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जब-जब आदिवासी समाज बाबूलाल मरांडी को देखता है, उनके शासनकाल में हुए तपकरा गोलीकांड की गूंज और निहत्थे आदिवासी आंदोलनकारियों के मृत चेहरे याद आ जाते हैं- कांग्रेस

Ranchi: इसका स्पष्ट संदेश भाजपा को लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मिल चुका है. सोनाल शांति ने आरोप लगाया कि अपने शासनकाल में भाजपा ने आदिवासी समुदाय को छलने और भड़काने का काम किया. उन्होंने कहा कि जब-जब आदिवासी समाज बाबूलाल मरांडी को देखता है, तो झारखंड गठन के महज तीन माह बाद उनके शासनकाल में हुए तपकरा गोलीकांड की गूंज और निहत्थे आदिवासी आंदोलनकारियों के मृत चेहरे याद आ जाते हैं...
 
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Ranchi: प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा है कि आदिवासी समाज की सामाजिक संरचना और जीवन पद्धति की जड़ें इतनी गहरी और मजबूत हैं कि उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता. उन्होंने कहा कि संपूर्ण आदिवासी समाज यह भली-भांति समझता है कि झारखंड में उनकी आस्था, परंपरा और अस्तित्व का संरक्षण महागठबंधन सरकार ही कर सकती है. 

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इसका स्पष्ट संदेश भाजपा को लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मिल चुका है. सोनाल शांति ने आरोप लगाया कि अपने शासनकाल में भाजपा ने आदिवासी समुदाय को छलने और भड़काने का काम किया. उन्होंने कहा कि जब-जब आदिवासी समाज बाबूलाल मरांडी को देखता है, तो झारखंड गठन के महज तीन माह बाद उनके शासनकाल में हुए तपकरा गोलीकांड की गूंज और निहत्थे आदिवासी आंदोलनकारियों के मृत चेहरे याद आ जाते हैं.

वहीं, रघुवर दास के शासनकाल में पत्थलगड़ी आंदोलन के दौरान करीब 10 हजार आदिवासी लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे. ऐसे में आदिवासी समाज के लिए भाजपा को घड़ियाली आंसू बहाना बंद करना चाहिए. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि आदिवासी समुदाय को सशक्त बनाने के लिए महागठबंधन सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका सीधा लाभ उन्हें मिला है. अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून को लागू कर सरकार ने ग्रामीणों को अधिकार दिए हैं. 

उन्होंने कहा कि जहां एक ओर केंद्र सरकार गांवों के विकास से जुड़ी योजनाओं को चुनने का अधिकार ग्रामीणों से छीन रही है, वहीं झारखंड सरकार ने सशक्त पेसा नियमावली बनाकर यह अधिकार ग्रामवासियों को सौंपा है. सोनाल शांति ने कहा कि राज्य में 15 वर्षों से अधिक समय तक शासन करने वाली भाजपा ने पेसा कानून को कभी लागू नहीं किया. अब पेसा कानून लागू होने से भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं, क्योंकि उसने आदिवासी समुदाय को सिर्फ वोट बैंक समझकर अपनी जागीर मान लिया था. उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज के बीच विद्वेष और भ्रम फैलाने के लिए भाजपा बार-बार धर्मांतरण और मतांतरण की बात करती है, लेकिन इन आरोपों को संपूर्ण आदिवासी समाज पहले ही नकार चुका है.