बाल अधिकारों का उल्लंघन: लोहरदगा के नाबालिग बच्चों से लातेहार में कराई जा रही थी मजदूरी..10 नाबालिग बाल मजदूर रेस्क्यू...
Latehar: झारखंड में बाल मजदूरी के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एक गंभीर मामला सामने आया है. लोहरदगा जिले के नाबालिग बच्चों से लातेहार में मजदूरी कराए जाने का खुलासा हुआ है. प्रशासन और बाल संरक्षण इकाई की संयुक्त कार्रवाई में 10 नाबालिग बाल मजदूरों को रेस्क्यू किया गया है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोहरदगा के विभिन्न गांवों से नाबालिग बच्चों को बहला-फुसलाकर या काम का झांसा देकर लातेहार लाया गया था. यहां उनसे निर्माण कार्य और अन्य शारीरिक श्रम कराया जा रहा था. बच्चों की उम्र 12 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है. सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन, श्रम विभाग और बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम ने छापेमारी कर बच्चों को मुक्त कराया.
रेस्क्यू के दौरान बच्चों की स्थिति चिंताजनक पाई गई. कई बच्चों ने बताया कि उनसे लंबे समय तक काम कराया जाता था और उचित भोजन व आराम की सुविधा नहीं दी जाती थी. कुछ बच्चों को मजदूरी का पूरा पैसा भी नहीं मिला था. प्राथमिक जांच में बाल श्रम निषेध एवं विनियमन अधिनियम के उल्लंघन की पुष्टि हुई है.
रेस्क्यू किए गए सभी नाबालिगों को पहले सुरक्षित स्थान पर रखा गया, जहां उनका मेडिकल चेक-अप कराया गया. इसके बाद उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया. सीडब्ल्यूसी ने बच्चों को अस्थायी रूप से संरक्षण गृह भेजने और परिजनों से संपर्क कर पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं.
प्रशासन ने इस मामले में बाल मजदूरी कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. संबंधित ठेकेदार और काम दिलाने वाले लोगों की पहचान की जा रही है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी हाल में बाल मजदूरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
अधिकारियों का कहना है कि जिले में बाल मजदूरी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. आम लोगों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं बच्चों से मजदूरी कराए जाने की जानकारी मिले, तो तुरंत प्रशासन या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें.
लोहरदगा के नाबालिग बच्चों को लातेहार में मजदूरी के लिए ले जाने का यह मामला न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है. रेस्क्यू के बाद अब सबसे अहम चुनौती बच्चों का समुचित पुनर्वास और दोषियों को सजा दिलाना है.







