क्या है AI Tool ‘रक्षा’? बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल विवाह और ऑनलाइन यौन शोषण जैसे अपराधों पर रोक लगाने के लिए launch किया जा रहा AI.. जानिए...
Ranchi: ‘रक्षा’ झारखंड में बाल सुरक्षा के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है. अगर इसे राज्य के प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों और समुदायों के साथ मिलकर प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह हजारों बच्चों को सुरक्षित भविष्य दे सकता है...
Jan 16, 2026, 19:14 IST
Ranchi: झारखंड में बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल विवाह और ऑनलाइन यौन शोषण जैसे अपराधों से निपटने के लिए अब एक नई और मजबूत तकनीकी से मदद मिलने जा रही है. कृत्रिम मेधा (AI) पर आधारित टूल ‘रक्षा’ के देशव्यापी लॉन्च से राज्य के बाल सुरक्षा तंत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है. खास तौर पर झारखंड जैसे राज्य में, जहां आर्थिक रूप से कमजोर और हाशिये पर रहने वाले परिवारों के बच्चे अक्सर ट्रैफिकिंग गिरोहों के निशाने पर रहते हैं, यह टूल बेहद कारगर साबित हो सकता है.
संवेदनशील परिवारों की हो सकेगी निगरानी
‘रक्षा’ को बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले देश के बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने विकसित किया है. यह टूल देशभर के आंकड़ों का अध्ययन कर यह पहचान करने में सक्षम है कि कौन-से इलाके, परिवार और बच्चे ट्रैफिकिंग या बाल विवाह के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील हैं. इसके जरिए ट्रैफिकिंग में शामिल गिरोहों, उनके स्रोत और गंतव्य स्थानों की पहचान और निगरानी भी की जा सकती है.
झारखंड में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क के 22 सहयोगी संगठन राज्य के 24 जिलों में काम कर रहे हैं. ऐसे में ‘रक्षा’ के जरिए जमीनी स्तर पर समय रहते हस्तक्षेप करना और बच्चों को अपराध का शिकार बनने से पहले बचाना आसान होगा.
झारखंड में बच्चों के खिलाफ अपराध में कमी
झारखंड उन गिने-चुने राज्यों में शामिल है, जहां पिछले कुछ वर्षों में बच्चों के खिलाफ अपराधों में कमी दर्ज की गई है, लेकिन चुनौती अब भी बनी हुई है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में राज्य में बच्चों के खिलाफ 1867 मामले दर्ज हुए थे, 2022 में यह संख्या 1917 रही, जबकि 2023 में घटकर 1626 हो गई. विशेषज्ञों का मानना है कि ‘रक्षा’ जैसे एआई आधारित टूल से इस गिरावट को और तेज किया जा सकता है.
तीन स्तर पर कैसे काम करेगा यह टूल
पहला - आर्थिक असुरक्षा से जूझ रहे परिवारों की पहचान कर बाल विवाह जैसे अपराधों को रोकना.
दूसरा - ट्रैफिकिंग जैसे संगठित अपराधों का पूर्वानुमान लगाकर उन्हें होने से पहले रोकना और गिरोहों की आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखना.
तीसरा - डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के हॉटस्पॉट और आईपी पतों की पहचान कर ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करना.
झारखंड में बाल सुरक्षा के प्रयासों को मिलेगा बल
एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के प्री-समिट कार्यक्रम में लॉन्च हुए इस टूल की सराहना करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि तकनीक का सही इस्तेमाल समाज के सबसे कमजोर वर्ग और गरीब बच्चों की सुरक्षा में होना चाहिए. वहीं जस्ट राइट्स ऑफ चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि इस तकनीक से झारखंड के साथ-साथ पूरे देश में बच्चों की सुरक्षा और समृद्धि को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
कुल मिलाकर, ‘रक्षा’ झारखंड में बाल सुरक्षा के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है. अगर इसे राज्य के प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों और समुदायों के साथ मिलकर प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह हजारों बच्चों को सुरक्षित भविष्य दे सकता है.







