हजारीबाग से जुड़ा ट्रेजरी स्कैम, अब जिस जिले में बना अकाउंटेंट वहीं खुलेगी जांच फाइल, जानिए पूरा मामला...
Jharkhand: झारखंड में ट्रेजरी से फर्जी निकासी का मामला अब एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है. शुरुआती जांच में यह सामने आ रहा है कि चारा घोटाले की तर्ज पर यहां भी सिस्टम की कमजोरियों को पहचानकर उसे सुनियोजित तरीके से तोड़ा गया.

सूत्रों के मुताबिक, कुबेर बिल मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल में मौजूद तकनीकी खामियों को निशाना बनाकर सरकारी कर्मचारियों के एक समूह ने यह खेल रचा. यह केवल एक-दो घटनाओं का मामला नहीं, बल्कि पैटर्न आधारित ऑपरेशन जैसा दिख रहा है. बोकारो और हजारीबाग में फर्जी निकासी सामने आने के बाद अब गढ़वा और साहिबगंज का एसपी ऑफिस भी जांच के दायरे में आ गया है.
आशंका है कि इन जिलों में भी इसी तरीके से ट्रेजरी से रकम निकाली गई होगी. जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि जिन कर्मियों पर शक है, वे पहले हजारीबाग पुलिस ऑफिस में काम कर चुके हैं. बोकारो से गिरफ्तार अकाउंटेंट कौशल पांडेय भी पहले हजारीबाग में पोस्टेड था.
वर्ष 2012-13 के दौरान हजारीबाग में तैनात कुछ कर्मियों ने सिस्टम की कार्यप्रणाली और उसकी कमजोरियों को गहराई से समझा. यहीं टेस्टिंग और ट्रेनिंग ग्राउंड तैयार हुआ. यहां सीखा गया कि किस तरह पोर्टल के भीतर रहते हुए ही उसे मैनेज किया जा सकता है. बाद में यही लोग अलग-अलग जिलों गढ़वा, साहिबगंज और बोकारो में पदस्थापित हुए और वहीं से फर्जी निकासी का सिलसिला शुरू हुआ. इन कर्मियों ने कुबेर पोर्टल की कमजोर कड़ी को पहचानकर उसे फर्जीवाड़ा करने में लगातार इस्तेमाल किया.
एक ही समय कई डुप्लीकेट बिल पास जांच में जो पैटर्न सामने आया है, वह गंभीर है। एक ही अवधि में कई बार डुप्लीकेट बिल पास हुए, कई सैलरी बिल प्रोसेस किए गए. इतना ही नहीं अलग-अलग ट्रेजरी वाउचर नंबर से एक जैसी राशि की बार-बार निकासी की गई। पेरोल प्रोसेसिंग में वैलिडेशन फेल हुई. मास्टर डेटा की इंटीग्रिटी कमजोर थी. पे एंटाइटलमेंट के गलत मैपिंग के प्रमाण मिले हैं. इन सबमें सबसे बड़ी चूक यह रही कि डुप्लीकेट एंट्री पकड़ने का कोई मजबूत मैकेनिज्म सक्रिय ही नहीं था.
अब बिना सत्यापन निकासी नहीं होगी मामला सामने आने के बाद वित्त विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है. सचिव प्रशांत कुमार ने सभी विभागों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना सत्यापन प्रमाणपत्र के किसी भी प्रकार की वेतन निकासी नहीं होगी. ओटीपी साझा करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. लंबे समय से एक ही पद पर जमे कर्मियों पर निगरानी रखी जा रही है. तीन साल से अधिक समय वाले लिपिकों का ट्रांसफर किया जाएगा. सरकार ने संकेत दिए हैं कि अब जवाबदेही तय की जाएगी.
आगे की जांच में क्या अहम... अब जांच एजेंसियां यह खंगाल रही हैं कि क्या सभी मामलों में एक ही मॉड्यूल काम कर रहा था. किन-किन जिलों में एक जैसे पैटर्न से निकासी हुई है. सिस्टम एक्सेस और ओटीपी का दुरुपयोग किस स्तर पर हुआ है. जांच का फोकस अब व्यक्तिगत गलती से आगे बढ़कर संगठित सिस्टम दुरुपयोग पर केंद्रित हो गया है.
रोकथाम के लिए नए प्रोटोकॉल भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए नए प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं. अब सर्विस बुक से कर्मचारी का पूरा मिलान होगा. कार्यरत होने की पुष्टि के बाद ही वेतन भुगतान किया जाएगा। बैंक खाते का पासबुक और चेक से सत्यापन करना होगा. हर भुगतान से पहले अब मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन लागू करने की तैयारी की जा रही है.
निलंबित अकांउटेंट को मिले हैं कई प्रशस्ति पत्र
बोकारो पुलिस के अकांउटेंट कौशल पांडेय को कठिन परिश्रम व कर्तव्य परायणता के लिए कई प्रशस्ति पत्र मिले हैं. प्रशस्ति पत्र देने वालों में राज्य के तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता से लेकर बजट डीआईजी व कोयला क्षेत्र के डीआईजी शामिल हैं. यह सारे प्रशस्ति पत्र उसी अवधि में मिले हैं, जब वे उपेंद्र सिंह के नाम पर फर्जीवाड़ा कर सरकारी पैसे की निकासी कर रहे थे. गिरफ्तारी के बाद अब बोकारो एसपी ने कौशल को निलंबित कर दिया है.
ट्रेजरी मैसेंजर ही ले जाएगा बिल: बोकारो डीसी ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि केवल ट्रेजरी मैसेंजर के माध्यम से ही बिल जमा होंगे. कोषागार में अनधिकृत प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा. वित्त विभाग की टीम आज करेगी जांच: रिटायर्ड हवलदार के नाम पर ट्रेजरी से सरकारी पैसा निकासी के मामले में वित्त विभाग की टीम गुरुवार को बोकारो आएगी। टीम एसपी कार्यालय और ट्रेजरी में जांच करेगी.







