबर से शुरू हो रहे सत्र पर टिकी हैं. जहां झारखंड की सियासत एक बार फिर सदन के भीतर गर्माती दिखेगी और राजनीतिक समीकरणों की नई बिसात बिछ सकती है.