CM नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर बिहार की राजनीति में भूचाल और जनता में मायूसी के माहौल के बीच झारखंड में सियासी तूफान...
Ranchi: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है. पिछले दो दशकों से अधिक समय से बिहार की कमान संभाल रहे नीतीश कुमार अब दिल्ली की राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं. उनके इस फैसले के बाद बिहार में नई सरकार बनने की चर्चाएं जोरों पर हैं और राजनीतिक गलियारों में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है. यह मुद्दा अब झारखंड से लेकर बिहार तक सुर्खियों में छाया हुआ है.
नीतीश कुमार ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा था कि पिछले दो दशक से अधिक समय से उनके मन में राज्यसभा जाने की इच्छा थी. 5 मार्च को पटना में नामांकन दाखिल करने के दौरान गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे. एनडीए के अन्य उम्मीदवारों नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार ने भी संयुक्त रूप से पर्चा भरा.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता शमशेर आलम ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, "भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा उजागर हो चुका है. जैसे सांप अपने बच्चों को खा जाता है, वैसे ही भाजपा अपने सहयोगी दलों को पहले कमजोर करती है और फिर निगल जाती है. नीतीश कुमार इसी का शिकार हुए हैं."उन्होंने आगे कहा कि नीतीश के बाद बनी भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार और अराजकता का बोलबाला होगा. "रिमोट दिल्ली में होगा और दिल्ली के रिमोट से पूरा बिहार त्रस्त हो जाएगा."
'कांग्रेस को अपनी चिंता करनी चाहिए'
भाजपा ने कांग्रेस के बयानों को खारिज करते हुए तीखा जवाब दिया. भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी उजाड़-फिजूल बयानों से चर्चा में रहना चाहती है. बिहार में कांग्रेस का न तो कोई जनाधार है और न ही कोई उसकी पूछता है. सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए ऐसी बातें की जा रही हैं.
उन्होंने जोर देकर कहा कि एनडीए बिहार में पूरी मजबूती से खड़ा है. उन्होंने कहा कि जो भी निर्णय हुआ है और आगे होगा, वह राज्यहित और देशहित में होगा. कांग्रेस को एनडीए के बारे में सोचने की बजाय खुद अपनी चिंता करनी चाहिए. राहुल गांधी को पार्टी क्यों झेल रही है? कोई बड़ा नेता क्यों सामने नहीं आ रहा?
नीतीश के फैसले के मायने
नीतीश कुमार 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर काबिज रहे हैं और कई बार गठबंधन बदलकर सत्ता संभाली. 2025 के विधानसभा चुनाव में '25 से 30 फिर से नीतीश' के नारे के साथ एनडीए ने जीत हासिल की थी, लेकिन महज चार महीने बाद यह फैसला आया है. विपक्ष इसे भाजपा द्वारा 'इस्तेमाल' करार दे रहा है, जबकि एनडीए इसे नीतीश की व्यक्तिगत इच्छा और रणनीतिक कदम बता रहा है.
नीतीश के इस्तीफे के बाद बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनने की संभावना है. नए सीएम के नाम पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है. यह घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है.







